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जरूरतमंदों के लिए हाजिर है यह इंस्पेक्टर

पूरा देश इस समय कोराना वायरस के संक्रमण के कारण लॉकडाउन के चलते अपने घऱों में रहने को बाध्य है। समृद्ध लोग को तो खाने पीने की मुश्किल नहीं है, लेकिन गरीबों के सामने भारी संकट पैदा हो गया है। छोटे-छोटे व्यवसायों, दुकानों और रोजगारों के बंद होने से गरीब लोगों के लिए खाने-पीने की मुश्किलें आ पड़ी हैं।

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sumanBy suman

Published on 18 May 2020 2:06 AM GMT

जरूरतमंदों के लिए हाजिर है यह इंस्पेक्टर
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श्रीनगर: पूरा देश इस समय कोराना वायरस के संक्रमण के कारण लॉकडाउन के चलते अपने घऱों में रहने को बाध्य है। समृद्ध लोग को तो खाने पीने की मुश्किल नहीं है, लेकिन गरीबों के सामने भारी संकट पैदा हो गया है। छोटे-छोटे व्यवसायों, दुकानों और रोजगारों के बंद होने से गरीब लोगों के लिए खाने-पीने की मुश्किलें आ पड़ी हैं। स्कूल बंद होने कारण बच्चों की पढ़ाई रूक गई। ऐसे वक्त में जम्मू-कश्मीर के गाडीगढ़ में तैनात 37 वर्षीय पुलिस इंस्पेक्टर ने जरूरतमंदों के लिए मदद का हाथ बढ़ाया है। वह कहते हैं कि संकट के समय में लोग अक्सर खाना और कपड़ा बांटते हैं लेकिन वे शिक्षा जैसे जरूरी पहलू को भूल जाते हैं। उन्होंने झुग्गी बस्ती के बच्चों के बीच पढ़ाई के लिए पाठ्य-सामग्री बांटी और जरूरतमंद लोगों के बीच राशन का थैला भी वितरित करवाया। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि जो भी मरीज चिकित्सीय मदद के लिए आएगा, वह उसकी मदद करेंगे। इससे पहले भी एक कूड़ा बीनने वाला व्यक्ति उनके पास खाने के लिए मदद मांगने आया था, उन्होंने देखा कि उसके पैर में इंफेक्शन है। उन्होंने उसे अस्पताल में भर्ती कराकर अपने पैसे से इलाज करवाया।

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जागरूकता सर्वोपरि

लॉकडाउन के दौरान उन्होंने गरीब मजदूरों और उनके परिवार के लोगों के कोविड-19 की महामारी के बारे में जागरूक किया और झुग्गी वस्तियों के बच्चों को अपनी जेब से पढ़ने-लिखने के लिए जरूरी सामग्री बांटी, ताकि वे पढ़ने, लिखने और चित्रकारी में खुद को व्यस्त रखें।

जरूरतमंदों की मदद

उनका कहना है कि सबके लिए यह जरूरी है कि मुश्किल घड़ी में वे खुद को सार्थक कामों में लगाएं। उन्होंने केवल बच्चों की शिक्षा का ही ख्याल नहीं रखा, बल्कि इलाके के पांच हजार जरूरतमंदों के बीच राशन भी बंटवाया, ताकि उन्हें लॉकडाउन में रोजगार न मिलने पर भूखे न सोना पड़े।

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स्वच्छता पर जोर

लॉकडाउन को लागू करने की जिम्मेदारी संभालते हुए वह इलाके में सोशल डिस्टेंसिंग और स्वच्छता पर जोर देते हैं। उनका कहना है कि लोगों से कानून का पालन करवाने के लिए आपको विनम्र रहना चाहिए। लोग अच्छे व्यवहार से ज्यादा कुछ नहीं चाहते। पिटाई से किसी समस्या का समाधान नहीं होता है।

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