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जयपुर: 25 अक्टूबर को धनतेरस और उसके आगे दिवाली , लेकिन दिवाली से एक दिन पहले छोटी दिवाली मनाई जाती हैं जिसे रूप चतुर्दशी या नरक चतुर्दशी कहते हैं। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का बड़ा महत्व हैं। व्रत व उपासना का विधान है। इस दिन किए गए व्रत से स्वस्थ और रूपवान …

दिवाली 27 अक्टूबर को है जिसकी तैयारी शुरु हो गई। मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए लोग अभी से साफ-सफाई खरीददारी शुरु कर दिए है। दीपो का त्योहार दीपावली हिंदूओंं का सबसे बड़ा त्योहार है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी  घर आती है

शरद पूर्णिमा अश्विन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस साल शरद पूर्णिमा 13 अक्टूबर को है। इस रात चन्द्रमा 16 कलाओं से पूर्ण होकर अमृत वर्षा करता है। इसलिए इस रात को खीर बनाकर खुले आसमान के तले रखा जाता है।

माह – आश्विन,तिथि – चतुर्दशी ,पक्ष – शुक्ल,वार – शनिवार,नक्षत्र – उत्तराभाद्रपद,सूर्योदय – 06:19,सूर्यास्त – 17:55, चौघड़ियां शुभ – 07:50 से 09:16,चर – 12:07 से 13:33,लाभ – 13:33 से 14:59,अमृत – 14:59 से 16:25।

नवरात्रि के नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवरात्रि का नौवां और अंतिम दिन माता सिद्धिदात्री को समर्पित है। नवदुर्गा का वह स्वरूप जो सिद्धि और मोक्ष देने वाली है उसे सिद्धिदात्री कहते हैं।नवरात्रि के नौवें दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा

हर व्यक्ति की कामना जीवन में समृद्धि पाने की होती है। इसके लिए लोग हर तरह के उपाय करते है। लेकिन सुख समृद्धि के लिए भाग्य का प्रबल होना भी जरूरी है। कहते है इसमें हाथ की रेखाओं व पर्वतों का बहुत महत्व होता है।

 यदि कोई काम नहीं बन रहा,आप परेशान हो,अच्छाई के बाद भी बुराई मिलती है, व्यापार नहीं चल रहा, काम में मन नहीं लगता तो आप नवरात्र में एक उपाय करें, जिससे आपकी परेशानी का हल मिलेगा। भगवती की इच्छा से आपके सारे काम बन जाएंगे।  

शारदीय नवरात्रि  शुरू हो चुका हैं। यह आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ हुआ है। इस दिन कलश स्थापना के साथ देवी के पूजा शुरु होती नवरात्र में दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि का महत्व केवल दुर्गा पूजा तक सीमित नहीं है। ब

जयपुर: माह – आश्विन,तिथि – द्वितीया , पक्ष – शुक्ल, वार – सोमवार, नक्षत्र – चित्रा, सूर्योदय – 06:13,सूर्यास्त – 18:08, राहुकाल – 07:42:43 से 09:12:11 तक, चौघड़िया अमृत – 06:17 से 07:45, शुभ – 09:14 से 10:42,चर – 13:39 से 15:08,लाभ – 15:08 से 16:36, अमृत – 16:36 से 18:05। आज नवरात्रि का दूसरा दिन है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का दिन हैं।

  माह – आश्विन, तिथि – एकादशी, पक्ष – कृष्ण, वार – बुधवार, नक्षत्र – पुष्य, सूर्योदय – 06:10, सूर्यास्त – 18:14, चौघड़िया लाभ – 06:14 से 07:44,अमृत – 07:44 से 09:14, शुभ – 10:43 से 12:13, चर – 15:12 से 16:41। एकादशी का श्राद्ध करने का उत्तम दिन है।