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हिंदू धर्म में लाल धागे को हाथ में बांधने वाले कलावे के रूप में देखा जाता है। मान्यता के अनुसार, हाथ में बंधा हुआ कलावा (रक्षा, मौली) हमेशा रक्षा करता है और बुरे संकटों से बचाता है। लेकिन इसके अलावा आर्थिक समस्याओं से लेकर धन हानि, मान सम्मान और प्रतिष्ठा बनाए रखने में लाल धागे का उपाय विशेष रूप से कारगर है।

आज घर में मेहमानों का आना जाना लगा रहेगा। इससे थोड़ी परेशानी होगी। बिजनेस के काम से बाहर जा सकते हैं। किसी नई नौकरी का अच्छे पैकेज पर ऑफर मिल सकता है।

माह – मार्गशीर्ष, तिथि – अष्टमी , पक्ष – कृष्ण, वार – बुधवार, नक्षत्र – मघा ,सूर्योदय – 06:47, सूर्यास्त – 17:25, राहुकाल – 12:06:34 से 13:26:23 तक।

गुरु और भगवान विष्णु गुरुवार का दिन समर्पित है। यह दिन कई प्रकार से व्यक्ति के जीवन की परेशानियां दूर करने में मददगार है। यह दिन लक्ष्मी प्राप्ति के लिए भी मददगार  है। जो लोग इस दिन का व्रत करते हैं। उनके सभी कार्य भगवान बृहस्पति की कृपा से पूर्ण होते हैं।

हिंदू धर्म में कार्तिक माह का बड़ा महत्व है। पूरे मास स्नान करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। भगवान विष्णु को ये मास बहुत प्रिय है। इस मास के आखिरी दिन कार्तिक पूर्णिमा का महत्व सारी तिथियों में अधिक है। 12 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा  है।इस दिन गंगा स्नान और दीपदान करना चाहिए।

माह –कार्तिक ,तिथि – चतुर्दशी , पक्ष – शुक्ल,वार – सोमवार,नक्षत्र – अश्विनी ,सूर्योदय – 06:40, सूर्यास्त – 17.29 ,चौघड़िया अमृत – 06:44 से 08:04,शुभ – 09:25 से 10:45,चर – 13:25 से 14:45,लाभ – 14:45 से 16:05

सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या पर फैसला देकर इस मामले को पूरी तरह शांत कर दिया है।  इससे राम मंदिर बनने का रास्ता साफ हो गया है। बहुत तथ्यों को साक्ष्य मानकर कोर्ट ने इस पर फैसला दिया है। जिसमें धार्मिक ग्रंथ भी आधार है चाहे वो देशी हो या विदेशी लेखकों के।

माह – कार्तिक, तिथि – पंचमी , पक्ष – शुक्ल, वार – शुक्रवार, नक्षत्र – मूल , सूर्योदय – 06:32, सूर्यास्त – 17:36, चौघड़िया चर – 06:37 से 07:59, लाभ – 07:59 से 09:21, अमृत – 09:21 से 10:42, शुभ – 12:04 से 13:26। आज छठ पर्व का दूसरा दिन पंचमी तिथि व खरना है।

हिन्दू धर्म में भाई-बहन के स्नेह-प्रतीक के रूप में दो त्योहार मनाये जाते हैं। पहला रक्षाबंधन जो कि सावन मास की पूर्णिमा को होता है।भाई दूज का त्योहार भाई और बहन के प्यार को सुदृढ़ करने का त्योहार है। यह त्योहार दीवाली से दो दिन बाद मनाया जाता है

नारद जी के वचन सुन योगीराज ने वैसा ही किया और उस व्रत के फलस्वरूप उनका शरीर पहले जैसा स्वस्थ एवं सुंदर हो गया। अत: तभी से इस चतुर्दशी को रूप चतुर्दशी के नाम से जाना जाने लगा।