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भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी  के तौर पर मनाया जाता हैं। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, इसलिए चारों ओर खुशियाँ मनाई जाती हैं। इस दिन देश के सभी कृष्ण मंदिरों में पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण किया जाता हैं। देश में मथुरा-वृंदावन के अलावा एक मंदिर ऐसा है जहां जन्माष्टमी के दिन आधी रात को भगवान कृष्ण दर्शन देते हैं।ये हैं द्वारिकाधीश मन्दिर ।

आसपास की ऊर्जा का हमारे काम और जीवन पर सीधा असर पड़ता है। अगर यह ऊर्जा सकारात्मक है तो हम सकारात्मक और खुश रहेंगे, लेकिन नकारात्मक ऊर्जा हमारे मन-मस्तिष्क पर ऐसा असर डालती है कि हम कुछ ऐसा कर बैठते हैं कि जिसका परिणाम भयावह होता है।

जयपुर: वार-सोमवार, माह-भाद्रपद,पक्ष-कृष्ण,तिथि- चतुर्थी, नक्षत्र-  उत्तराभाद्रपद 07:50 तक,करण-बव 02:23 सूर्य राशि-सिंह, चंद्र राशि-  मीन ,अभिजीत मुहूर्त -11:58 से 12:50 तक. राहुकाल-प्रातःकाल 07:30 बजे से 09 बजे तक

रुद्र संहिता में शिव-पार्वती के विवाह कथा का वर्णन है साथ ही उसमें यह भी बताया गयै है कि पतिव्रता पत्नी को वैवाहिक नियमों का पालन जीवनपर्यंत करना चाहिए । इन नियमों का पालन खुद माता पार्वती ने भी किया थाय़ उन्हें ये नियम एक पतिव्रता ब्राह्मण पत्नी ने विदाई के समय मां पार्वती को बताया था।

आपको बताना चाहते हैं कि इन बुरी आदतों का भी हमारे भाग्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यदि हम अपनी आदतों में कुछ बदलाव करें तो ना केवल घर आंगन में सकारात्मक  शक्तियों का प्रभाव बढ़ा सकते हैं, बल्कि नवग्रहों को भी शांत कर सकते हैं।

माह – श्रावण, तिथि – पंचमी – 15:55, पक्ष – शुक्ल, वार – सोमवार,नक्षत्र – हस्त ,सूर्योदय – 05:44, सूर्यास्त – 19:09, राहुकाल – 07:25 से 09:05 तक

माह – श्रावण, तिथि – तृतीया – 22:06:45 तक,पक्ष – शुक्ल, वार – शनिवार, नक्षत्र – मघा व पूर्वा फाल्गुनी – 28:05, सूर्योदय – 05:43,सूर्यास्त – 19:11 राहुकाल – 09:05से 10:46।

सत्व, रज व तमो गुणधारी सदाशिव की पूजा से मुक्ति के द्वार खुल जाते है। जिसमें पूरी सृष्टि समाहित है वो भगवान शिव का पूजन यदि पूरी श्रद्धा से किया जाए तो वे जल्द प्रसन्न होते हैं। शिव पूजन में छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर हम खुद का और अपने परिवार का कल्याण कर सकते है।शिव को पूष्प भेंट कर भी हम अपने मनोरथ पूर्ण कर सकते हैं।

माह – श्रावण, तिथि – अमावस्या पक्ष – कृष्ण, वार – गुरूवार, नक्षत्र – पुष्य ,योग – सिद्धि , सूर्योदय – 05:42, सूर्यास्त – 7.12

पहले लोग ईश्वर को पाने के लिए हजारों हजार साल तक तपस्या करते थे,  तब जाकर कही ईश्वर की प्राप्ति होते है। आज भी ईश्वर प्राप्ति का मार्ग सुगम नहीं है। धर्म ग्रंथों में ईष्टदेव को खुश करने के लिए कई उपाय बताए गए है। कभी पूजा तो कभी मंत्र जप से भगवान को खुश किया जाता है। मंत्रों के जाप से ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग आसान लगने लगता है।