जब ‘अटल’ के लिए मौजूदा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने तोड़ा था प्रोटोकॉल, जाने अनसुने किस्से…

Published by Shivani Awasthi Published: December 25, 2019 | 12:19 pm
Modified: December 25, 2019 | 12:34 pm
Atal Bihari vajpayee

Atal Bihari vajpayee

अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) का नाम भारतीय राजनीति में बड़े ही सम्मान से लिया जाता है। भाजपा ही नहीं अन्य दलों के नेता भी अटल जी खूबियों की चर्चा बेबाक होकर करते हैं। उनके लिए अगर लोगों के सम्मान के किस्सों पर बात करें तो कई ऐसी कहानियाँ हैं। लेकिन सबसे ख़ास में से एक है, जब देश के सबसे सर्वोच्च पद पर आसीन राष्ट्रपति तक ने अटल जी के लिए प्रोटोकॉल तोड़ दिया था।

प्रणब का अटल सम्मान:

बात 27 मार्च 2015 की है। दिल्ली के कृष्णा मेनन मार्ग पर गाड़ियों का जमावड़ा लगा हुआ था। आमतौर पर शांत रहने वाला इलाका, सुरक्षाकर्मियों और भीषण ट्रैफिक जाम से चकाचक था। इस दौरान खुद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रोटोकॉल तोड़ दिया था, वजह थे ‘अजेय अटल’

‘ भारतरत्न’ दिए जाने के फैसले का हर किसी ने किया था सम्मान:

इस बीच तेज साइरन की आवाजों से पूरी सड़क शोरमय हो गयी, पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने काफिले के साथ पहुंच गये। मौका था, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को देश के सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने का था। जब पीएम मोदी की नेतृत्व वाली सरकार ने ही अटल जी को भारतरत्न देने का फैसला किया, तो पक्ष व विपक्ष का शायद ही कोई ऐसा नेता हो जिसने इस फैसले की सराहना न की हो। हर एक ने कहा कि इस सम्मान के लिए अटल जी सबसे योग्य व्यक्ति हैं।

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पीएम पद पर होने के बाद भी प्रणब से किया था साथी के लिए अनुरोध:

खुद प्रणब मुखर्जी ने उनके और अटल जी के बीच का एक किस्सा सुनाया। ये उन दिनो की बात है, जब अटल प्रधानमंत्री थे और वो विपक्ष में थे। तब प्रणब को रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस के खिलाफ बोलना था। अटल जी को ये बात मालूम थी सो वो खुद प्रणब के पास पहुंचे और बोले- प्रणब आज जॉर्ज पर ज्यादा सख्त न होना, उनकी तबीयत ठीक नहीं है। वो और बीमार हो जाएंगे।

इस पर प्रणब चौक गये, उन्होंने अटल जी से कहा, पीएम साहब, आप ये बात किसी और को भेजकर भी मुझ तक पहुंचा सकते थे या मैं ही आपके पास आ जाता। अटल जी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, अरे ये छोटी सी बात है। हम सब साथी ही तो हैं, इसमें क्या बड़ी बात है। मुखर्जी को अटल जी का अपने साथी के प्रति चिंता करना, बहुत अच्छा लगा और उन्होंने अटल जी की बात का मान रखते हुए जॉर्ज पर हमला नहीं किया।

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