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अग्निकांड: शवों की शिनाख्त के लिए आंसू पोछते 'दिल्ली' पहुंचे परिजन, भूखे-प्यासे रहे

उत्तरी दिल्ली के अनाज मंडी क्षेत्र में सोमवार सुबह फिर उसी इमारत में आग लग गई जहां एक दिन पहले आग लगने की घटना में 43 लोगों की मौत हो गई थी। सोमवार सुबह भी बिल्डिंग से धुआं निकल रहा था, जिसपर 20 मिनट के अंदर काबू पा लिया गया।

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 9 Dec 2019 11:31 AM GMT

अग्निकांड: शवों की शिनाख्त के लिए आंसू पोछते दिल्ली पहुंचे परिजन, भूखे-प्यासे रहे
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नई दिल्ली: उत्तरी दिल्ली के अनाज मंडी क्षेत्र में सोमवार सुबह फिर उसी इमारत में आग लग गई। जहां एक दिन पहले आग लगने की घटना में 43 लोगों की मौत हो गई थी। सोमवार सुबह भी बिल्डिंग से धुआं निकल रहा था, जिसपर 20 मिनट के अंदर काबू पा लिया गया।

उधर अनाज मंडी हादसे में मरने वालों के परिजनों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक तरफ जहां रविवार को तमाम पार्टियों और सरकार की ओर से उन्हें लाखों के मुआवजे देने की घोषणा की गई, वहीं इस वक्त उनकी बदहाली में मदद करने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है।

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मृतकों के परिजनों का फूट पड़ा गुस्सा

अनाज मंडी के जिस इलाके में रविवार को आग लगी थी, वहां सोमवार दोपहर घायलों और मृतकों के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों ने लापरवाही के कारण घटे इतने बड़े हादसे के विरोध में आज घटनास्थल पर ही प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि वे बिहार से लम्बी यात्रा कर दिल्ली आये है।

दिल्ली के लोकनायक अस्पताल में अपनों के शवों की शिनाख्त करने के लिए आए परिजन रविवार रातभर ठंड में तड़पते रहे, ताकी सुबह प्रक्रिया शुरू हो तो वह अपनों को पहचान सकें।

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भूखे-प्यासे अस्पताल में रहे किसी ने नहीं ली सुध

इस दौरान उन्हें सरकार की ओर से किसी भी तरह की सहायता नहीं मिली। उनके लिए किसी तरह के इंतजाम नहीं किए गए थे। दरअसल कल शाम तक जिन शवों की पहचान नहीं हो पाई थी, उनके शिनाख्त के लिए पुलिस ने परिजनों को सुबह सात बजे आने को कहा था। दुख और परेशानियों से जूझ रहे परिजन घर जाने के बजाए भूखे-प्यासे अस्पताल में ही पड़े रहे।

ऐसे में पुलिस की ओर से भी उन्हें कोई मदद नहीं मिली। अभी तक जो जानकारी निकलकर सामने आई है। उसके मुताबिक़ कल देर शाम तक 29 शवों की पहचान ही हो हो पाई है। बाकि की पहचान होना बाकी है।

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