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पीएफ के लिए अब नहीं लगाने होगे ऑफिस के चक्कर, 1 अप्रैल से बदल सकता है नियम

ईपीएफओ के ऐसा करने से नौकरीपेशा लोगों को अगले वित्त वर्ष से नौकरी बदलने पर पीएफ अमाउंट ट्रांसफर करने का अनुरोध करने की जरूरत नहीं होगी। यह प्रक्रिया खुद-ब-खुद हो जाएगी।

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 16 March 2019 6:18 AM GMT

पीएफ के लिए अब नहीं लगाने होगे ऑफिस के चक्कर, 1 अप्रैल से बदल सकता है नियम
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फ़ाइल फोटो
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नई दिल्ली: नौकरी करने वालों के लिए एक अच्छी खबर है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) नए वित्त वर्ष यानी एक अप्रैल से ईपीएफ को लेकर बड़ा बदलाव लागू करने जा रहा है। इस नए नियम के लागू होने के साथ ही नौकरी/ संस्थान बदलने पर आपका पीएफ अपने आप ट्रांसफर हो जाएगा। इसके लिए आपको अब परेशान नहीं होने पड़ेगा। इस प्रक्रिया को ऑटोमैटिक बनाने पर काम चल रहा है। भारत सरकार का श्रम मंत्रालय एक अप्रैल इस नियम को लागू कर सकता है।

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अगले वित्त वर्ष से दूर हो जायेंगी पीएफ अमाउंट ट्रांसफर की दिक्कतें

ईपीएफओ के ऐसा करने से नौकरीपेशा लोगों को अगले वित्त वर्ष से नौकरी बदलने पर पीएफ अमाउंट ट्रांसफर करने का अनुरोध करने की जरूरत नहीं होगी। यह प्रक्रिया खुद-ब-खुद हो जाएगी। बता दें कि ईपीएफओ के सदस्यों को यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) रखने के बाद भी पीएफ अमाउंट के ट्रांसफर के लिए अलग से अनुरोध करना पड़ता है।

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ये है वजह

ईपीएफओ को हर साल ईपीएफ ट्रांसफर करने के करीब आठ लाख आवेदन मिलते हैं। श्रम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘इपीएफओ प्रायोगिक आधार पर नौकरी बदलने पर पीएफ अमाउंट के ऑटोमेटिक ट्रांसफर के लिए पर काम कर रहा है। सभी सदस्यों के लिए इस सुविधा को अगले साल किसी भी समय शुरू की जा सकती है।

अधिकारी ने कहा, ‘ईपीएफओ ने पेपरलेस संगठन बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपनी प्रक्रिया की स्टडी का काम सी-डैक को दिया है। अभी 80 प्रतिशत कार्य ऑनलाइन हो रहे हैं। लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में नौकरी बदलने पर ईपीएफ का स्वत: हस्तांतरण महत्वपूर्ण है।’

अधिकारी ने कहा कि जैसे ही नए नियोक्ता मासिक ईपीएफ रिटर्न दायर करेंगे। जिसमें नये कर्मचारी का यूएएन भी शामिल होगा, वैसे ही पहले के ईपीएफ योगदान और उसपर मिले ब्याज का स्वत: हस्तांतरण हो जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘नौकरी बदलने पर ईपीएफ का स्वत: हस्तांतरण होने पर सदस्यों को काफी लाभ होगा। क्योंकि यूएएन एक बैंक खाते की तरह हो जाएगा। इससे कोई अंत नहीं पड़ेगा कि सदस्य जगह या नियोक्ता बदलता है, ईपीएफ में वह अपना योगदान यूएएन के जरिये हासिल कर सकेंगे. यह कर्मचारियों के पूरे जीवन के दौरान लागू रहेगा।’

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