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अखिलेश ने दी PM मोदी व शाह को 'राजधर्म' का स्मरण करने की सलाह

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को डराने और धमकाने की भाषा छोड़कर संविधान के अनुकूल आचरण और राजधर्म का स्मरण करने की सलाह दी है।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 29 Jan 2020 4:18 PM GMT

अखिलेश ने दी PM मोदी व शाह को राजधर्म का स्मरण करने की सलाह
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लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को डराने और धमकाने की भाषा छोड़कर संविधान के अनुकूल आचरण और राजधर्म का स्मरण करने की सलाह दी है। सपा अध्यक्ष ने कहा है कि दोबारा लोकसभा चुनाव में जीत और केन्द्र में भाजपा सरकार बनने के बाद भाजपा नेतृत्व में जो अहंकार दिखाई दे रहा है उससे देश में जहां संघीय व्यवस्था को आघात पहुंच रहा है वहीं विदेशों तक में भारत की छवि धूमिल हो रही है।

सपा मुखिया ने बुधवार को कहा कि भाजपा की कुनीतियों के चलते आज सीएए पर दुनिया के सामने भारत को सफाई देनी पड़ रही है। कोई इसे भारत का आंतरिक मामला मानने को तैयार नहीं है। यूरोपीय संघ की संसद में नागरिकता कानून को लेकर विरोध प्रस्ताव पास किए गए हैं। यूरोपीय संघ की संसद में 751 सदस्य है जिनमें 560 सांसद इस कानून के विरोध में है।

उन्होंने भारत में विपक्ष पर पुलिस के बल प्रयोग की जांच किए जाने की भी मांग की है। अमेरिका के कुछ सांसदों ने भी विरोध में अपनी आवाज दर्ज कराई है। भारत के लोकतांत्रिक और धर्म निरपेक्ष स्वरूप पर उंगली उठाई जा रही है।

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अखिलेश ने कहा कि भाजपा संविधान की प्रस्तावना के मूलभूत विचारों से अलग अपनी खिचड़ी पकाने में लग गई है जिसके नतीजे में देश की एकता और सौहार्द को खतरा पैदा हो गया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सबसे मुखर विरोध किया है। केरल, पंजाब, असम, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र आदि कई राज्यों ने भी सीएए लागू करने से इंकार किया है। केन्द्र राज्य के बीच यह संघर्ष संघीय व्यवस्था को चोट पहुंचाने वाला है। लोकतंत्र के लिए यह खतरे की घंटी है। संविधान निर्माता डा. भीमराव अम्बेडकर ने सत्ता के दुरूपयोग की जो चेतावनी दी थी वह भाजपा के सम्बंध में सटीक और सार्थक बैठती है।

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उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस दोनों की धर्म की राजनीति ने देश में सामाजिक सद्भाव को बहुत क्षति पहुंचाई है और समाज को बांटने का काम किया है। भाजपा की केन्द्र सरकार ने सीएए के बाद एनपीआर और एनआरसी कानून लाने का इरादा घोषित कर रखा है। सीएए और एनआरसी को जोड़कर एक ऐसी यंत्रणा बनाई जा रही है जो संविधान के अनुच्छेद-14 में दिए गए अधिकार का हनन करती है। इसके विरूद्ध देश-विदेश में भारतीयों के बीच गहरा आक्रोश है। गोद में बच्चे लिए महिलाएं तक इसके विरोध में देश के विभिन्न भागों में ठण्ड में ठिठुरती हुई धरना दे रही हैं। भाजपा इन महिलाओं को अपमानित कर रही है।

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