जिला पंचायत अध्यक्ष रेखा सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रद्द

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला पंचायत अध्यक्ष प्रयागराज रेखा सिंह के खिलाफ 25 अक्टूबर 18 को पारित अविश्वास प्रस्ताव को विधि विरुद्ध करार देते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि धारा 128 के अन्तर्गत मतदान की गोपनीयता कायम न रखने के कारण अविश्वास प्रस्ताव पारित करने की प्रक्रिया गैर कानूनी है।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला पंचायत अध्यक्ष प्रयागराज रेखा सिंह के खिलाफ 25 अक्टूबर 18 को पारित अविश्वास प्रस्ताव को विधि विरुद्ध करार देते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि धारा 128 के अन्तर्गत मतदान की गोपनीयता कायम न रखने के कारण अविश्वास प्रस्ताव पारित करने की प्रक्रिया गैर कानूनी है।

कोर्ट ने अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद केशरी देवी को जिला पंचायत अध्यक्ष का कार्यभार सौंपने के आदेश को भी रद्द कर दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति पीके एस बघेल तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खण्डपीठ ने रेखा सिंह की दोनों याचिकाओं को स्वीकार करते हुए दिया है।

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याचिक पर वरिष्ठ अधिवक्ता एमडी सिंह शेखर, वरिष्ठ अधिवक्ता टीपीसिंह व स्वाति अग्रवाल तथा विपक्षी की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता शशिनंदन व वरिष्ठ अधिवक्ता रविकांत एवं प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल व एके गोयल ने बहस की। दोनों पक्षों को बहस के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया था।

मालूम हो कि 2016 में हुए पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में केशरी देवी को परास्त कर रेखा सिंह विजयी घोषित हुई। 2018 में केशरी देवी की तरफ से रेखा सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। जिला पंचायत के 92 सदस्यों में से 64 सदस्यों ने एक अक्टूबर 18 को अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया।

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जिलाधिकारी ने 3 अक्टूबर के आदेश से 25 अक्टूबर 18 को मतदान तय किया। अपर जिला जज चुनाव का पीठासीन अधिकारी बनाया गया। याची सहित 51ने मतदान में हिस्सा लिया। 48 वोट अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में पड़े। अविश्वास प्रस्ताव के मतदान के समय वोट दिखाये जाने को गुप्त मतदान के नियम के विपरीत करार देते हुए चुनौती दी गयी। इसी बीच केशरी देवी को अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया। इसे भी चुनौती दी गयी।

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कोर्ट ने अविश्वास प्रस्ताव की कार्यवाही की वीडियो रिकार्डिंग की सीडी तलब कर देखा। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के तमाम फैसलों पर विचार करते हुए कहा कि मतदान की गोपनीयता नहीं रखी गयी। जिसके कारण अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया दूषित होने के कारण विधिविरुद्ध है।