बिना पंजीकरण अस्पताल में कराता रहा इलाज, जांच में निकला कोरोना पाज़िटिव

मामला बरियावान गाँव का है। यहा रहने वाला एक परिवार लगभग सप्ताह भर पूर्व मुम्बई से आया था। मुम्बई से आने के बाद परिवार के एक सदस्य को कुछ परेशानी बढ़ी तो उसके परिजनों से उसे डॉ आशुतोष शुक्ल को दिखाया।

Published by SK Gautam Published: May 25, 2020 | 1:54 pm
Modified: May 25, 2020 | 3:06 pm

अंबेडकरनगर: एक तरफ जंहा जिले में कोरोना संक्रमितो का मिलना लगातार जारी है वंही एक कोरोना संक्रमित ने जिला प्रशासन के साथ ही स्वास्थ्य विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मामला सामने आने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मस्ती में हैं। जानकारी के 18 घण्टे से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद स्वास्थ विभाग के किसी भी कर्मचारी ने पीड़ित के परिजनों से संपर्क नहीं साधा है।

जिला मुख्यालय पर भर्ती होकर इलाज कराता रहा पीड़ित

इससे जहां गांव में दहशत का माहौल है वहीं पीड़ित परिजन भी अनहोनी की आशंका से ग्रस्त है। कोरोना संक्रमित व्यक्ति की जद में जिला मुख्यालय के दो निजी अस्पताल भी आये हैं जिसमे अब तक कई लोगो ने इलाज कराया है। इसमें से एक अस्पताल तो जिला अस्पताल के एक चिकित्सक के रहमोकरम पर चल रहा है जंहा संक्रमित व्यक्ति का डायलसिस भी किया गया था। सूत्रों के अनुसार इन अस्पताल में डायलिसिस किये जाने का कोई लाइसेंस नही है लेकिन पैसे की चाह में यह लोग कोरोना संक्रमण के दौर में भी अपना उल्लू सीधा करने में पीछे नही हट रहे हैं।

मुम्बई से बरियावन आया था पीड़ित

मामला बरियावान गाँव का है। यहा रहने वाला एक परिवार लगभग सप्ताह भर पूर्व मुम्बई से आया था। मुम्बई से आने के बाद परिवार के एक सदस्य को कुछ परेशानी बढ़ी तो उसके परिजनों से उसे डॉ आशुतोष शुक्ल को दिखाया। जाँच में किडनी की समस्या सामने आने पर उसे वँहा भर्ती भी किया गया और शास्त्रीनगर में स्थित शिवा हॉस्पिटल में उसका एक बार डायलिसिस भी किया गया।

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जानकारी के बाद भी घण्टो मौन रहा स्वास्थ्य महकमा

बताया जाता है कि जिस अस्पताल में डायलिसिस किया गया उसका संचालन भी स्वास्थ्य महकमे की ही कृपा से हो रहा है। पिडित के परिजनों के अनुसार जब स्वास्थ्य में सुधार नही हुआ तो वे उन्हें लेकर लखनऊ अपोलो चले गए लेकिन वँहा भर्ती करने के बजाय उन्हें चरक हॉस्पिटल भेज दिया गया जंहा पीडित का पुनः डायलिसिस किया गया।

बिना पंजीकरण के अस्पताल में किया गया डायलिसिस

इसके बाद उसका सैम्पल जाँच के लिए भेजा गया।जाँच में उसके कोरोना धनात्मक होने की पुष्टि हुई। इसके बाद सीएमओ लखनऊ ने पीड़ित को निजी हॉस्पिटल से निकालकर पीजीआई में भर्ती करा दिया है। इन सबके बाद जिले के सीएमओ को भी जानकारी भेज दी गयी लेकिन रविवार को अपरान्ह से जानकारी होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी चुप्पी मारकर बैठे रहे।यंहा तक की डीएम को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में भी उसका जिक्र नही किया गया। ऐसा क्यों किया गया, इसका जबाब किसी के पास नही है।

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जाँच में कोरोना पाज़िटिव मिलने के बाद मचा हड़कम्प

पीड़ित के पुत्र ने बताया कि रात में एक बार किसी का फोन आया था लेकिन उसके बाद किसी ने कोई सम्पर्क नही किया है। उन सबकी भी जांच होनी चाहिए। इस संबंध में सीएमओ डॉ अशोक कुमार का कहना है कि मामला संज्ञान में है ।पूरे मामले की छानबीन की जा रही है। यह पूछे जाने पर कि परिवार के सदस्यों से सम्पर्क क्यों नही किया जा रहा है,उन्होंने कहा कि प्र्रयास किया जा रहा है। जाहिर है कोरोना संक्रमण के दौर में भी स्वास्थ्य महकमा पूरी लापरवाही बरत रहा है

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