बलिया हत्याकांड के मुख्य आरोपी की 03 दिन की पुलिस रिमांड मंजूर

बता दे कि बलिया कांड के मुख्य आरोपी धीरेंद्र सिंह को राजधानी लखनऊ के पालीटेक्निक चैराहे के पास से बीते रविवार को गिरफ्तार करने के बाद एसटीएफ उसे लेकर सड़क मार्ग से भारी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच बलिया कोतवाली पहुंची थी।

Published by Roshni Khan Published: October 21, 2020 | 4:50 pm
Modified: October 21, 2020 | 5:30 pm
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बलिया हत्याकांड के मुख्य आरोपी की 03 दिन की पुलिस रिमांड मंजूर (Photo by social media)

लखनऊ: बलिया पुलिस को दुर्जनपुर हत्याकांड के मुख्य आरोपित धीरेंद्र सिंह की तीन दिन की रिमांड मिली है। खबर है कि पुलिस ने न्यायालय से एक हफ्ते की रिमांड की मांग की थी लेकिन न्यायालय ने केवल 03 दिन की ही रिमांड दी है, जो 22 अक्टूबर की सुबह से 24 अक्टूबर तक रहेगी।

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इससे पहले सोमवार को बलिया के जिला न्यायालय के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्टेªट द्वारा 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने के बाद आज बलिया पुलिस ने धीरेंद्र की रिमांड के लिए जिला न्यायालय में अर्जी दी थी।

एसटीएफ उसे लेकर सड़क मार्ग से भारी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच बलिया कोतवाली पहुंची

बता दे कि बलिया कांड के मुख्य आरोपी धीरेंद्र सिंह को राजधानी लखनऊ के पालीटेक्निक चैराहे के पास से बीते रविवार को गिरफ्तार करने के बाद एसटीएफ उसे लेकर सड़क मार्ग से भारी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच बलिया कोतवाली पहुंची थी। एसटीएफ ने धीरेंद्र सिंह को बलिया कोतवाली में मौजूद डीआईजी सुभाष चंद दुबे व एसपी देवेंद्र नाथ के सुपर्द किया, जहां उसका मेडिकल कराया गया, जिसके बाद उसे हवालात में बंद कर दिया गया।

इस दौरान धीरेंद्र सिंह की निगरानी के लिए भारी पुलिस फोर्स तैनात की गई, जिसमे 11 इंस्पेक्टर, 60 दीवान, दो सौ सिपाही व 40 महिला कांस्टेबलों की ड्यूटी लगाई गई। इसके अलावा दुर्जनपुर गांव में हुए इस हत्याकांड के दो और आरोपितों को रविवार देर शाम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

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इस मामले के मुख्य आरोपित धीरेंद्र प्रताप सिंह को एसटीएफ ने सुबह लखनऊ में गिरफ्तार किया था। दोपहर में बलिया पुलिस ने नामजद दो अन्य आरोपितों संतोष यादव व अमरजीत यादव को कोतवाली के वैशाली क्षेत्र से पकड़ा था। देर शाम अज्ञात आरोपितों में उपेंद्र चैधरी व संदीप वर्मा को दुर्जनपुर से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने घटना के दौरान घायल होकर अस्पताल में भर्ती धर्मेन्द्र सिंह व अजय सिंह को भी आरोपित बनाते हुए जिला अस्पताल में ही हिरासत में ले लिया।

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दुर्जनपुर हत्याकांड के मुख्य आरोपी धीरेंद्र प्रताप सिंह डब्लू की पुलिस कस्टडी रिमांड कोर्ट ने स्वीकार कर ली। कोर्ट ने 48 घंटे की रिमांड स्वीकार करते हुए अभियुक्त को अधिवक्ता साथ रखने की छूट दी है जो पुलिस कार्रवाई में कोई हस्तक्षेप किए बिना दूर से कार्रवाई को देख सकता है।

विवेचक/ थानाध्यक्ष रेवती प्रवीण कुमार सिंह की ओर से

विवेचक/ थानाध्यक्ष रेवती प्रवीण कुमार सिंह की ओर से अभियोजन अधिकारी अधिवक्ता ओंकार त्रिपाठी व शिवबचन राम ने कोर्ट सीजेएम रमेश कुशवाहा की कोर्ट में सात दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड की अर्जी पेश करते हुए कहा कि 15 अक्तूबर को दुर्जनपुर गांव में जयप्रकाश पाल की हत्या के बाद अभियुक्त शस्त्र समेत फरार था। इसे पालिटेक्निक चौराहा थाना गाजीपुर लखनऊ से एसटीएफ ने 18 अक्तूबर को गिरफ्तार किया और 19 अक्तूबर को न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार बलिया भेज दिया गया।

अधिवक्त द्वय ने कहा

अधिवक्त द्वय ने कहा कि विवेचना के लिए असलहा बरामदगी, साक्ष्य संकलन व अपराध के बाद फरार होने के दौरान किसके द्वारा सहयोग किया गया, छिपाया गया के संबंध में पूछताछ ले जाकर किया जाना आवश्यक है। अभियुक्त ने असलहा कहां छिपाया है और चलकर बरामद करा सकता है ऐसी स्वीकारोक्ति की है।

बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता भुवाल सिंह ने मौखिक आपत्ति

बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता भुवाल सिंह ने मौखिक आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि अभियुक्त ने किसी वस्तु को बरामद कराए जाने की बात नहीं कही है। विवेचक द्वारा मनमाने ढंग से इसे अंकित किया गया है। पुलिस कस्टडी रिमांड इसलिए मांगी जा रही है कि अभियुक्त को अनावश्यक रूप से केस में फंसाया जा सके। सीजेएम रमेश कुशवाहा ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला देते हुए कहा कि अभियुक्त को पुलिस कस्टडी रिमांड पर देने के लिए विवेचक का प्रार्थना पत्र स्वीकार करने योग्य है।

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22 अक्तूबर को सुबह दस बजे से 24 अक्तूबर सुबह दस बजे तक पुलिस कस्टडी रिमांड स्वीकार की जाती है

अतः अभियुक्त को 22 अक्तूबर को सुबह दस बजे से 24 अक्तूबर सुबह दस बजे तक पुलिस कस्टडी रिमांड इस शर्त के साथ स्वीकार की जाती है कि अभियुक्त को पुलिस कस्टडी रिमांड प्राप्त करने के पूर्व व न्यायिक अभिरक्षा में दाखिल करने से पूर्व चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाएगा। कस्टडी के दौरान अभियुक्त पर अमानवीय व्यवहार का प्रयोग नहीं किया जाएगा। अभियुक्त चाहे तो अपना अधिवक्ता रख सकता है जो दूर से कार्रवाई देखेगा पर कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा।

मनीष श्रीवास्तव

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