पैसे लेने के बाद भी लेखपाल ने नहीं दर्ज की वरासत, किसान को DM से मिला न्याय

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में एक लेखपाल ने किसान से पैसे लेने के बाद भी वरासत उसके नाम नहीं करने का मामला है। जिले के खम्हरिया शुक्ल गांव निवासी किसान के पिता की मौत के दो माह बाद भी लेखपाल ने वरासत नहीं दर्ज की। किसान से लेखपाल ने कागजात के साथ पैसे भी लिये थे।

बहराइच: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में एक लेखपाल ने किसान से पैसे लेने के बाद भी वरासत उसके नाम नहीं करने का मामला है। जिले के खम्हरिया शुक्ल गांव निवासी किसान के पिता की मौत के दो माह बाद भी लेखपाल ने वरासत नहीं दर्ज की। किसान से लेखपाल ने कागजात के साथ पैसे भी लिये थे।

यह पूरा मामला डीएम के सामने आया जिसके बाद उन्होंने एसडीएम महसी और कानूनगो को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा है। लेखपाल के खिलाफ तहसीलदार महसी को जांच सौंपी गई है। डीएम ने संशोधित खतौनी शनिवार को किसान को सौंपी।

महसी तहसील क्षेत्र के ग्राम खम्हरिया शुक्ल निवासी तिलकराम के पिता रामहेत का निधन 28 दिसंबर को हो गया था। पिता की मौत के बाद तिलकराम ने वरासत कराने के लिए सभी भाईयों व मां का आधार कार्ड, पुरानी खतौनी और सरकारी खर्चे के नाम पर कुछ रुपये दिए थे। इस बीच 30 जनवरी को उसके भाई संतोष कुमार उर्प पकुला की भी मौत हो गई। इसकी सूचना लेखपाल लल्लूराम को देने के बाद भी वरासत दर्ज नहीं की गई।

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पीड़ित किसान ने जिलाधिकारी शंभु कुमार से मामले की शिकायत की। डीएम के संज्ञान में आने पर उन्होंने तत्काल वरासत दर्ज करने के आदेश दिए। वरासत दर्ज होने के बाद शनिवार को तिकलराम को बुलाकर उसे संशोधित खतौनी की प्रति डीएम ने अपने हाथों से सौंपी। डीएम ने इसे गंभीर मामला मानते हुए सख्ती दिखाई है।

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डीएम ने एसडीएम सुरेंद्र नारायण त्रिपाठी को अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर नियंत्रण नहीं करने का जिम्मेदार मानते हुए उनको नोटिस दी है। राजस्व निरीक्षक रामचंदर गुप्ता को भी नोटिस दी गई है। लेखपाल के खिलाफ तहसीलदार को जांच सौंपी गई है। डीएम की बड़ी कार्रवाई से जिले के कर्मचारियों व अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।

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जिलाधिकारी ने उप जिलाधिकारी महसी को यह भी निर्देश दिया है कि तहसील अन्तर्गत अभियान चलाकर वरासत से सम्बन्धित प्रकरणों को समय से निस्तारण करायें। किसी भी आवेदन-कर्ता को अनावश्यक रूप से दौड़ाया न जाए। कुमार ने यह भी निर्देश दिया कि शिकायतकर्ता तिलकराम को पारिवारिक लाभ योजना व मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना से नियमानुसार आच्छादित भी किया जाए।