गन्ना सोसायटी में घोटाले की जांच पर जवाब तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गन्ना सोसाइटी में 87 लाख रुपये के घोटाले में आरोपी दिवंगत कर्मचारी के खिलाफ जांच करने पर जवाब तलब किया है। साथ ही कर्मचारी के बेटे व पत्नी के खिलाफ जारी डिमांड नोटिस पर यथास्थिति कायम रखने के आदेश दिया है।

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गन्ना सोसाइटी में 87 लाख रुपये के घोटाले में आरोपी दिवंगत कर्मचारी के खिलाफ जांच करने पर जवाब तलब किया है। साथ ही कर्मचारी के बेटे व पत्नी के खिलाफ जारी डिमांड नोटिस पर यथास्थिति कायम रखने के आदेश दिया है। कोर्ट ने इस मामले में पूर्व में जारी कारण बताओ नोटिस, चार्जशीट और जांच रिपोर्ट पर रोक लगा दी थी।

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यह आदेश न्यायमूर्ति आरएसआर मौर्य ने दिवंगत कर्मचारी की पत्नी सुमनलता व बेटे वरुण की याचिकाओं पर दिया है। मामले के तथ्यों के अनुसार गन्ना विभाग मेरठ में कार्यरत केन सुपरवाइजर विनोद कुमार पर गन्ना सोसाइटी में 87 लाख रुपये गबन का आरोप है। 28 नवंबर 2018 को विनोद की मृत्यु के बाद सोसाइटी ने गबन की जांच शुरू की और विनोद के दूसरे बेटे तरुण को कारण बताओ नोटिस जारी किया।

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27 मार्च 2019 को जांच रिपोर्ट आ गई और 20 अप्रैल 2019 को चार्जशीट दाखिल कर दी गई। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। कहा गया कि कर्मचारी की मौत के बाद जांच की गई और इसके बाद कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। गन्ना समिति के अधिवक्ता रवींद्र सिंह ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि बताओ नोटिस जारी करने का उद्देश्य सोसाइटी को हुए नुकसान का निर्धारण करना है।

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कोर्ट ने कारण बताओ नोटिस और चार्जशीट पर रोक लगाते हुए सोसाइटी से जवाब मांगा है। इस बीच गन्ना सोसाइटी ने 31 मार्च 2019 को विनोद की पत्नी सुमनलता को डिमांड नोटिस जारी कर दिया। इसे याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई। गन्ना समिति के अधिवक्ता रवींद्र सिंह का कहना था कि यदि याची को पेंशन, ग्रेच्युटी और फंड आदि निकालने की छूट दी जाएगी तो समिति नुकसान की भरपाई नहीं कर पाएगी। कोर्ट ने डिमांड नोटिस पर यथास्थिति का आदेश देते हुए सुमनलता को पेंशन आहरण की छूट दी है।