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केंद्र व राज्य सरकारों की लापरवाही का नतीजा है महाराष्ट्र की रेल दुर्घटना: मायावती

मायावती ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि एक तरफ तो सरकारें भूखे व लाचार लाखों प्रवासी मजदूरों से घोर अमानवीय व्यवहार करते हुए उनसे क्रूरता के साथ किराया भाड़ा तक वसूल रही है तो दूसरी तरफ अमीरों के लिए दयावान बनी हुई है।

Vidushi Mishra

Vidushi MishraBy Vidushi Mishra

Published on 8 May 2020 1:03 PM GMT

केंद्र व राज्य सरकारों की लापरवाही का नतीजा है महाराष्ट्र की रेल दुर्घटना: मायावती
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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने महाराष्ट्र केऔरंगाबाद के पास मालगााड़ी द्वारा रौंदे जाने से घरों को पैदल लौटने वाले लाचार व मजबूर 19 प्रवासी मजदूरों की मौत पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने इस दुर्घटना के लिए केन्द्र व राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह केंद्र व राज्य सरकारों की लापरवाही व असंवेदनशीलता का ही परिणाम नहीं तो और क्या है?

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क्रूरता के साथ किराया भाड़ा तक वसूल रही

मायावती ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि एक तरफ तो सरकारें भूखे व लाचार लाखों प्रवासी मजदूरों से घोर अमानवीय व्यवहार करते हुए उनसे क्रूरता के साथ किराया भाड़ा तक वसूल रही है तो दूसरी तरफ अमीरों के लिए दयावान बनी हुई है।

मायावती ने कहा कि बड़े व ऊंचे घरों के बच्चों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए तो सरकार ने हर प्रकार की मुफ्त सुविधा आदि काफी हद तक उपलब्घ करा रही है लेकिन उन गरीबों व मजदूरों आदि के लिए हांथ पर हांथ धरे लगातार बैठी रही।

पलायन करने को मजबूर होना पड़ रहा

जिन्हें लाॅकडाउन के कारण नौकरी से निकाल दिया गया है तथा जो पैसे के अभाव में दूसरे राज्यों में बेसहारा भूखे तड़पने को मजबूर हैं। ऐसे में मजबूरीवश उन्हें पैदल, साइकिल व ठेला आदि पर हजारों किलोमीटर के अपने घर के सफर पर यूपी, बिहार, उड़ीसा व अन्य राज्यों से भी पलायन करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

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उन्हें रास्ते में भी कोई पूछने वाला भी नहीं है। यहां तक कि रास्ते में चलते-चलते लोग मर रहे हैं व महिलायें बच्चों को रास्ते में ही जन्म देने को भी मजबूर हैं।

ऐसे ही 19 पलायनकारी प्रवासी मजदूरों की आज रेल दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई और सरकारों ने दुख जताकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली।

दर्दनाक घटनाओं को पूरी गंभीरता से लें

उन्होंने कहा कि केन्द व राज्य सरकारें इस प्रकार की दर्दनाक घटनाओं को पूरी गंभीरता से लें। पीड़ित परिवारों की पूरी आर्थिक मदद करें तथा लाॅकडाउन के कारण बदहाल प्रवासी मजदूरों को रेल, बस व हवाई किराया की मुफ्त व्यवस्था करके उन्हें उनके घरों तक सुरक्षित पहुंचाये।

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देश की सरकारें आखिर किस दिन गरीब-लाचार जनता के काम आएगी? बसपा सुप्रीमों ने कहा कि यह सरकार की गरीब व मजदूर-विरोधी व धन्नासेठ-समर्थक आचरण नहीं तो और क्या है, बसपा इसकी घोर निन्दा करती है।

त्रास्दी देश को नहीं झेलनी पड़ती

उन्होंने कहा कि बसपा लाॅकडाउन के मुद्दे पर केन्द्र सरकार के साथ है, लेकिन नोटबंदी की तरह ही बिना किसी तैयारी के अचानक लाकडाउन की घोषणा करने के बजाए देश-विदेश में रहने वाले लोगों को योजनाबद्ध तरीके से सप्ताह भर का समय दे दिया जाता तो देश को मौजूदा अति-जटिल समस्याएं व मानवीय त्रास्दी देश को नहीं झेलनी पड़ती।

मायावती ने कहा कि अभी भी सरकार को इन मामलों में गंभीर होने की जरूरत है। वरना गरीबों की जाने ऐसे ही जाती रहेंगी और सरकारें केवल बयानबाजी करती रहेंगी।

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Vidushi Mishra

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Desk Editor

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