चीन की बर्बादी शुरू: 10 दिन बाद फैसला तय, तेजी से हो रही तैयारी

चीन पर कई देश ये भी आरोप लगा रहे हैं कि यदि चीन दुनिया को कोरोना वायरस के बारे में पहले ही सतर्क कर देता तो इसके प्रभाव को कम किया जा सकता था। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से भी सवाल पूछे गए हैं।

Published by Vidushi Mishra Published: May 8, 2020 | 5:39 pm

नई दिल्ली। वैश्विक महामारी के चलते 10 दिन बाद विश्व स्वास्थ्य सभा का सत्र शुरू होने वाला है। तो ऐसे में कोरोना वायरस को लेकर पारदर्शिता और जांच की आवाजें पहले से कई गुना ज्यादा तेज हो गई हैं। कोविड-19 की शुरुआत बीते साल दिसंबर में चीन के वुहान शहर से हुई थी। जिसने बीते 4 महीनों में लाखों जाने निगल लीं हैं।

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डब्ल्यूएचओ पर चीन का पक्ष लेने के आरोप

ऐसे में चीन पर कई देश ये भी आरोप लगा रहे हैं कि यदि चीन दुनिया को कोरोना वायरस के बारे में पहले ही सतर्क कर देता तो इसके प्रभाव को कम किया जा सकता था। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से भी सवाल पूछे गए हैं और इस मसले पर चीन का पक्ष लेने के आरोप लगे हैं।

साथ ही चीन और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के निदेशक टेड्रेस अधनोम ग्रेब्रेसियस की सबसे ज्यादा आलोचना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने की है।

बीते महीने अमेरिका ने  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) पर चीन का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए उसकी फंडिंग पर भी रोक लगा दी थी।

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जांच किए जाने की तरफदारी

लेकिन ऐसा नहीं है कि सिर्फ अमेरिका ही चीन और डब्ल्यूएचओ से नाराज है। बीते हफ्ते और उससे ज्यादा समय से यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लेयन उन बातों का सपोर्ट कर रहे हैं जिसमें वायरस की उत्पत्ति को लेकर जांच किए जाने की तरफदारी की जा रही है।

हालांकि इस हफ्ते यूरोपीय संघ ने घोषणा की कि वह विश्व स्वास्थ्य सभा में एक प्रस्ताव पेश करेगा जिससे डब्ल्यूएचओ के प्रदर्शन सहित कोरोना वायरस महामारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की समय पर समीक्षा की जा सके।

वहीं वाशिंगटन और जिनेवा के राजनयिकों ने भी सुझाव दिया है कि प्रस्ताव को बहुत सारे देशों के साथ विमर्श के बाद तैयार किया जाए जिससे इंटरनेशनल संस्था की सालाना बैठक में चीन पर दबाव बनाया जा सके।

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