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विकास के लिये दी जाने वाली विधायक निधि खर्च नहीं कर पाये माननीय

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Updated on: 13 March 2020 10:39 AM GMT
विकास के लिये दी जाने वाली विधायक निधि खर्च नहीं कर पाये माननीय
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सुशील कुमार

मेरठ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानमंडल के बजट सत्र के आखिरी दिन विधायक निधि को दो करोड़ से बढ़ाकर तीन करोड़ रुपये करने की घोषणा कर यह जताने की कोशिश की कि उनकी सरकार प्रदेश के विकास को लेकर कितनी गंभीर है। लेकिन सच्चाई ये है कि विकास के लिये दी जाने वाली विधायक निधि तक को माननीय खर्च नहीं कर पाये हैं।

थम गया है विकास का पहिया

मेरठ की बात करें तो हालत यह है जिले में विकास का पहिया थम सा गया है। जिले की सड़कें और गलियां बदहाल और खस्ताहाल हैं। कई इलाकों में तो गांव से से भी बदतर हालात हैं। ये स्थिति तब है जबकि मेरठ विकास प्राधिकरण, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग सहित जनप्रतिनिधि भी इसके सुधार में पीछे नहीं हट रहे। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि विधायक अपनी निधि का बड़ा हिस्सा सड़क और इंटरलॉकिंग पर ही खर्च कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2019-20 में विधायकों की निधि डेढ़ करोड़ सालाना से बढ़ाकर दो करोड़ की गई थी। इससे पहले डेढ़ करोड़ की निधि ही विधायकों को सालाना मिलती थी। विकास का दावा करने वाले जन प्रतिनिधि अपने क्षेत्रों को लेकर गंभीर है इसका खुलासा इस बात से होता है कि इनके द्वारा विकास कार्यों के लिए मिलने वाली निधि का इस्तेमाल तक पूरा नहीं किया जा सका है। हालत यह है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होने को आ गया लेकिन विधायक निधि में करोड़ों यूं ही पड़े रह गए हैं।

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मेरठ में 6 सीटों पर भाजपा काबिज

मेरठ जनपद में सात विधानसभा सीटें हैं। इनमें जहां छह यानी कैंट, किठौर, सरधना, हस्तिनापुर, सिवालखास, मेरठ दक्षिण पर भाजपा काबिज है वहीं एक सीट यानी मेरठ शहर पर सपा का कब्जा है। मेरठ जिले के सातों विधायकों द्वारा 2017 से 2019 तक अपने-अपने क्षेत्र के विकास के लिए विधायक निधि को पूरा खर्च कर नहीं किया जा सका है। परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण कार्यालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मेरठ जनपद के सातों विधायकों की विधायक निधि में अभी तक नौ करोड़ 42 लाख रुपये खर्च नहीं किए जा सके हैं।

कैंट विधायक सबसे पीछे

जनपद की सातों विधानसभाओं में विधायकों द्वारा किये गये खर्च के मामले में कैंट के भाजपा विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल सबसे फिसड्डी रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन साल में मिली पांच करोड़ 81 लाख धन राशि में से महज सवा तीन करोड़ ही सत्यप्रकाश अग्रवाल खर्च कर सके। इनकी निधि में ढाई करोड़ करोड़ रुपये से ज्यादा अवशेष हैं।

भाजपा के मेरठ दक्षिण के विधायक डॉ. सोमेन्द्र तोमर की विधायक निधि में करीब दो करोड़ रुपये अवशेष पड़े हैं।

किठौर के भाजपा विधायक सत्यवीर त्यागी के खाते में एक करोड़ 11 लाख रुपये अवशेष पड़े हैं।

हस्तिनापुर के विधायक दिनेश खटीक की निधि के करीब एक करोड़ रुपये अवशेष पड़े हैं।

भाजपा के सिवालखास के विधायक जितेन्द्र सतवई की निधि के करीब 40 लाख रुपये अवशेष पड़े हैं।

भाजपा के फायरब्रांड नेता एवं सरधना विधायक ठाकुर संगीत सोम जरूर खर्च करने के मामले में अपनी पार्टी के अन्य विधायकों से काफी बेहतर कहे जा सकते हैं। संगीत सोम द्वारा 5 करोड़ 82 लाख रुपये में से पांच करोड़ 70 लाख रुपये खर्च किए गए। इनकी निधि में महज 11 लाख 84 हजार 338 रुपये ही अवशेष पड़े हैं।

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विधायक निधि खर्च करने के मामले में समाजवादी पार्टी के मेरठ के शहर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रफीक अंसारी भी फिसड़्डी रहे हैं। रफीक अंसारी द्वारा 5 करोड़ 70 लाख रुपये में से कुल तीन करोड़ 40 लाख ही खर्च किये जा सके। इनकी निधि में दो करोड़ 29 लाख रुपये अवशेष पड़े हैं। रफीक अंसारी खर्च नहीं करने का ठीकरा सरकारी अफसरों व शासन पर फोड़ते हुए इतना ही कहते हैं कि कोशिश तो बहुत की पर क्या करूं, अफसरों और शासन का अपेक्षित सहयोग ही नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर माइनॉरिटी क्षेत्र को उपेक्षित कर रही है। जो क्षेत्र माइनॉरिटी के हैं वहां पर कोई भी विकास कार्य नहीं हो रहा है।

सत्ता पक्ष के विधायक अवशेष राशि पर तो कुछ नहीं बोलते अलबत्ता यह दावा करने से नहीं हिचकते कि जितना कार्य उनके द्वारा कराया गया है उतना कार्य पहले कभी नहीं हुआ।

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सीमा शर्मा लगभग ०६ वर्षों से डिजाइनिंग वर्क कर रही हैं। प्रिटिंग प्रेस में २ वर्ष का अनुभव। 'निष्पक्ष प्रतिदिनÓ हिन्दी दैनिक में दो साल पेज मेकिंग का कार्य किया। श्रीटाइम्स में साप्ताहिक मैगजीन में डिजाइन के पद पर दो साल तक कार्य किया। इसके अलावा जॉब वर्क का अनुभव है।

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