आपको पता है भारत में कितने फीसदी बच्चे बौने हैं और इसकी असली वजह क्या है?

नेशनल फेमली हेल्थ सर्वे के अनुसार छह माह से पांच वर्ष के बीच की आयु के 58.4 प्रतिशत बच्चे एनीेमिया से ग्रसित हैं। जबकि 53.3 प्रतिशत महिलायें और 27.7 प्रतिशत पुरूष भी एनीमिया से ग्रसित हैं।

फ़ाइल फोटो

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लखनऊ: देश में मौजूदा समय में पांच साल से कम आयु के बच्चों में 38.4 प्रतिशत बौने, 35.7 प्रतिशत कम वजन के तथा 31 प्रतिशत ज्यादा वजन के है।

नेशनल फैमली सर्वे के इन आकंड़ों का खुलासा करते हुए प्रदेश की खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की अपर मुख्य सचिव डा. अनीता भटनागर जैन ने बताया कि विटामिन्स की कमी से होने वाली इन व्याधियों को फोर्टिफिकेशन के जरिए दूध की कुछ श्रेणियों में विटामिन-ए एवं विटामिन-डी माइक्रोन्यूट्रीएन्ट को प्रीमिक्स के जरिए मिलाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि एफएसएसएआई के निर्देश पर यूपी में बहुत कम समय में ही 6.12 लाख मीट्रिक टन फोर्टिफाइड खाद्य तेल का उत्पादन किया जा रहा है।

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58.4 प्रतिशत बच्चे एनीेमिया से ग्रसित

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, लखनऊ द्वारा आज विश्व खाद्य दिवस के अवसर पर दूध मे विटामिन ए एवं डी के फोर्टीफिकेशन के सम्बन्ध में दुग्ध उत्पादकों की एक कार्यशाला में डा. जैन ने बताया कि नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) के अनुसार भारत में 70 प्रतिशत से ज्यादा पांच वर्ष की आयु के बच्चे विटामिन-डी की कमी से ग्रसित है व 57 प्रतिशत बच्चे विटामिन-ए की कमी से ग्रसित है।

नेशनल फेमली हेल्थ सर्वे के अनुसार छह माह से पांच वर्ष के बीच की आयु के 58.4 प्रतिशत बच्चे एनीेमिया से ग्रसित हैं। जबकि 53.3 प्रतिशत महिलायें और 27.7 प्रतिशत पुरूष भी एनीमिया से ग्रसित हैं।

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि हमें स्वास्थ रहने के लिये सही मात्रा में विटामिन्स की अत्यन्त आवश्यकता होती है। फोर्टिफिकेशन की प्रक्रिया से विटामिन-ए और विटामिन-डी माइक्रोन्यूट्रीएन्ट को दूध की कुछ श्रेणियों में प्रीमिक्स के माध्यम से मिलाया जा सकता है।

विटामिन-ए एवं विटामिन-डी की कमी के कारण नेत्र सम्बन्धी, हृदय रोग, कैंसर जैसी कई बीमारियों की सम्भावनायें बढ़ जाती तथा हड्डियां, दांत और मसल्स भी कमजोर हो सकते हैं।

उन्होंने बताया कि आगामी 10 नवम्बर तक प्रदेश की विभिन्न डेरियों में तकनीकी प्रशिक्षण कराया जायेगा। कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव के अलावा  मिनीस्ती एस, आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी व समस्त मण्डलों के सहायक आयुक्त खाद्य उपस्थित रहे।

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