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एक ऐसी जगह: जहां दिखती हैं जलपरियां, साथ ही बुरी आत्माओं का साया भी...

पौराणिक कथाओं, किस्सों और कहानियों के अनुसार, इस आइलैंड पर बुरी आत्माओं का साया है। कोई भी व्यक्ति इस द्वीप की आने की अगर कोशिश करता है तो ये बुरी आत्माएं द्वीप को हवा में गायब कर देती हैं। और इसके साथ ही यह भी कहा जाता है कि इस द्वीप पर जलपरियां रहती हैं।

Vidushi Mishra
Published on: 19 Oct 2019 1:05 PM GMT
एक ऐसी जगह: जहां दिखती हैं जलपरियां, साथ ही बुरी आत्माओं का साया भी...
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नई दिल्ली : आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसी जगह के बारे में जिसे नक्शे में भी ढूढ़ना मुश्किल है क्योंकि ये द्वीप बहुत छोटा है। आमतौर पर हम ऐसी जगहों पर जाना पसंद करते है जिसके पीछे कई रहस्यमयी कहानियां छिपी होती है। लेकिन जिसके बारे में हम बात करने जा रहे है इसकी तो सिर्फ कहानी सुनकर आपको निश्चय करना होगा कि क्या करना है। तो इसी तरह से ताल-मेल खाता हुआ है ये द्वीप, जिसके बारें में पौराणिक कथाओं में बताया गया कि आइनहैलो नाम का ये द्वीप भूत-प्रेतों का द्वीप है।

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द्वीप हो जाता हवा में गायब

पौराणिक कथाओं, किस्सों और कहानियों के अनुसार, इस आइलैंड पर बुरी आत्माओं का साया है। कोई भी व्यक्ति इस द्वीप की आने की अगर कोशिश करता है तो ये बुरी आत्माएं द्वीप को हवा में गायब कर देती हैं। और इसके साथ ही यह भी कहा जाता है कि इस द्वीप पर जलपरियां रहती हैं, जो गर्मी के मौसम में ही पानी से बाहर निकलती हैं।

इसी सिलसिले में स्कॉटलैंड के हाईलैंड्स विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डेन ली ने बताया कि, इस आइलैंड पर हजारों साल पहले भी लोग रहा करते थे, लेकिन सन् 1851 में यहां प्लेग की बीमारी फैल गई, जिसके बाद से यहां रहने वाले लोग यह द्वीप छोड़कर चले गए।

फिलहाल तो अब ये द्वीप बिल्कुल वीरान पड़ा हुआ है। यहां कई पुरानी इमारतों के मलबे हैं। पुरातत्वविदों के अनुसार, खुदाई में यहां पाषाण काल की भी कई दीवारें मिली हैं।

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कोई न जानता है कुछ

हालांकि इस बात की किसी के पास कोई जानकारी नही है कि यह द्वीप कब बना। इस पर पुरातत्वविदों का कहना है कि यह शोध करने वाली जगह है। अगर इसपर शोध किया जाए, तो इतिहास के कई ऐसे रहस्य खुल जाएंगे, जो हैरान कर देने वाले होंगे।

बता दें कि आइनहैलो द्वीप ओर्कने आइलैंड से सिर्फ 500 मीटर दूर स्थित है। जहां लोग रहते हैं, लेकिन इसके बाद भी आइनहैलो द्वीप पर आना बिल्कुल भी आसान नहीं है।

और तो और यहां पर नाव की मदद से भी आ पाना संभव नहीं है, क्योंकि यहां बहने वाली नदियों में इतने ज्यादा ज्वार-भाटे आते हैं कि वो रास्ता ही रोक देते हैं जिसकी वजह से लोगों नहीं पहुंच पाते हैं।

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Vidushi Mishra

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