शर्मनाकः यहां टार्च की रोशनी में होता है मरीजों का इलाज

कोरोना वायरस से निपटने के लिए प्रदेश के अस्पतालों में हाईटेक व्यवस्था करने का दम भरा जा रहा है। लेकिन इन अस्पतालों में पॉवर बैकअप जैसी बुनियादी सुविधाएं…

आशुतोष सिंह

वाराणसी। कोरोना वायरस से निपटने के लिए प्रदेश के अस्पतालों में हाईटेक व्यवस्था करने का दम भरा जा रहा है। लेकिन इन अस्पतालों में पॉवर बैकअप जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मौजूद है। ऐसी ही एक सच्चाई पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के मंडलीय अस्पताल में भी सामने आई है।

शो पीस बना पॉवर बैकअप

जहां अस्पताल के अंदर बिजली जाने के बाद काफी देर तक मोबाइल की रोशनी में मरीजों का इलाज होता रहा। मंडलीय अस्पताल के एक्स-रे वार्ड, जहां अल्ट्रासाउंड से लेकर अन्य सुविधाएं लोगों को दी जाती है। पूरा डिपार्टमेंट बिजली न होने पर ठप्प पड़ जाता है।

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जिसके लिए अस्पताल प्रबंधन बैकअप के लिए यूपीएस और जनरेटर की व्यवस्था करने की बात कही है, लेकिन सच्चाई यह है कि लाइट जाने के बाद जनरेटर कब चलेगा कब नहीं है किसी को नहीं पता है। ऐसा नहीं है कि अस्पताल में पॉवर बैकअप की व्यवस्था नहीं है। हॉवी जनरेटर सेट के साथ ही के यूपीएस की भी व्यवस्था है।

टॉर्च की रोशनी में होता रहा इलाज

 

लेकिन बिजली जाते ही पूरी व्यवस्था ठप्प पड़ जाती है। सूत्रों के मुताबिक अस्पताल में डीजल का खेल लंबे समय से चल रहा है। डीजल बचाने के चक्कर में जनरेटर या तो देरी से शुरू किया जाता है, या किया ही नहीं। अस्पताल कर्मचारी डीजल खर्च करते हैं, सिर्फ कागजों पर।

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अस्पताल के सीएमएस डॉक्टर बीएन श्रीवास्तव मोबाइल कैमरे के फ्लैश में काम किए जाने की बात से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि कभी-कभी जनरेटर चलने में देरी हो जाती है, लेकिन रोज ऐसा नहीं होता है। अगर ऐसी स्वास्थ्य की व्यवस्था रही तो आम लोगों का इलाज कराना टेड़ी खीर साबित हो जाएगी।

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