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PCS मणि मंजरी केस: सवालों के घेरे में बलिया पुलिस, उठ रहे कई सवाल

मनियर नगर पंचायत की अधिशासी अधिकारी मणि मंजरी राय की मौत के मामले को लेकर बलिया पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है।

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Published on: 2 Sep 2020 10:43 AM GMT
PCS मणि मंजरी केस: सवालों के घेरे में बलिया पुलिस, उठ रहे कई सवाल
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ऑफिसर मणि मंजरी केस में सवालों के घेरे में बलिया पुलिस, उठ रहे सवाल
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बलिया: मनियर नगर पंचायत की अधिशासी अधिकारी मणि मंजरी राय की मौत के मामले को लेकर बलिया पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में आ गई है। पुलिस उप महानिरीक्षक सुभाष चन्द्र दूबे ने पिछले दिनों कहा था कि मणि मंजरी के मोबाइल का पैटर्न लाक खुलने के बाद ही मामले का सच उजागर होगा। मणि मंजरी के परिजनों के आक्रामक तेवर अख्तियार कर लेने व मीडिया चैनलों में इसको लेकर परिचर्चा होने के बाद पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय से गैर जमानती वारंट हासिल कर लिया है तथा पुलिस अब न्यायालय से दफा 82 की कार्रवाई की स्वीकृति प्राप्त करने में जुटी है ।

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अधिकारी मणि मंजरी की मौत के मामले से पर्दा कब उठेगा?

मनियर नगर पंचायत की अधिशासी अधिकारी मणि मंजरी राय की मौत के मामले से पर्दा कब उठेगा , यह सवाल आम लोगों के जेहन में कौंध रहा है । मौत को अब तकरीबन दो माह होने को है , लेकिन पुलिस के खाते में इस मामले में सफलता के नाम पर सिर्फ और सिर्फ वाहन चालक चंदन वर्मा की गिरफ्तारी ही है । जिले में अपराध की समीक्षा करने पिछले दिनों आये पुलिस उप महानिरीक्षक सुभाष चन्द्र दूबे ने एक निजी चैनल को दिये गए इंटरव्यू में मणि मंजरी की मौत के मामले को लेकर कहा था कि मणि मंजरी का मोबाइल फोन का लाक खोलने के लिए इसे लखनऊ भेजा गया था ।

अहमदाबाद भेजा जाएगा मोबाइल फोन

लखनऊ के फॉरेंसिक विशेषज्ञ व सी बी आई के विशेषज्ञ लाक खोल पाने में सफल नही हो सके । मोबाइल फोन अहमदाबाद भेजा जाएगा , जहाँ लाक खुलने की संभावना है । पैटर्न लाक खुलने के बाद ही पुलिस इस मामले के अंतिम नतीजे पर पहुंच पायेगी । पुलिस उप महानिरीक्षक एक तरफ यह बयान दे रहे हैं , वहीं दूसरी तरफ पुलिस विभाग से यह सूचना आ रही है कि पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर सक्रिय है । जानकारी यह भी है कि पुलिस ने आरोपियों पर दबाव बढ़ाते हुए उनके विरुद्ध न्यायालय से गैर जमानती वारंट जारी करा दिया है । पुलिस अब आरोपियों के विरुद्ध दफा 82 की कार्रवाई में जुटी हुई है ।

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सब कुछ ठीक ठाक रहा तो अगले एक - दो दिन में पुलिस न्यायालय से इसकी स्वीकृति भी प्राप्त कर लेगी । हालांकि पुलिस विभाग का कोई अधिकारी इस मामले में आधिकारिक रूप से कोई बयान नही दे रहा । अब सवाल यह है कि पुलिस उप महानिरीक्षक दूबे सही बोल रहे हैं कि जनपदीय पुलिस । बलिया पुलिस की भूमिका पर मणि मंजरी की मौत के दिन से ही सवाल उठ रहे हैं । मणि मंजरी के भाई का कहना है कि जिस कमरे में पुलिस मणि मंजरी के आत्महत्या करने की बात कह रही है , उस कमरे की परिस्थिति के अनुसार कोई भी फांसी लगाकर आत्महत्या नही कर सकता । मणि मंजरी के भाई के इस बयान पर कोई पुलिस अधिकारी कुछ भी कहने की स्थिति में नही है । मणि मंजरी का पैतृक गांव जिले की सीमा से सटे ही स्थित है ।

उठ रहे सवाल

बताते हैं कि मौत की सूचना के बाद परिजन माल्देपुर तक पहुंच गए थे , तब आखिरकार पुलिस ने बगैर परिजनों को मणि मंजरी का शव दिखाये उसे क्यों उतार दिया तथा पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया । इस जल्दबाजी की वजह आम लोगों के समझ से परे है । मणि मंजरी के पिता इसको लेकर सवाल उठा रहे हैं । उनका यह भी कहना है कि मणि मंजरी की हत्या कर घटना को फांसी लगाकर आत्महत्या करने का शक्ल दे दिया गया । घटना के अगले दिन भी पिता ने मीडिया को दिये गए बयान में हत्या का आरोप लगाया था । पिता के इस आरोप को यदि सत्य माना जाय तो सवाल यह है कि मणि मंजरी के भाई विजया नन्द ने हत्या के बजाय अनैतिक दबाव बनाकर आत्महत्या के लिए विवश करने का मुकदमा दर्ज क्यों कराया ।

धन वसूली तक की चर्चा

पुलिस ने वाहन चालक चंदन वर्मा की गिरफ्तारी के पूर्व उससे कई दिन तक पूछताछ की थी । इस पूछताछ के बाद तमाम तरह की बाते सामने आई । मणि मंजरी से सम्बन्धों से लेकर धन वसूली तक की चर्चा चली । इसके बाद एक मोबाइल फोन से वीडियो मिला । मनियर नगर पंचायत से महत्वपूर्ण फ़ाइल गायब होने की बाते सामने आई । पुलिस की अब तक की तफ्तीश पर नजर दौड़ाये तो पुलिस भले ही मुकदमा की तफ्तीश के आखिरी चरण में पहुंच गई हो , पुलिस ने मुकदमे की धारा में अब तक कोई बढ़ोत्तरी नही की है । पुलिस अधिकारी वीडियो को लेकर ऑफ रिकार्ड बहुत कुछ बोलते हैं , लेकिन आन रिकार्ड वह कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं । यहां तक कि वीडियो मिलने व वीडियो में मिले अहम साक्ष्य मिलने से भी इंकार कर रहे हैं ।

पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान

इसको लेकर पुलिस की भूमिका पर सवालिया निशान लगाये जा रहे हैं । उधर आरोपियों की गिरफ्तारी न होने के मामले में पुलिस पूरी तरह से असहाय की स्थिति में है । सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव राय ने मणि मंजरी को न्याय दिलाने की लड़ाई सड़क से संसद व न्यायालय तक लड़ने की घोषणा की है तो पिछले 48 घण्टे में टीवी डिबेट में इसको लेकर प्रशासन की जमकर छीछालेदर की गई है । सवाल यह है कि मणि मंजरी की मौत का सत्य कब सामने आएगा । मोबाइल फोन के जरिये ही यदि सच को सामने आना है तो अब तक मोबाइल फोन अहमदाबाद क्यों नही भेजा गया । क्या पुलिस इलाहाबाद हाईकोर्ट से आरोपियों को राहत मिलने का

इंतजार कर रही है । पुलिस का दावा है कि आरोपियों का मोबाइल फोन स्वीच ऑफ है । उनका कोई लोकेशन मिल नही रहा । इस पुलिसिया दावे पर लोग यकीन करने को तैयार नहीं हैं । मणि मंजरी का मामला अब सियासी करवट लेने लगा है । सपा ने इस मामले को लेकर जिस तरह से भूमिहार कार्ड खेला है , उसको लेकर भाजपा के भूमिहार नेताओं की स्थिति असहज होती जा रही है ।

रिपोर्ट: अनूप कुमार हेमकर

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