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दिल्ली के चुनावी समर में ढूंढ रही निगाहें अपने इस नेता को

दिल्ली के चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। राजनीतिक दलोें के नेताओं की सक्रियता देखते ही बन रही है चाहे वह भाजपा, कांग्रेस हो, बसपा हो अथवा कोई अन्य क्षेत्रीय दल का नेता क्यों न हो, पर इस चुनावी शोर मेें जनता की निगाहे अपनी उस नेत्री की तलाश कर रही हैं

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ShreyaBy Shreya

Published on 20 Jan 2020 8:26 AM GMT

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श्रीधर अग्निहोत्रीे

लखनऊ: दिल्ली के चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। राजनीतिक दलोें के नेताओं की सक्रियता देखते ही बन रही है चाहे वह भाजपा, कांग्रेस हो, बसपा हो अथवा कोई अन्य क्षेत्रीय दल का नेता क्यों न हो, पर इस चुनावी शोर मेें जनता की निगाहें अपनी उस नेत्री की तलाश कर रही हैं जिसने लगातार पांच दशकों तक अपनी राजनीतिक सक्रियता के कारण लोगों के दिलों में अपनी खास जगह बनाने के अलावा दिल्ली को एक नए विकास के रास्ते पर खड़ा करने का काम किया।

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15 सालों तक CM पद पर बनी रहीं शीला दीक्षित

शीला दीक्षित ने 1998 से 2013 तक लगातार 15 सालों तक दिल्ली के मुख्यमंत्री की भूमिका निभाई। इसके बाद उन्हें. 2014 में केरल का राज्यपाल बनाया गया था. लेकिन अगस्त, 2014 में उन्होंने इस पद से इस्तीफा दे दिया था। राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाली शीला दीक्षित ने दिल्ली की राजनीति में भाजपा को नाको चले चबवा दिए।

हुआ 'आम आदमी पार्टी' का जन्म

पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद दिल्ली की सता पर काबिज रही भाजपा को सत्ता से उखाड़ने का काम शीला दीक्षित ने किया और 1998 मेें भाजपा को सत्ता बाहर कर कांग्रेस को सत्ता दिलाने का काम किया। इसके बाद लगातार दिल्ली की सत्ता पर वह काबिज रही लेकिन 2012 में दिल्ली की केन्द्र सरकार के खिलाफ बने माहौल के खिालफ जब अन्ना आंदोलन हुआ तो एक नए नेता का जन्म हुआ जिसका नाम अरविन्द केजरीवाल था और जिसने आम आदमी की नब्ज भांपकर ‘आम आदमी पार्टी’ बनाई।

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दिल्ली के चुनावी समर में ढूंढ रही निगाहें अपने इस नेता को

जब 'कांग्रेस' और 'आप' ने मिलकर बनाई सरकार

2013 के विधानसभा चुनाव में अरविन्द केजरीवाल की हवा में कांग्रेस की हार हुई। दिल्ली की कुल 70 सीटों में से भाजपा 31 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। वहीं आम आदमी पार्टी 28 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही और कांग्रेस को 8 सीटें मिली। इसके बाद कांग्रेस के समर्थन से अरविन्द केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बने, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव से ऐन पहले सीएम के पद से इस्तीफा देकर विधानसभा भंग कर दी। पर जनता को कांग्रेस का यह स्टैण्ड रास नहीं आया। और में जब 2015 में विधानसभा के चुनाव हुए तो कांग्रेस ने शीला दीक्षित को किनारे कर अरविंद सिंह लवली के नेतृत्व में चुनाव लड़ा।

70 सीटों में 67 सीटें जीतने में कामयाब रही 'आप'

दिल्ली की कुल 70 सीटों में से आम आदमी पार्टी 67 सीटें जीतने में कामयाब रही। कांग्रेस को इस चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली। इसके बाद कांग्रेस हाईकमान ने कई प्रयोग किए पर हर प्रयोग असफल रहा। दिल्ली कांग्रेस अध्यक्षा अजय माकन के नेतृत्व में जब 2017 में एमसीडी के चुनाव हुए तो कांग्रेस तीसरे नम्बर आ गयी।

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