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यूपी की जनता को लगा बिजली का झटका, सरकार ने 12% तक बढ़ाए दाम

यूपी विद्युत नियामक आयोग द्वारा मंगलवार की देर शाम पावर कारपोरेशन को औसतन 12 से 15 प्रतिशत बिजली की दरों में वृद्धि की अनुमति दे दिया है। घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए 8% से 12% के दायरे में वृद्धि की गयी है।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 3 Sep 2019 2:26 PM GMT

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लखनऊ: यूपी विद्युत नियामक आयोग ने मंगलवार की देर शाम पावर कारपोरेशन को औसतन 12 से 15 प्रतिशत बिजली की दरों में वृद्धि की अनुमति दे दिया है। घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए 8% से 12% के दायरे में वृद्धि की गयी है।

कृषक उपभोक्ताओं के लिए 9 फीसदी शहरी अनुसूची तथा 15 फीसदी ग्रामीण अनुसूची में वृद्धि की गयी है। प्री-पेड मीटर उपभोक्ता को 2 फीसदी की छूट देने का प्रस्ताव है। यूपी विद्युत नियामक आयोग की हरी झंडी मिलते ही पावर कारपोरेशन एक सप्ताह के अंदर में नयी दरें लागू कर देगा।

पावर काॅरपोरेशन के प्रस्ताव पर आयोग ने सभी श्रेणी के बिजली के उपभोक्ताओं के दरों पर मोहर लगाते हुए रेगुलेटरी सरचार्ज 4.8 प्रतिशत को समाप्त कर दिया है, वहीं रेगुलेटरी असेट 11852 करोड़ का उपभोक्ताओं को फौरी तौर पर लाभ नहीं दिया है। इस नुकसान की भरपाई भी पॉवर कारपोरेशन टैरिफ बढ़ोतरी करके कर रहा है।

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यह बढ़ोतरी होने से सबसे अधिक बोझ 68 लाख शहरी उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा। दो से पांच किलोवाट तक उपभोक्ताओं के प्रतिमाह बिल में औसत 100 से 300 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। जबकि ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ता जो पहले 1 किलोवाट पर 400 रूपया देते थे अब उन्हें 500 रूपया देना पड़ेगा यानी कि 25 प्रतिशत वृद्धि की गयी है। गांव का अनमीटर्ड किसान जो 150 प्रति हार्सपावर अब उसे 170 प्रति हार्सपावर देना होगा यानी कि उसकी दरों में लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है।

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सबसे अधिक वृद्धि शहरी बीपीएल उपभोक्ताओं के साथ किया गया है, जो अभी तक 1 किलोवाट तक 100 यूनिट तक रू. 3 प्रति यूनिट देते थे अब उसे सीमित कर 1 किलोवाट तक 50 यूनिट तक 3 रूपया सीमित कर दिया गया है यानी कि शहरी बीपीएल यदि 100 यूनिट खर्च करेगा तो उसकी दरों में लगभग 36 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि कर दी गयी है। वहीं ग्रामीण बीपीएल को100 यूनिट तक 3 रुपया ही रखा गया है। इसी प्रकार प्रदेश के शहरी घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग स्लैबवाइज लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है। वहीं आद्योगिक श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए 5 फीसदी से 10 फीसदी के दायरे में वृद्धि की गयी है।

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प्रदेश में करीब दो वर्ष बाद बढ़ोत्तरी की गई है। इससे पहले 2017 में बिजली की दरों में औसतन 12.73 फीसदी का इजाफा किया गया था। 2019 के लोकसभा चुनाव खत्म होने के फौरन बाद उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने सभी श्रेणियों के तकरीबन तीन करोड़ उपभोक्ताओं के लिए बिजली की मौजूदा दरों में जबरदस्त बढ़ोतरी का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में दाखिल किया था।

इसके तहत घरेलू बिजली की दरें 6.20 से 7.50 रुपये प्रति यूनिट तक प्रस्तावित थीं। कामर्शियल बिजली की दरें भी 8.85 रुपये प्रति यूनिट तक करने के साथ ही फिक्स्ड चार्ज को बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया था। तभी से माना जा रहा था कि प्रस्ताव अमल में आने पर सबसे ज्यादा चोट गरीब परिवारों पर पडऩा तय है। उपभोक्ता परिषद पूरे टैरिफ का अध्ययन कर रहा है बहुत जल्द ही नियामक आयोग में एक रिव्यू याचिका दाखिल करेगा और सड़कों पर आन्दोलन का ऐलान करता है, जल्द ही आन्दोलन की रणनीति बनायेंगे।

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यूपी राज्य उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा जिस प्रकार से नियामक आयोग ने पावर काॅरपोरेशन की प्रस्तावित व्यवस्था पर मोहर लगायी है वह पूरी तरह असंवैधानिक है। प्रदेश के 2 करोड़ 70 लाख उपभोक्ताओं के साथ आयोग ने धोखा किया है। आम जनता की सुनवाई में किसानों, ग्रामीणों व घरेलू उपभोक्ताओं ने आयोग के सामने अपनी बात रखी, लेकिन आयोग ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया, जो अपने आप में बड़ा सवाल है।

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