प्रयागराज में शिक्षा सेवा अधिकरण बनाने को लेकर वकीलों का आंदोलन रहेगा जारी

शिक्षा सेवा अधिकरण प्रयागराज में गठित करने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं का आंदोलन जारी है। बार एसोसिएशन की हंगामेदार रही आम सभा में 3 सितंबर को भी न्यायिक कार्य बहिष्कार जारी रखने का बार एसोसिएशन में वकीलों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया।

प्रयागराज: शिक्षा सेवा अधिकरण प्रयागराज में गठित करने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं का आंदोलन जारी है। बार एसोसिएशन की हंगामेदार रही आम सभा में 3 सितंबर को भी न्यायिक कार्य बहिष्कार जारी रखने का बार एसोसिएशन में वकीलों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया। फोटो आईडी सेंटर भी बंद रहेगा। कोई भी अधिवक्ता न्यायालय परिसर में प्रवेश नहीं करेगा। इसके साथ ही लखनऊ चलो अभियान स्थगित कर दिया गया है।

3 सितंबर को दोपहर 1 बजे पुस्तकालय हाल में आम सभा होगी जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा होगी। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य बहिष्कार किया जिससे न्यायिक काम बुरी तरह से बाधित हुआ।

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सभा की अध्यक्षता बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडेय व संचालन महासचिव जेबी सिंह ने किया। सोमवार 2 सितंबर को 10 बजे शुरू हुई आम सभा में मुख्यमंत्री से मिलने गए प्रतिनिधि मंडल ने अपनी रिपोर्ट पेश दी। वकीलों की आमसभा जारी थी। इसी बीच कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ का संदेश आया और सभा 1 बजे तक स्थगित रख बार के पदाधिकारी मंत्री से मिलने चले गए और मंत्री से मिलकर वापस लौट महासचिव जेबी सिंह ने रिपोर्ट दी।

सभा में पूर्व अध्यक्ष व बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व चेयरमैन वीसी मिश्र, पूर्व अध्यक्ष आरके ओझा, पूर्व अध्यक्ष आई के चतुर्वेदी, पूर्व अध्यक्ष सीएल पांडेय, पूर्व महासचिव ओपी सिंह व संयुक्त सचिव प्रशासन प्रियदर्शी त्रिपाठी ने विचार रखे।

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अध्यक्ष राकेश पांडेय ने बार को बताया कि रविवार को लखनऊ मे मुख्यमंत्री से वार्ता सार्थक,सकारात्मक व सौहार्दपूर्ण रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे दरवाजे बार के लिए सदैव खुले हैं।

10 बजे शुरू हुई बार की सभा हंगामेदार रही। आंदोलन को स्थगित करने की आहट मात्र से अधिवक्ता उत्तेजित होते रहे। बीच में सभा स्थगित हुई और एक बजे जब दुबारा शुरू हुई तो अधिवक्ताओं का आंदोलन जारी रखने का भारी दबाव बना रहा।

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जोशपूर्ण भाषण के बीच बार ने न्यायिक कार्य बहिष्कार का प्रस्ताव पारित किया और लक्ष्य की प्राप्ति तक आंदोलन जारी रखने व प्रतिदिन आम सभा में रणनीति तय करने का फैसला लिया गया।

वरिष्ठ अधिवक्ता ए एन त्रिपाठी ने 1976 में लखनऊ में गठित राज्य सेवा अधिकरण व वर्तमान शिक्षा सेवा अधिकरण की संवैधानिकता को याचिका के माध्यम से चुनौती देने का सुझाव दिया है और कहा है कि यदि बार अनुमति देती है तो वह याचिका दाखिल करेंगे।

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उन्होंने कहा कि जब शिक्षा सेवा अधिकरण का प्रस्ताव रखा गया तो मंत्रिमंडल में प्रयागराज के प्रतिनिधि क्यों चुप रहे और प्रयागराज के विधायक क्यों सोते रहे। अधिनियम पास हो गया और हाईकोर्ट बार को भनक नहीं लगी। यह दुखद स्थिति है। बार के आंदोलन में जनप्रतिनिधियों को भी शामिल करने का त्रिपाठी ने सुझाव दिया।