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प्रशासनिक पदों पर तैनात चिकित्सकों को चिकित्सा कार्यों में लगाने की तैयारी

उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक पदों पर काम कर रहे चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों को उनके प्रशासनिक पदों से हटाकर मरीज के उपचार वाले पदों पर उनकी तैनाती करने की तैयारी में है।

Aditya Mishra

Aditya MishraBy Aditya Mishra

Published on 28 July 2019 4:22 PM GMT

प्रशासनिक पदों पर तैनात चिकित्सकों को चिकित्सा कार्यों में लगाने की तैयारी
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक पदों पर काम कर रहे चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों को उनके प्रशासनिक पदों से हटाकर मरीज के उपचार वाले पदों पर उनकी तैनाती करने की तैयारी में है।

उत्तर प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान इसके संकेत दिये और सिस्टम की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि हम अभी भी 40-50 वर्ष पुरानी व्यवस्था पर काम कर रहे हैं।

हमारे पास योग्य डॉक्टर्स और स्वास्थ्यकर्मियों की जो संख्या है, उनमें से कई लोगों से प्रशासनिक आदि कार्य कराया जा रहा है।

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घर-घर स्वास्थ्य सेवा पहुंचाना बना चुनौती

उन्होंने कहा कि मेडिकल सिस्टम को सुदृढ करने के लिए अस्थाई नहीं, बल्कि स्थाई व्यवस्था बनानी है। प्रदेश में घर-घर स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने में कई चुनौतियां आ रही हैं। जबकि कुछ जिलों में शुरू हो चुकी टेलीमेडिसिन, टेलीरेडियोलॉजी जैसी सेवा से मरीजों को काफी राहत मिल रही है।

उन्होने कहा कि प्रदेश की जरूरत के हिसाब से जन स्वास्थ्य के खास क्षेत्रों में प्रशिक्षण का आकलन किया जाये। जन स्वास्थ्य प्रोफेसनल्स की शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए जो आवश्यकता होगी, उसकी सरकार द्वारा पूरी सहायता की जाएगी।

गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग में इस समय करीब 18 हजार चिकित्सकों की आवष्यकता के सापेक्ष करीब 12 हजार चिकित्सक ही उपलब्ध है। ऐसे में पूरे प्रदेष में महानिदेशालय सहित अनेक स्थानों पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती हैं, जो कार्यालयों में सिर्फ फाइलों में सिर खपा रहे हैं, जबकि ऐसे चिकित्सक अगर अस्पतालों में रहेंगे तो मरीजों को देख सकेंगे।

हालांकि स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह का कहना है कि जब हम सत्ता में आये थे तो यूपी में सात हजार से ज्यादा चिकित्सकों की कमी थी। हमने इस कमी को पूरा करने की कोषिष की है और करीब 1600 वाक इन इंटरव्यू किये है।

इसके साथ ही सरकार ने आयुश के जरिये भी भर्ती का अभियान भी चलाया है, जिसके बाद अब करीब 2200 चिकित्सकों की कमी रह गयी है।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक सरकार, चिकित्सकों की सेवानिव्त्ति की आयुसीमा बढ़ाने, सेवानिवृत्त पा चुके चिकित्सकों को फिर से सेवा में लेकर तथा प्रषासनिक पदों पर तैनात विषेशज्ञ चिकित्सकों को मरीजों के उपचार में लगाने पर विचार कर रही है।

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