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शिव भक्त हैं तो तुरंत देखें: कद्दू से पूरी होगी मनोकामना, बहुत खास है भोले बाबा का मंदिर

Ashiki Patel

Ashiki PatelBy Ashiki Patel

Published on 21 Feb 2020 10:42 AM GMT

शिव भक्त हैं तो तुरंत देखें: कद्दू से पूरी होगी मनोकामना, बहुत खास है भोले बाबा का मंदिर
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आसिफ अली

शाहजहांपुर: जनपद की उत्तरी सीमा पर बंडा थाना क्षेत्र में गोमती नदी के तट पर स्थापित सुनासिर नाथ स्थान पर भगवान शिव परिवार समेत स्वयं प्रकट हुए थे। आज भी यहां भगवान शिव, पार्वती व गणेश की जलमग्न प्रतिमाएं स्थापित हैं। अहिल्या से छल करने के बाद गौतम ऋषि के श्राप से मुक्ति पाने के लिए इंद्रदेव ने इसी स्थान पर तप करके भगवान शिव की कृपा से मुक्ति पाई थी। आज भी इस स्थान पर दूर दराज से हजारों लोग आते हैं। खास बात ये है कि मनोकामना पूरी होने के बाद इस मंदिर मे श्रद्धालु घन्टा और कद्दू चढ़ाते है।

मनोकामना पूरी होने पर चढ़ाये जाते हैं कद्दू और घंटा

जंगल से सटा और नदी तट पर स्थित यह पौराणिक स्थल किसी पर्यटन से कम नहीं है। सावन के महीने में यहां शिव भक्तों की खूब भीड़ उमड़ती है।

अहिल्या से छल करने पर देवराज इंद्र को उनके पति गौतम ऋषी ने श्राप दिया जिससे उनके पूरे शरीर में फफोले हो गए थे। अहिल्या को भी श्राप देकर उन्होंने पत्थर की शिला बना दिया था। वन जाते समय जब भगवान राम के चरण शिला पर पड़े तो अहिल्या श्राप से मुक्ति हुईं। श्राप से मुक्त होने के लिए देवराज इंद्र ने गोमती नदी के तट पर सुनासिर नाथ नामक स्थान पर कई वर्ष तक घोर तपस्या की थी। तब भगवान शिव ने माता पार्वती व गणेश के साथ स्वयं प्रकट होकर उन्हें श्राप से मुक्त किया था। इसी स्थान पर आज भी यह पौराणिक मंदिर है। जहां आज भी दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु मनौतियां मांगने आते हैं।

गोमती नदी के तट स्थित है सुनासिर नाथ शिव मंदिर

जनपद के उत्तरी भाग में बंडा और खुटार के बीच जंगल के निकट गोमती नदी के तट पर स्थापित सुनासिर नाथ शिव मंदिर और इंद्र के श्राप से मुक्त होने का उल्लेख पुराणों में मिलता है। गोमती नदी का उद्गम स्थल पीलीभीत जिले के माधोटांडा में है। खुटार और बंडा दोनों स्थानों से इस मंदिर तक जाने के लिए पक्की सड़क है। मंदिर गोमती नदी के बिल्कुल तट पर है। मंदिर और नदी के बीच एक कुंड है। कुंड में हर समय जल भरा रहता है। इसी कुंड में भगवान शिव और माता पार्वती की भगवान गणेश को गोद में लिए पाषाण प्रतिमा है। कुंड ज्यादा गहरा नहीं है। हालांकि बरसात में यह कुंड ऊपर तक भर जाता है, लेकिन अन्य दिनों में पानी कम रहने के कारण श्रद्धालु कुंड में उतरकर हाथों से टटोल कर दर्शन पा लेते हैं।

होती है हर मनोकामना पूरी

इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां सच्चे दिल से मांगी हर मनोकामना पूरी होती है। इस बात का सबूत देती हैं मंदिर पर चढ़ी घंटियां और घंटे। लोग मनौती पूरी होने पर घंटा-घंटियां चढ़ाते हैं। चूंकि यहां भगवान शिव अपने पुत्र व अद्र्धाग्नी के साथ प्रकट हुए थे। इसलिए लोगों की मान्यता है कि यहां पुत्र रत्न के लिए मांगी गई मनौती जरूर पूरी होती है। मनौती में पुत्र रत्न की प्राप्ति होने पर लोग यहां कद्दू चढ़ाते हैं। अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी लोग यहां आते रहते हैं। जिससे जंगल से सटे इस वीरान इलाके के इस मंदिर पर हमेशा मेला सा लगा रहता है। महाशिवरात्रि पर यहां भारी भीड़ जुटती है। दूर-दूर से आए श्रद्धालु यहां गोमती में डुबकी लगाकर भगवान शिव पर जलाभिषेक कर पुण्य कमाते हैं।

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वही श्रद्धालु राजकुमार का कहना है कि महाशिवरात्रि के दिन इस मंदिर मे हजारों लोग दर्शन करने आते है। आज के दिन यहां बहुत भीड़ होती है। बङा मेला लगता है। इस मंदिर पर सिर झुकाने वालें की हर मनोकामना जरूर पूरी होती है। उसका सुबूत है यहा पर टंगे हुए ढेर सारे घन्टे। माना जाता है कि मनोकामना पूरी होने पर यहां घन्टा ओर कद्दू चढ़ाया जाता है। जिससे बेहद बेहद खुश होते है।

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