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कैलाश पर्वत का खुलासा: जान कर आप भी हो जायेंगे हैरान, डॉक्टर का चौकाने वाला सर्वे

Ashiki Patel

Ashiki PatelBy Ashiki Patel

Published on 21 Feb 2020 10:02 AM GMT

कैलाश पर्वत का खुलासा: जान कर आप भी हो जायेंगे हैरान, डॉक्टर का चौकाने वाला सर्वे
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नई दिल्ली: कुछ साल पहले रूस के एक डॉक्टर ने कैलाश मानसरोवर की यात्रा की थी। जिसके बाद उन्होंने कुछ चौकाने वाले खुलासे किये थे। उन्होंने दावा किया था कि कैलाश पर्वत एक प्राचीन मानव निर्मित पिरामिड है, जो अनेक छोटे-छोटे पिरामिडों से घिरा हुआ है। कैलाश पर्वत को हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायी पवित्र पर्वत मानते हैं। वहीँ हिन्दुओं का मानना ​​है कि भगवान शिव का वास इसी पर्वत पर है। यहीं पर उन्होंने अपनी समाधि ली थी।

आज तक कोई भी इस पवित्र पर्वत पर नहीं चढ़ पाया। जिसने भी चढ़ने की कोशिश की, उसकी मृत्यु हो गई। जिसको लेरकर बहुत-सी बातें प्रचलित हैं। वहीँ चीन की सरकार ने कैलाश पर्वत की धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए पर्वतारोहियों पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है।

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रूसी डॉक्टर एर्नस्ट मुल्दाशिफ ने लिखा है कि उन्हें एक बार साइबेरियाई पर्वतारोही ने बताया था कि कुछ पर्वतारोही कैसे कैलाश पर्वत पर एक निश्चित बिन्दु तक पहुँचे। उसके बाद वे अचानक बूढ़े दिखाई देने लगे। इसके एक साल बाद ही बुढ़ापे की वजह से उनकी मृत्यु हो गई।

एर्नस्ट मुल्दाशिफ़ ने यह तय किया कि वे कैलाश पर्वत के रहस्यों को खोलने के लिए उस इलाके में जाएंगे। उनकी पर्वतारोहण टीम में भूविज्ञान व भौतिकी के विशेषज्ञ और इतिहासकार शामिल थे। इस दल के सदस्यों ने कई तिब्बती लामाओं से मुलाकात भी की। बाद में मुल्दाशिफ ने एक किताब भी लिखी, व्हेयर डू वी कम फ्राम, इस किताब में उन्होंने कैलाश यात्रा की काफी चर्चा की है।

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खोजबीन के बाद एर्नस्ट मुल्दाशिफ़ की टीम आखिरकार इस निष्कर्ष पर पहुँची कि वास्तव में कैलाश पर्वत एक विशाल मानव निर्मित पिरामिड है, जिसका निर्माण प्राचीन काल में किया गया था। उन्होंने दावा किया कि यह पिरामिड कई छोटे-छोटे पिरामिडों से घिरा हुआ है और यह पारलौकिक गतिविधियों का केन्द्र है।

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वापस लौटने के बाद उन्होंने लिखा, "रात की ख़ामोशी में पहाड़ के भीतर से एक अजीब तरह की फुसफुसाहटों की आवाज़ सुनाई देती है। एक रात अपने दोनों सहयोगियों के साथ मैंने साफ़-साफ़ पत्थरों के गिरने की आवाज़ सुनी थी। यह आवाज़ कैलाश पर्वत के पेट के भीतर से सुनाई दे रही थी। हमें ऐसा लगा कि जैसे इस पिरामिड के अन्दर कुछ लोग रहते हैं।"

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उन्होंने आगे लिखा, "तिब्बती ग्रथों में लिखा हुआ है कि कैलाश पर्वत के उत्तर-पश्चिम में स्थित शम्बाला एक आध्यात्मिक देश है। मेरे लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस विषय पर चर्चा करना मुश्किल है। मैं पूरी सकारात्मकता से यह कह सकता हूँ कि कैलाश पर्वत का इलाका सीधे-सीधे पृथ्वी के जीवन से जुड़ा हुआ है। जब हमने 'सिद्धों और तपस्वियों के राज्य’ तथा 'पिरामिड और पत्थरों के दर्पण’ को मिलाकर एक योजनाबद्ध नक्शा बनाया तो हम यह देखकर हैरान रह गए कि वह नक़्शा जैसे डीएनए के अणु की स्थानिक संरचना का नक़्शा था।"

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