राम जन्मभूमि: स्वर्ग द्वार पर SC ने कहा- इसी में 5 इंच के एक पालने का भी जिक्र है

अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई जारी है। इस सुनवाई का बुधवार को छठा दिन था। इस सुनवाई के दौरान मंगलवार को इस मुद्दे को लेकर बहस शुरू हुई कि क्या इस विवादित स्थल पर पहले कोई मंदिर था।

राम जन्मभूमि: स्वर्ग द्वार पर SC ने कहा- इसी में 5 इंच के एक पालना का भी जिक्र है

राम जन्मभूमि: स्वर्ग द्वार पर SC ने कहा- इसी में 5 इंच के एक पालना का भी जिक्र है

नई दिल्ली : अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई जारी है। इस सुनवाई का बुधवार को छठा दिन था। इस सुनवाई के दौरान मंगलवार को इस मुद्दे को लेकर बहस शुरू हुई कि क्या इस विवादित स्थल पर पहले कोई मंदिर था।

आपको बता दें, मंगलवार की सुनवाई में राम जन्मभूमि की तरफ से वकील सी. एस. वैद्यनाथन ने अपनी दलीलें रखीं और आज भी वह ही अपनी बात आगे बढ़ा रहे हैं। इसी दौरान एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि ब्रिटिश सर्वाइवर मार्टिन के स्केच में 1838 के दौरान मंदिर के पिलर दिखाए गए थे। इस दौरान अदालत ने एक बार फिर राम जन्मभूमि की तरफ से जन्मभूमि पर कब्जे के सबूत मांगे थे।

जानिए 14 अगस्त यानि बुधवार की सुनवाई के अपडेट

सुबह 10.54 : अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई थी। राम जन्मभूमि की तरफ से सीएस. वैद्यनाथन अपनी दलीलें रखी, उन्होंने अदालत के सामने पुराणों का हवाला देना शुरू किया। आपको बता दें कि मंगलवार को राजीव धवन ने कहा था कि राम जन्मभूमि के वकील सिर्फ अदालत के फैसले को पढ़ रहे हैं, कोई तथ्य नहीं दे रहे हैं। जिसके बाद अब उन्होंने पुराणों का जिक्र करना शुरू किया।

राम जन्मभूमि की तरफ से वकील ने अदालत में स्कन्द पुराण का जिक्र किया। उन्होंने इस दौरान सरयू नदी-राम जन्मभूमि के इतिहास और महत्व के बारे में बताया।

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सुबह 11.05 : राम जन्मभूमि की तरफ से वकील के द्वारा स्कन्द पुराण का जिक्र किए जाने पर जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि आप जिन शब्दों का जिक्र कर रहे हैं, उनमें रामजन्मभूमि के दर्शन का जिक्र है। इसमें किसी देवता का जिक्र नहीं है। जिसपर वकील वैद्यनाथन ने कहा कि रामजन्मभूमि ही अपने आप में देवता है।

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सुबह 11.41 : अयोध्या राम जन्मभूमि मामले पर सुनवाई जारी है। इस दौरान राम जन्मभूमि की तरफ से वकील वैद्यनाथन ने जोसेफ टाइफेंथलर का हवाला देकर कुछ पढ़ा। जिसमें राम की याद में सरयू नदी के किनारे कुछ इमारतें बनाई गई हैं। जिसमें से एक स्वर्ग द्वार भी था। जो बाद में औरंगजेब के द्वारा गिराया गया, कुछ जगह जिक्र है कि बाबर के द्वारा गिराया गया।

5 इंच के एक पालना का भी जिक्र

इस पर जस्टिस भूषण ने कहा कि इसी में 5 इंच के एक पालना का भी जिक्र है, क्या आप मानेंगे कि वह कोर्टयार्ड के अंदर है या बाहर? जिस पर वकील ने इसके अंदर होने की बात कही।

इस पर जस्टिस बोबडे ने उनसे पूछा कि इस जगह को बाबरी मस्जिद कब से कहना शुरू किया गया? राम जन्मभूमि की तरफ से वकील ने इसपर जवाब दिया कि 19वीं सदी में, उससे पहले के कोई साक्ष्य नहीं हैं।

उन्होंने पूछा कि इसका क्या सबूत है कि बाबर ने ही मस्जिद बनाने का आदेश दिया था। क्या इसका कोई सबूत है कि मंदिर को बाबर या उसके जनरल के आदेश के बाद ही ढहाया गया था।

इस पर राम जन्मभूमि की तरफ से वकील ने कहा कि मंदिर को किसने ढहाया इस पर कई तरह के तथ्य हैं, लेकिन ये तय है कि इसे 1786 से पहले गिराया गया था।

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सुबह 11.55 : राम जन्मभूमि की तरफ से वकील वैद्यनाथन ने इस दौरान ब्रिटिश सर्वाईवर मार्टिन के स्केच का जिक्र किया, जिसमें 1838 के दौरान मंदिर के पिलर दिखाए गए थे। इस रिपोर्ट में यह बताया गया कि रामजन्मभूमि पर मंदिर ईसा मसीह के जन्म से 57 साल पहले मंदिर बना था।

मुगलों के द्वारा मंदिर को तोड़ा गया

हिंदुओं का मानना है कि मुगलों के द्वारा मंदिर को तोड़ा गया। उन्होंने कहा कि यूरोप के इतिहास में तारीखों का जिक्र अहम है, लेकिन हमारे इतिहास में घटना महत्वपूर्ण है।

इस पर जस्टिस बोबडे ने कहा कि हमारे यहां इसे इतिहास कहा गया है, जिसमें तारीख नहीं इवेंट का जिक्र है। इसी पर बाद में जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि तो आप हमें इस वक्त तारीख या फैक्ट दिखाने के लिए बल्कि लोगों की आस्था को दर्शाने के लिए सबूत पेश कर रहे हैं।

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राम जन्मभूमि की तरफ से दलीलें रख रहे सी. एस. वैद्यनाथन ने कई बार अदालत में ऐतिहासिक और पौराणिक तथ्यों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इतिहास से जुड़ी कई रिपोर्ट्स में इस बात को माना गया है कि वहां पर मस्जिद से पहले मंदिर था।

साथ ही उन्होंने यह तर्क भी दिया कि बाहरी लोगों ने मंदिर को तोड़ा और मस्जिद बनाई थी। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ये मस्जिद बाबर ने ही बनवाई थी।