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यूपी: उच्च सदन में ध्वस्त कानून-व्यवस्था पर विपक्ष का हंगामा

मानसून सत्र की शुरूआत के पहले दिन गुरुवार को विधान परिषद में विपक्ष ने राज्य की कानून व्यवस्था, सोनभद्र में सामूहिक नरसंहार, संभल में दो पुलिसकर्मियों की हत्या व सपा नेता आजम खां पर लगाये जा रहे मुकदमों पर सरकार को घेरा।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 18 July 2019 2:49 PM GMT

यूपी: उच्च सदन में ध्वस्त कानून-व्यवस्था पर विपक्ष का हंगामा
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लखनऊ: राजभवन के सामने सपा कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, देखें तस्वीरें
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लखनऊ: मानसून सत्र की शुरूआत के पहले दिन गुरुवार को विधान परिषद में विपक्ष ने राज्य की कानून व्यवस्था, सोनभद्र में सामूहिक नरसंहार, संभल में दो पुलिसकर्मियों की हत्या व सपा नेता आजम खां पर लगाये जा रहे मुकदमों पर सरकार को घेरा। समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने वेल में आकर जमकर नारेबाजी की। सदस्य हाथ में सरकार विरोधी नारे लिखे हुए पोस्टर लिये हुए थे।

उच्च सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सपा सदस्य नरेश चन्द्र उत्तम ने अपने स्थान से खड़े होकर प्रदेश की ध्वस्त कानून-व्यवस्था की ओर सभापति रमेश यादव का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि सोनभद्र में सामूहिक नरसंहार हो रहा है। पुलिस के सिपाहियों की हत्याएं हो रही हैं। सरकार कानून व्यवस्था सही नहीं रख पा रही है। जनता त्राहि-त्राहि कर रही है। सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां समेत सपा कार्यकर्ताओं के ऊपर फर्जी मुकदमें दर्ज किये जा रहे हैं। हर मोर्चे पर सरकार विफल है। इसलिए सरकार इस्तीफा दे।

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इसके तुरन्त बाद सपा के सदस्य हाथों में नारे लिखी तख्तियां लेकर वेल में आ गये और सरकार विरोधी नारेबाज़ी करने लगे। सभापति ने सदस्यों से अपने-अपने स्थान पर जाने का अनुरोध किया पर उत्तेजित सदस्य वेल में ही नारेबाजी करते रहे। जिस पर सदन को अव्यवस्थित देख सभापति ने सदन की कार्यवाही को आधे घण्टे के लिए स्थगित कर दिया। इसके बाद सदन की कार्यवाही के स्थगन का समय बारह बजे तक के लिए बढ़ा दिया गया।

बारह बजे सदन की कार्यवाही फिर से शुरू होने पर सपा सदस्यों ने फिर से हंगामा शुरू कर दिया। सभापति ने उनसे शांत होने का अनुरोध किया और कार्य मंत्रणा समिति की सिफारिशों को सदन के पटल पर रखा। जिसके अनुसार कल 19 जुलाई विधायी कार्य हो तो किया जायेगा। 20 जुलाई और 21 जुलाई को बैठक नहीं होगी। 22 जुलाई सोमवार को विधायी कार्य। 23 जुलाई को वित्तीय वर्ष 2019-2020 के अनुपूरक अनुदानों की मांगों को पेश किया जायेगा और विधायी कार्य व वित्तीय वर्ष 2019-20 के अनुपूरक अनुदानों की मांगों पर चर्चा होगी।

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24 जुलाई को विधायी कार्य व अनुपूरक अनुदानों पर चर्चा होगी। 25 जुलाई को वित्तीय वर्ष 2019-20 के अनुपूरक अनुदानों पर चर्चा तथा तत्संबंधी विनियोग विधेयक जैसा विधानसभा में पारित होगा, उस विचार कर उसे पारित किया जायेगा। 26 जुलाई को विधायी कार्य होगा।

इसके बाद सभापति ने उच्च सदन के छह पूर्व सदस्यों, देवी दयाल शास़्त्री, तनवीर हैदर उस्मानी, मधुवन सिंह, हर प्रसाद तिवारी अनवार अहमद और वाईडीसिंह के निधन का शोक प्रस्ताव रखा। सदन ने अपने पूर्व सदस्यों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

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शोक प्रस्ताव के बाद सपा सदस्य फिर से वेल में आ गये और नारेबाजी करने लगे। जबकि बसपा और कांग्रेस के सदस्य अपने-अपने स्थान पर खड़े होकर कानून व्यवस्था के मुद्दे पर नारेबाजी में सपा का साथ दे रहे थे। इसी शोर-शराबे और हंगामे के बीच प्रमुख सचिव डा. राजेश सिंह ने उत्तर प्रदेश विनियोग विधेयक-2019 के वर्ष 2019 में, राज्यपाल और दण्ड प्रक्रिया संहिता उत्तर प्रदेश संशोधन विधेयक 2018 के राष्ट्रपति की अनुमति के बाद तीसरा व चैथा अधिनियम बनने की घोषणा की।

सभापति ने वेल में हंगामा कर रहे सपा सदस्यों से कहा कि सदन चलने दें, आप अपने मुद्दे पर अपनी बात रखें जिस पर सदस्य शांत नहीं हुए उनका कहना था कि सदन की कार्यवाही रोककर उनके मुद्दों को सुना जाये। इसी हंगामे और नारेबाज़ी के बीच ही सदन का काम निपटाया गया और सभापति ने सदन की कार्यवाही को शुक्रवार 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

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