शिवपाल का बड़ा बयानः कृष्ण पर बांटने की साजिश,रहें अलर्ट, फूंका परिवर्तन का बिगुल

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी की राज्य कार्यकारिणी में पेश राजनैतिक प्रस्ताव में पार्टी ने राजनैतिक विकल्प के लिए किसी भी अन्य दल से किसी भी प्रकार के गठबंधन के लिए सभी प्रकार के निर्णय लेने के लिए शिवपाल यादव को अधिकृत किया गया राजनैतिक प्रस्ताव में कहा गया

Published by Roshni Khan Published: October 7, 2020 | 6:20 pm
Modified: October 7, 2020 | 8:16 pm
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शिवपाल सिंह यादव का बड़ा बयानः कृष्ण के नाम पर बांटने की साजिश, फूंका बिगुल (social media)

लखनऊ: प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने कहा है कि कुछ लोग भगवान कृष्ण के नाम पर विभाजन का राग छेड़ने का षडयंत्र कर रहे हैं। कृष्ण के नाम पर नफरत की सियासत की इजाजत किसी को नहीं। कृष्ण जितने ‘मीरा’ व ‘सूर’ के हैं, उतने ही ‘रसखान’ के भी हैं। इसके साथ ही पार्टी ने अपने मुखिया शिवपाल सिंह यादव के गैर भाजपावाद के विचार का समर्थन करते हुए कहा है ये विचार महान विचारक डॉ. लोहिया के तत्कालीन गैर कांग्रेसवाद की भांति परिवर्तनगामी इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बनेगा।

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शिवपाल यादव को अधिकृत किया गया राजनैतिक प्रस्ताव में कहा

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी की राज्य कार्यकारिणी में पेश राजनैतिक प्रस्ताव में पार्टी ने राजनैतिक विकल्प के लिए किसी भी अन्य दल से किसी भी प्रकार के गठबंधन के लिए सभी प्रकार के निर्णय लेने के लिए शिवपाल यादव को अधिकृत किया गया राजनैतिक प्रस्ताव में कहा गया कि वर्तमान समय में देश व प्रदेश पर काबिज भाजपा सरकार राष्ट्रवाद, समाजवाद, स्वदेशी, लोकतंत्र जैसी महान अवधारणाओं की वाचिक दुहाई दोहराती है लेकिन काम ठीक उलटा करती है।

कथनी-करनी में अंतर और भाजपा द्वारा फैलाए गए झूठ व भ्रम के विरुद्ध जन-जागरण समय की मांग है

भाजपा की कथनी-करनी में अंतर और भाजपा द्वारा फैलाए गए झूठ व भ्रम के विरुद्ध जन-जागरण समय की मांग है। कार्यसमिति में मांग की गई कि जस्टिस सच्चर कमेटी व रंगनाथ मिश्र कमेटी की संस्तुतियों को तत्काल लागू किया जाए। इसके साथ ही कार्यसमिति में बहुआयामी व बहुस्तरीय भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए के संथानम समिति की सिफारिशों को भी समसामयिक प्रारूप देते हुए लागू करने की बात कही गई।

भ्रष्टाचार पर योगी सरकार की पोल पूर्णतया खुल चुकी है

प्रसपा प्रदेश कार्यसमिति में कहा गया कि भ्रष्टाचार पर योगी सरकार की पोल पूर्णतया खुल चुकी है। जनमानस में व्याप्त आक्रोश को भटकाने के लिए वर्तमान सरकार अमूर्त, भावनात्मक तथा सांकेतिक मुद्दों को यदा-कदा उछालती रहती है। कभी राष्ट्रवाद की ओट में विभेदनकारी साम्प्रदायिकता की विष-बेल खिलाती है तो कभी युद्ध का काल्पनिक उन्माद पैदा करती है।

कार्यसमिति में ऐसी संकीर्ण, संकुचित व विभाजनकारी सोच की भत्र्सना की गई तथा सरकार द्वारा धरना, प्रदर्शन, सत्याग्रह के संविधानप्रदत्त मूलभूत लोकतांत्रिक नागरिक अधिकारों का पुलिस बल के दुरुपयोग से बर्बरतापूर्वक दमन किए जाने तथा हाथरस में हुई घटना की घोर भत्र्सना करते हुए पीड़ितों के परिजनों के प्रति सांत्वना प्रकट की गई है। हाथरस में मीडियाकर्मियों व प्रतिपक्ष के सम्मानित नेताओं को अपमानकारी तौर-तरीके से रोका जाने को दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए प्रसपा कार्यसमिति ने मांग की है कि ऐसे प्रावधान सुनिश्चित किए जाए जिससे ऐसी निन्दनीय व अवांछनीय घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

प्रसपा की प्रदेश कार्यकारिणी ने नौकरियों के संविदाकरण कर सख्त विरोध करते हुए कहा

प्रसपा की प्रदेश कार्यकारिणी ने नौकरियों के संविदाकरण कर सख्त विरोध करते हुए कहा है कि सरकार ने प्रसपा की मांग पर संविदाकर्मियों को स्थाई सेवा प्रदान करने की घोषणा की थी लेकिन अब स्थाई सेवाओं को भी संविदा पर आधारित किया जा रहा है। प्रतिभाओं को योग्यतानुसार काम और काम के अनुरूप वेतन-भत्ता प्रदान करना लोककल्याणकारी शासन प्रणाली का कर्तव्य है। यह सरकार अधिकारों का अधिकतम भोग करते हुए कर्तव्यों का न्यूनतम निर्वाह कर रही है।

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krishna-tempel-mathura (social media)

पार्टी की प्रांतीय कार्यसमिति ने ”हर घर में एक रोजगार” और समान शिक्षा नीति की संस्तुति की है

पार्टी की प्रांतीय कार्यसमिति ने ”हर घर में एक रोजगार” और समान शिक्षा नीति की संस्तुति की है। सबको गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार तथा पुरानी पेंशन मिलनी चाहिए। कार्यसमिति ने यूपी सरकार पर नौकरशाही के हावी होने का आरोप लगाते हुए कहा है कि यूपी में शासन तंत्र पूरी तरह से जड़ नौकरशाही के हवाले है। धीरे-धीरे लोकशाही को पंगु बनाया जा रहा है। अपवादस्वरूप एक-दो मंत्री को छोड़कर किसी भी सांसद, विधायक से लेकर जिला पंचायत सदस्य व प्रधान तक को नौकरशाही व दरोगा तंत्र जब चाहे तब अपमानित कर देता है। यही कारण है कि यूपी सुशासन की दृष्टि से बड़े 18 प्रातों में 17वें स्थान पर है।

कार्यसमिति में कहा गया कि जब स्वयं प्रधानमंत्री ने स्वीकारा है

प्रांतीय कार्यसमिति में वैश्विक महामारी कोरोना का भी जिक्र करते हुए कोरोना काल में सरकार द्वारा किए गए राहत कार्यों व स्वास्थ्य सेवाओं से पूर्णतया असंतुष्ट जताई गई है। पार्टी ने पीपीई किट व ऑक्सीमीटर की खरीद-फरोख्त में हुये प्रदेशव्यापी घोटाले को ‘अपराध’ ही नहीं ‘पाप’ की संज्ञा देते हुए सरकार के संवेदनहीन रवैये की कटु आलोचना की है। कार्यसमिति में कहा गया कि जब स्वयं प्रधानमंत्री ने स्वीकारा है कि विषम कोरोना काल में लघु व मंझोले व्यवसायी ही जनता के काम आए तथा भुखमरी से बचाया और बड़े वैदेशिक व्यापारिक घरानों के सम्बन्धित प्रतिष्ठान मूकदर्शक बने रहे। लेकिन अब ऐसी आर्थिक नीतियां क्यों बनाई जा रही हैं जो लघु व मंझोले व्यवसायियों के खिलाफ और शोषक पूंजीशाही की पक्षधर है।

केन्द्र सरकार सामरिक मोर्चे पर पूरी तरह विफल रही है

कार्यसमिति में कहा गया कि भाजपा सरकार खुदरा बाजार व रक्षा मामलों में भी विदेशी निवेश की अनुमति देकर देश की सुरक्षा तथा श्रमोन्मुखी अर्थतंत्र की स्वावलम्बिता पर कुठाराघात किया है। केन्द्र सरकार सामरिक मोर्चे पर पूरी तरह विफल रही है। दो कार्यकालों में चीन-पाकिस्तान से दो गज जमीन भी वापस लेना तो दूर मोदी सरकार नेपाल तक से अपनी भूमि नहीं बचा सकी। विदेशी कसौटियों पर वर्तमान भाजपा सरकार अब तक की सबसे कमजोर सरकार सिद्ध हुई है।

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कार्यसमिति में हिन्दी के प्रश्न पर कार्यसमिति भारत सरकार से श्वेत-पत्र जारी करने की मांग करते हुए कहा गया कि देश का सर्वतोन्मुखी विकास देशी पूंजी, देशी तकनीकी व देशी भाषा में ही सम्भव है। हिन्दी हमारी राष्ट्रीय सांस्कृतिक अस्मिता की प्रतीक है। दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी भाषा होने के बावजूद हिन्दी संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा के दर्जा से वंचित है। मोदी सरकार ने संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी को उसका अधिकार दिलाने के लिए कोई उल्लेखनीय कदम नहीं उठाया। इसके साथ ही कार्यसमिति ने लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा में अंग्रेजी की अनिवार्यता को अविलम्ब समाप्त करने की मांग की।

शिवपाल ने कहा कि प्रसपा का स्वतंत्र अस्तित्व बना रहेगा और पार्टी विलय जैसे एकाकी विचार को एक सिरे से खारिज करती है और अपने पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को यह विश्वास दिलाती है कि उनके सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

मनीष श्रीवास्तव

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