शिक्षक भर्ती घोटालाः फंसे थे ये सीएम, हुई थी दस साल की सजा

69000 शिक्षकों की भर्ती के इस मामले में समय समय पर जिस तरह से धांधली, गड़बड़ी व भ्रष्टाचार के मामले जिस तरह सामने आते रहे हैं उसे देखते हुए जरूरत इस मामले की सीबीआई जांच कराने की है। ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

Published by राम केवी Published: June 11, 2020 | 1:32 pm

रामकृष्ण वाजपेयी

69000 शिक्षकों की भर्ती में घोटाले का मामला इस समय चर्चा में है। अदालत की रोक के बाद अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मामले की जांच के आदेश दिये हैं। लेकिन आश्चर्य की बात ये है कि सरकार की नाक के नीचे इतना बड़ा घोटाला फलता फूलता रहा।

योग्य युवाओं को दरकिनार कर अयोग्य लोगों को सर्वोच्च अंकों से पास किया गया और संबंधित मंत्री की कोई जिम्मेदारी नहीं, वरिष्ठ अधिकारियों की कोई जिम्मेदारी नहीं सभी अफीम खाकर सोए हुए थे।

क्या देश में विधायिका की भूमिका समाप्त हो चुकी है। क्योंकि अगर हर काम हमें न्यायपालिका के कंधे पर सवार होकर ही करना है तो विधायिका क्या न्यायपालिका के फैसलों की धार को कुंद करने के लिए मात्र कानून बनाने की भूमिका में है।

तिस पर भी आज अयोग्य शिक्षक अभियान चला रहे हैं। उन्हें नौकरी चाहिए। चाहे योग्यता हो या न हो। आज हल्ला यही अयोग्य युवा मचा रहे हैं जिन्होंने इस भर्ती के लिए सारे जतन कर डाले थे।

एक घोटाला ये भी था

ये तो उत्तर प्रदेश का हाल मुझे याद रहा है बीस साल पुराना 1999-2000 का हरियाणा का शिक्षक भर्ती घोटाला उस समय भी ऐसे ही हल्ला मचा था। तीन हजार से अधिक शिक्षकों को भर्ती किया गया था। आरोप था कि इनमें से प्रत्येक से तीन से चार लाख रुपये लिए गए थे।

काफी हो हल्ले और बवाल के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी और सीबीआई की चार्जशीट में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला का नाम सामने आया था। चौटाला भर्ती के समय शिक्षा मंत्री थे।

उस समय भी हुआ था यही खेल

आरोप लगा था कि जिन लोगों ने पैसे दिये थे उन्हें इंटरव्यू में बीस में से 17 से 19 के बीच अंक दिये गए थे और जो लोग योग्यता के आधार पर चुने गए थे उन्हें तीन से पांच अंक दिये गए थे। इस बार तो लिखित परीक्षा में ही फर्जीवाड़ा हो गया है।

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उस समय भी यह घोटाला तब सामने आया था जब याची अदालत गए थे और इंटरव्यू की मूल सूची दिखाई थी। इस बार भी यही हुआ था। कोर्ट की रोक के बाद जांच शुरू हुई है।

ऐसे फंसे थे चौटाला

सीबीआई का कहना था कि हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने खुद तत्कालीन निदेशक प्राथमिक शिक्षा संजीव कुमार पर इंटरव्यू की फर्जी सूची बनाने का आदेश दिया था।

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इसके बाद दबाव झेलने में असफल रहे संजीव अदालत चले गए और मामले का भंडाफोड़ हो गया। संजीव के साथ वह लोग भी शामिल हो गए जिन्हें रिजेक्ट कर दिया गया था।

लंबे समय तक चला था मामला

यह मामला काफी लंबे तक समय तक चला और 2013 में जनवरी में चौटाला को दिल्ली की एक अदालत ने दोषी करार दिया। इस मामले में 62 लोग अभियुक्त बनाए गए थे। चौटाला और उनके बेटे को हुई थी दस दस साल की सजा।

जरूरत है सीबीआई जांच की

69000 शिक्षकों की भर्ती के इस मामले में समय समय पर जिस तरह से धांधली, गड़बड़ी व भ्रष्टाचार के मामले जिस तरह सामने आते रहे हैं उसे देखते हुए जरूरत इस मामले की सीबीआई जांच कराने की है। ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

 

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