देश विरोधी नारेबाजी पर शिक्षक अपनी शिक्षा का मूल्याकंन करें: सीएम योगी

जब भारत विरोधी नारे देश के संसाधनों पर पलने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में लगते हैं, तो हमें इस मूल्यांकन के लिए तैयार होना चाहिए कि हमारे पढ़ाए गए छात्रों में इस प्रकार की विकृति क्यों पैदा हुई।

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि जो विश्वविद्यालयों में अराजकता और भारत विरोधी नारे लगा रहे हैं, इस पाप का भागीदार कौन है। सरकार तो संसाधन दे सकती है, लेकिन जिसने उन्हें बेसिक शिक्षा दी है, जिसने उन्हें माध्यमिक शिक्षा दी है और जो उन्हें वहां तक ले कर गया है, उन सभी को अपने कार्यों का मूल्यांकन करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब भारत विरोधी नारे देश के संसाधनों पर पलने वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में लगते हैं, तो हमें इस मूल्यांकन के लिए तैयार होना चाहिए कि हमारे पढ़ाए गए छात्रों में इस प्रकार की विकृति क्यों पैदा हुई। जिस भारत की एकता और अखंडता की शपथ लेकर हम कार्य करते हैं आज उसी के विखंडन के नारे लगाए जा रहे हैं। ऐसी दशा में उन शिक्षकों पर प्रश्न खड़े होने लगते हैं, जिन्हें समाज में ईश्वर के समान माना जाता है।

मुख्यमंत्री ने किया दो दिवसीय राष्ट्रीय सीएसआर कान्क्लेव का उद्घाटन

बुधवार को लखनऊ में शुरू हुए दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार मिशन प्रेरणा तथा सीएसआर कॉन्क्लेव का मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन किया और साथ ही बुनियादी शिक्षा में सुधार व समग्र विकास तथा ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ से संबंधित जानकारियों के प्रचार-प्रसार के लिए एलईडी वैन को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया।

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इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में हमारी सरकार ने जो भी बेसिक शिक्षा के लिए किया है उसका निचोड़ इस सेमिनार के माध्यम से सामने आ रहा है। प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद से जुड़े एक लाख 58 हजार विद्यालयों के बुनियादी विकास की दृष्टि से आपरेशन कायाकल्प योजना को शुरू की गई थी। आपरेशन कायाकल्प योजना के तहत पिछले तीन वर्ष के दौरान सरकार अब तक 92 हजार विद्यालयों को सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा चुके हैं, जिनका बहुत पहले ध्यान दिया जाना चाहिए था।

सामाजिक विषमता को दूर करने के लिए एक सामान पाठ्यक्रम

मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक विषमता को यदि दूर करना है तो एक समान पाठ्यक्रम होना आवश्यक है। शिक्षा के क्षेत्र में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। सभी को समान अवसर मिलना चाहिए। समान पाठ्यक्रम लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए ही प्रदेश में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रॉक्सी शिक्षक व्यवस्था खत्म होगी तब शिक्षा व्यवस्था सुधरने लगेगी। जब शिक्षक स्कूल जाने लगेगा और बच्चों को पढ़ाने लगेगा तो बच्चा अपने आप ही तैयार हो जाएगा, लेकिन शिक्षक ही स्कूल नहीं जाएगा तो शिक्षा व्यवस्था कैसे सुधरेगी। एक शिक्षक को सर्वज्ञ होना चाहिए। हमारी वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए शिक्षकों की ऐसी श्रृंखला होनी चाहिए, जिससे वे अपने सामने आने वाली चुनौतियों से भागने की बजाए उनसे जूझने के लिए तैयार हो सकें।

मुख्यमंत्रीयोगी आदित्यनाथ ने शिक्षकों को आईना दिखाया तो उन्हें समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित भी किया। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक सरकारी नौकर नहीं हो सकता है। वह राष्ट्र का भाग्य विधाता होता है लेकिन जब वह कहता है कि वह पढ़ाने के अलावा और कोई दूसरे काम नहीं करेगा तो दुख होता है। राष्ट्रीय महत्व के कार्य जनगणना में शिक्षकों को जाना चाहिए इससे उनका लोगों के बीच संवाद बढ़ेगा वह लोगों को जान सकेंगे और शिक्षक के प्रति जो समाज में भ्रांति बनी हुई है वह भी खत्म होगी।

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चाणक्य ने भारत विश्व की एक महाशक्ति के रूप में स्थापित किया

उन्होंने कहा कि एक शिक्षक को अपने आगे आचार्य चाणक्य का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अपने आप को तैयार करना चाहिए। आचार्य चाणक्य ने भारत को तत्कालीन विश्व की एक महाशक्ति के रूप में स्थापित किया। देश को स्वर्णयुग में पहुंचाने वाले आचार्य चाणक्य का भाव एक शिक्षक का आदर्श होना चाहिए। समाज की चुनौतियों और आवश्यकताओं के प्रति अगर हम खड़े नहीं हो सकते तो हम अपने प्रति, अपने पेशे के प्रति, वर्तमान और भावी पीढ़ियों के प्रति भी अन्याय कर रहे होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी कोशिश होगी कि शिक्षक भर्ती भी नियमित तौर पर होती रहे जिससे शिक्षकों की कमी ना हो। इस मौके पर उन्होंने अदालती व्यवस्था पर भी तंज किया और कहा कि शिक्षकों की 69 हजार भर्ती अदालत में अटकी हुई है। तारीख पर तारीख मिल रही है। अदालत से अगर समय से फैसला मिल गया होता तो अब तक शिक्षकों की भर्ती पूरी हो चुकी होती।

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वाराणसी के विधान परिषद सदस्य अशोक धवन की हुई तारीफ

मुख्यमंत्री ने प्राथमिक विद्यालयों में ढ़ांचागत सुधार पर जोर देते हुए कहा कि सांसद रहते हुए उन्होंने अपने क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालयों में फर्नीचर उपलब्ध कराने के लिए सांसद निधि का प्रयोग किया। उन्होंने वाराणसी के विधान परिषद सदस्य अशोक धवन की तारीफ करते हुए कहा कि अशोक धवन ने अपने दो करोड़ की विधायक निधि प्राथमिक विद्यालयों के लिए देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य जनप्रतिनिधियों को भी इसी तरह के फैसले करने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने अपने विशेष सचिव नीतीश कुमार की भी तारीफ की और बताया कि उन्होंने बरेली में डीएम रहते हुए प्राथमिक विद्यालयों के ढांचागत सुविधाओं के विकास के लिए अपने स्तर से प्रयास किए थे और उन्हीं के अनुभवों से प्रदेश सरकार ने बेसिक शिक्षा में कायाकल्प योजना का शुभारंभ किया है।

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