आईटीआई छात्रों के परीक्षा में शामिल होने के मामले में हाईकोर्ट ने दिया ये आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्राइवेट आईटीआई संस्थानों के छात्रों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा है कि 5 अक्टूबर 18 से पहले प्रवेश ले चुके सभी छात्रों को 22 जुलाई से होने वाली परीक्षा में बैठने दिया जाय।

Published by Aditya Mishra Published: July 13, 2019 | 5:37 pm
Modified: July 13, 2019 | 5:38 pm

  

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्राइवेट आईटीआई संस्थानों के छात्रों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा है कि 5 अक्टूबर 18 से पहले प्रवेश ले चुके सभी छात्रों को 22 जुलाई से होने वाली परीक्षा में बैठने दिया जाय।

यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने डॉ वीरेंद्र स्वरूप प्राइवेट आईं टी आई सहित कई अन्य याचिकाओं को निस्तारित करते हुए दिया है।

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एनसीवीटी के पोर्टल पर नहीं लोड हो पाया ब्योरा

एनसीवीटी के पोर्टल पर व्योरा अपलोड न होने के कारण छात्रों को हाल टिकट (प्रवेश पत्र )जारी नहीं हो सका। जिससे वे परीक्षा में शामिल नही हो पा रहे थे।

कोर्ट ने आईटीआई छात्रों को परीक्षा में बैठने की छूट देते हुए कहा है कि 22 जुलाई के बाद छात्रों का व्योरा अपलोड किया जाय। बायोमेट्रिक उपस्थिति को इस सत्र में अनिवार्य रूप से लागू करने को शिथिल करते हुए कोर्ट ने कहा है कि इसे भविष्य में सत्र की शुरुआत से ही लागू किया जाय।

कोर्ट के इस आदेश से संस्थानों की लापरवाही के कारण परीक्षा में बैठने से बंचित हो रहे हजारो छात्रों को बड़ी राहत मिली है।

आईटीआई संस्थानों ने छात्रों के प्रवेश कर उनका व्योरा समय से एनसीवीटी के पोर्टल पर अपलोड नहीं किया था। जिसके चलते उन्हें हाल टिकट जारी नही हो पा रहा था। नियमानुसार एनसीवीटी के एमआईएस पोर्टल पर व्योरा अपलोड होने पर ही हाल टिकट जारी किया जा सकता है।

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29 मार्च 19 तक दर्ज करना ब्योरा

संस्थान एस सीवीटी के पोर्टल पर व्योरा अपलोड करते है और एससीवीटी उसका सत्यापन व् अनुमोदन कर एनसीवीटी के पोर्टल पर अपलोड करती है। कालेजों ने एससीवीटी को तमाम छात्रों का ब्योरा दिया ही नहीं।

जिससे अपलोड छात्रों को ही परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गयी थी ।केंद्रीय संस्थान राज्य संस्था को 29 मार्च 19 तक व्योरा अपलोड करने का निर्देश दिया था।

किंतु संस्थानों से ब्योरा न मिल पाने के कारण भेजा नही जा सकी संस्थानों व छात्रों ने हाई कोर्ट की शरण ली थी।याचिकाओं पर वरिष्ठ अधिवक्ता ओ पी सिंह,आर सी सिंह,संजीव सिंह,शिव सागर सिंह ,एस सी वी टी के अधिवक्ता पंकज पटेल व् भारत सरकार के अधिवक्ता कृष्ण जी शुक्ल,बृजेश श्रीवास्तव,दीपमाला श्रीवास्तव,अन्य ने पक्ष रखा।

केंद्र सरकार का स्पष्ट मत था कि 5 अक्टूबर 18 तक ही प्रवेश की अनुमति दी गयी थी।एस सी वी टी के पोर्टल पर पंजीकृत छात्रों का ही प्रवेश संस्थानों में किया जाना था और प्रवेश का व्योरा राज्य पोर्टल के माध्यम से केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड करना था।

एनसीवीटी ने कई मौके दिए किन्तु व्योरा नही दिया गया।जिन छात्रों का व्योरा अपलोड नहीं हो सका था। उन्हें प्रवेश पत्र जारी नहीं किया गया था। अब 5 अक्टूबर 18 तक प्रवेश ले चुके सभी छात्रों को 22 जुलाई से शुरू होने वाली परीक्षा में एससीवीटी के अधिकारियो ने सहमति दे दी है।

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