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खून की कमी को दूर करने रक्तदानी बने बेसिक शिक्षा विभाग के ये शिक्षक

वैश्विक महामारी की चपेट में यूपी का कन्नौज जिला भी है। इन दिनों जिला अस्पताल खून की कमी से जूझ रहा है। इस कमी को दूर करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े टीचरों ने मुहिम शुरू कर दी है।

Vidushi Mishra
Updated on: 30 April 2020 1:20 PM GMT
खून की कमी को दूर करने रक्तदानी बने बेसिक शिक्षा विभाग के ये शिक्षक
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कन्नौज। वैश्विक महामारी की चपेट में यूपी का कन्नौज जिला भी है। इन दिनों जिला अस्पताल खून की कमी से जूझ रहा है। इस कमी को दूर करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े टीचरों ने मुहिम शुरू कर दी है। एक ही दिन चार शिक्षकों ने पहुंचकर ब्लड देकर रक्तदानी बने।

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रक्तदान करने पहुंच गए

दरअसल, न्यूज ट्रैक ने ‘कोरोना की वजह से अस्पतालों में खून की कमी, बिना इलाज के वापस लौट रहे लोग’ शीर्षक से खबर पब्लिश की।

जब गुरुवार को इस बात की जानकारी यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन को हुई तो जिला संरक्षक/कन्नौज सदर ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक स्कूल गागेमऊ द्वितीय विवेक सिंह, जिला उपाध्यक्ष/ब्लॉक छिबरामऊ क्षेत्र के प्राथमिक स्कूल नगला तिजू के हेड शिक्षक शैलेंद्र दुबे, जिला कोषाध्यक्ष/प्राथमिक स्कूल मिघौली के शिक्षक विक्रम सिंह तोमर व जिला महामंत्री/सदर कन्नौज ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक स्कूल टिडियापुर के शिक्षक पंकज सिंह भदौरिया ने जिला अस्पताल पहुंचकर रक्तदान करने पहुंच गए।

सीएमएस डॉ. यूसी चतुर्वेदी व डॉ. विभांशू चतुर्वेदी की देखरेख में ब्लड बैंक की टीम ने डोनेट प्रक्रिया पूरी की। प्राथमिक स्कूल टिडियापुर पंकज सिंह भदौरिया ने बताया कि अपना देश इस समय कोरोना की वैश्विक महामारी से जूझ रहा है, इसलिए जिला अस्पताल में खून की कमी को दूर करने के लिए चले आए।

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जिले में खून की कमी

तिर्वा स्थित डीएन इंटर कॉलेज से अवकाश प्राप्त शिक्षक हरिबक्स सिंह ने भी रक्तदान करने को कहा। गागेमऊ स्कूल के शिक्षक विवेक सिंह ने बताया कि न्यूज ट्रैक में खबर पढ़ी थी कि यूपी के कन्नौज यानि हमारे जिले में खून की कमी हो गई है।

निगेटिव ग्रुप का तो खून है ही नहीं। खबर में 300 यूनिट की क्षमता वाले जिला अस्पताल में 11 यूनिट ही खून होने का जिक्र था, इस वजह से वह चार साथियों के साथ खून देने आए।

उन्होंने बताया कि चारो शिक्षक कन्नौज के अलग-अलग क्षेत्रों से आए हैं, जिन्होंने कोरोना वायरस के संक्रमण की भी परवाह नहीं की।

शिक्षक शैलेंद्र दुबे का कहना है कि मुसीबत के दौर में लोगों की जान बचाना पहली प्राथमिकता है, इसलिए रक्तदान किया है। एक दिन पहले ही अंधामोड़ निकट सरायमीरा निवासी अर्चना मिश्रा ने भी अपना ब्लड डोनेट किया था।

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रिपोर्ट- अजय मिश्रा

Vidushi Mishra

Vidushi Mishra

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