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वाराणसी के इस परिवार के लिए 'संकट मोचन' बनी थीं सुषमा स्वराज

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का पार्थिव शरीर बुधवार की शाम पंचतत्व में विलीन हो गया। पूरे देश ने नम आंखों के साथ अपनी नेता को अंतिम विदाई दी। सुषमा स्वराज सिर्फ एक नेता या मंत्री नहीं थी बल्कि मानवीय मूल्यों के प्रति उन्होंने जो समर्पण दिखाया, उसे हर कोई याद कर रहा है।

Dharmendra kumar

Dharmendra kumarBy Dharmendra kumar

Published on 7 Aug 2019 11:26 AM GMT

वाराणसी के इस परिवार के लिए संकट मोचन बनी थीं सुषमा स्वराज
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वाराणसी: पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का पार्थिव शरीर बुधवार की शाम पंचतत्व में विलीन हो गया। पूरे देश ने नम आंखों के साथ अपनी नेता को अंतिम विदाई दी। सुषमा स्वराज सिर्फ एक नेता या मंत्री नहीं थी बल्कि मानवीय मूल्यों के प्रति उन्होंने जो समर्पण दिखाया, उसे हर कोई याद कर रहा है। वाराणसी का रहने वाला भारद्वाज परिवार भी उन्हीं लोगों में से एक है। तीन साल पहले भारद्वाज परिवार के लिए संकट मोचन बनकर आई थीं सुषमा स्वराज।

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नाइजीरिया में समुद्री डकैतों से बचाया था

उस वाक्ये को याद कर संतोष भारद्वाज और उनका परिवार खौफ से भर उठता है। मर्चेंट नेवी में इंजीनियर की पोस्ट पर काम करने वाल संतोष बताते हैं कि मार्च 2016 में नौकरी के दौरान समुद्री डकैतों ने नाइजीरिया में उनका अपहरण कर लिया था। इस घटना के बाद उनकी पत्नी कंचन ने तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्वीट किया। बताते हैं कि इसके पांच मिनट बाद ही सुषमा स्वराज का मैसेज आया और उन्होंने पूरी मदद का भरोसा दिलाया। विदेश मंत्रालय की सक्रियता की वजह से लगभग 45 दिन की मशक्कत के बाद संतोष समुद्री डकैतों के चंगुल से छूटे।

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सुषमा को याद कर फफक पड़ा परिवार

इस बीच मंगलवार की रात सुषमा स्वराज के निधन की खबर के बाद भारद्वाज परिवार को विश्वास नहीं हुआ। बातचीत के दौरान उनकी आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि खबर की पुष्टि के लिए मैं बार-बार चैनल बदल रहा था। उन्होंने कहा कि अगर मैं जिंदा हूं तो सिर्फ सुषमा जी की वजह से। उनका इस तरह दुनिया से चले जाना हमारे परिवार के लिए बहुत दुखदायी है।

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