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विकास दुबे एनकाउंटरः जांच समिति में शामिल करें शीर्ष कोर्ट का रिटा. जज

इससे पहले बीती 17 जुलाई को उत्तर प्रदेश पुलिस ने विकास दुबे और उसके सहयोगियों के मुठभेड़ में मारे जाने की घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग वाली दो याचिकाओं पर शीर्ष कोर्ट के समक्ष विस्तृत जवाब पेश किया था। पुलिस

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NewstrackBy Newstrack

Published on 20 July 2020 9:12 AM GMT

विकास दुबे एनकाउंटरः  जांच समिति में शामिल करें शीर्ष कोर्ट का रिटा. जज
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लखनऊ। कानपुर मुठभेड़ कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे एनकाउंटर मामलें की जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने जांच समिति का हिस्सा बनने के लिए शीर्ष अदालत के किसी न्यायाधीश को नहीं देने से इंकार करते हुए कहा है कि यूपी सरकार जांच समिति में शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश और एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी को जोड़ने पर विचार करें।

सोमवार को इस मामलें में सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा कि आपको एक राज्य के रूप में कानून का शासन बरकरार रखना होगा। ऐसा करना आपका कर्तव्य है। विकास दुबे की मुठभेड़ की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर घनश्याम उपाध्याय और अनूप प्रकाश अवस्थी द्वारा दायर दो याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली पीठ, सुनवाई कर रही है।

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मुठभेड़ सही थी

इससे पहले बीती 17 जुलाई को उत्तर प्रदेश पुलिस ने विकास दुबे और उसके सहयोगियों के मुठभेड़ में मारे जाने की घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग वाली दो याचिकाओं पर शीर्ष कोर्ट के समक्ष विस्तृत जवाब पेश किया था। पुलिस ने कोर्ट के समक्ष कहा था कि कानपुर में आठ पुलिसवालों की हत्या के मुख्य आरोपी हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की मुठभेड़ को फर्जी नहीं कहा जा सकता है। पुलिस ने अपने हलफनामे में कहा कि मुठभेड़ सही थी। इसे किसी भी तरह से फर्जी नहीं कहा जा सकता।

सर्वोच्च न्यायालय में यूपी पुलिस के जवाब के बाद दो याचिकाकर्ताओं में से एक अनूप प्रकाश अवस्थी ने उत्तर प्रदेश सरकार के हलफनामे का जवाब देते हुए जवाबी हलफनामा दाखिल किया था। अनूप प्रकाश अवस्थी ने अपने हलफनामे में यूपी सरकार द्वारा गठित एकल सदस्यीय आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद मनमाना आदेश देने के बाद जस्टिस अग्रवाल को न्यायामूर्ति पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

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आयोग की मंजूरी विधानमंडल से नहीं ली गई

उन्होंने यह भी कहा है कि आयोग की मंजूरी विधानमंडल से नहीं ली गई, न ही राज्यपाल ने इस संबंध में अध्यादेश जारी किया है। उन्होंने जांच के लिए गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) टीम को लेकर भी सवाल उठाए हैं। याचिकाकर्ता ने अपने हलफनामे में यह भी कहा है कि एसआईटी का गठन करते हुए जिन अधिकारियों को शामिल किया गया है, उनमें से एक अधिकारी पर फर्जी एनकाउंटर मामले में चार्जशीट दाखिल है।

उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया था

बता दे कि दुर्दांत विकास दुबे कानपुर के चैबेपुर इलाके के बिकरू गांव में हुई मुठभेड़ में मुख्य आरोपी था। विकास दुबे और उसके साथियों ने दो जुलाई की रात पुलिस दल पर गोलियां चलाकर और धारदार हथियारों से हमला कर सीओ समेत आठ पुलिस वालों की हत्या कर दी थी। विकास दुबे को मध्य प्रदेश पुलिस ने नौ जुलाई को उज्जैन के महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया था। उत्तर प्रदेश पुलिस के हवाले किए जाने के बाद 10 जुलाई को कानपुर आते समय उसने कथित तौर पर भागने का प्रयास किया, जिस पर पुलिस ने उसे मार गिराया था।

रिपोर्ट- मनीष श्रीवास्तव, लखनऊ

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