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पुलिस की मिलीभगत: विकास का तगड़ा कनेक्शन, सरेआम हत्या में नहीं दी गवाही

यूपी के कानपुर में पुलिस हत्या कांड में माफिया विकास दुबे अभी भी फरार चल रहा है। साथ ही उसके बारे में कोई सुराग तक हाथ नहीं लग पा रहा है।

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Updated on: 5 July 2020 5:44 AM GMT
पुलिस की मिलीभगत: विकास का तगड़ा कनेक्शन, सरेआम हत्या में नहीं दी गवाही
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लखनऊ : यूपी के कानपुर में पुलिस हत्या कांड में माफिया विकास दुबे अभी भी फरार चल रहा है। साथ ही उसके बारे में कोई सुराग तक हाथ नहीं लग पा रहा है। हालांकि विकास को पकड़ने के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है, और ताबड़तोड़ एक्शन ले रही है। 8 पुलिस वालों की हत्या के दोषी विकास दुबे पर कानपुर प्रशासन ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई की। प्रशासन ने विकास दुबे के बिठूर स्थित आवास को गिराने का फैसला किया।

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सारे बैंक अकांउट सीज

जिसके चलते घर गिराने के लिए विकास दुबे की उसी जेसीबी का इस्तेमाल किया गया है, जिसके जरिये उसने पुलिस टीम को घेरा गया था। इसके साथ विकास के सारे बैंक अकांउट सीज करने भी तैयारी चल रही है।

ऐसे में अब ये भी कहा जा रहा है कि अगर कानपुर के शिवली थाने के 19 पुलिसकर्मियों ने विकास दुबे के खिलाफ गवाही दी होती, तो आज वह इतना बड़ा गैंगस्टर नहीं होता।

संतोष शुक्ला की हत्या

2001 की बात है जब कानपुर के शिवली थाने में बीजेपी के दर्जा प्राप्त मंत्री संतोष शुक्ला की हत्या विकास दुबे ने दिनदहाड़े की थी। लेकिन इस हत्या के गवाह थाने में मौजूद तब के 19 पुलिस वाले इससे मुकर गए थे।

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पुलिस भी मिली थी

इसके बाद वर्ष 2006 में मामले की गवाही खत्म होते ही विकास दुबे बरी आजाद हो गया था। विकास दुबे के खिलाफ तब मृतक संतोष शुक्ला के भाई मनोज शुक्ला ने एफआईआर दर्ज कराई थी। लेकिन उस समय थाने में पांच सब इंस्पेक्टर और 20 पुलिसकर्मी मौजूद थे जिनमें से 19 लोग गवाह बनाए गए थे।

ये भी कहा जाता है कि अगर उस समय विकास दुबे की मदद निचले स्तर पर प्रशासनिक तंत्र ने न की होती, तो उसे अपने किए की सजा उसी समय मिल गई होती और पुलिस इतने बड़े हत्याकांड का शिकार होने से बच जाते। फिलहाल इस वारदात में पुलिस का विकास को समय-समय पर जानकारी देने का आरोपी बताया जा रहा हैै।

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