अयोध्या मामला: क्या आपको पता है पांच जजों में आखिर किसने लिखा फैसला

सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ ने अपने फैसले से आज सदियों पुराने विवाद का अंत कर दिया। लोगों के मन में सवाल होगा कि इस फैसले के लेखक ने किस तरह सदियों पुराने विवाद पर फैसले को 929 पन्नों के फैसले में उतारा। पीठ ने फैसला सर्वसम्मति से लिया है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ ने अपने फैसले से आज सदियों पुराने विवाद का अंत कर दिया। लोगों के मन में सवाल होगा कि इस फैसले के लेखक ने किस तरह सदियों पुराने विवाद पर फैसले को 929 पन्नों के फैसले में उतारा। पीठ ने फैसला सर्वसम्मति से लिया है।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में गठित पीठ में न्यायमूर्ति एसए बोबडे, डीवाई चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस. अब्दुल नजीर शामिल थे, लेकिन इन पांच जजों में वास्तविक रूप से वह कौन है जिसने फैसले को लिखा।

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अब आते हैं सामान्य परंपरा पर सुप्रीम कोर्ट की परंपरा इस मामले में क्या कहती है। अयोध्या मामले पर आज के फैसले में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किसने निर्णय को लिखा। तो जान लीजिए कि इस मामले में कानून कुछ नहीं कहता है कि किसी फैसले में फैसला लिखने वाले का नाम हो।

सुप्रीम कोर्ट नियमावली 2013 इस मामले में खामोश है।  फैसले को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सुनाया, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि निर्णय को अनिवार्य रूप से उन्होंने लिखा।  सुप्रीम कोर्ट रूल्स पर आर्डर 12 का नियम दो कहता है कि कोर्ट का एक सदस्य कोर्ट के दूसरे सदस्य द्वारा तैयार फैसले को पढ़ेगा।

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अब अगर कोई लेखन की शैली और निर्णय का प्रारूपण के आधार पर अनुमान लगाता है, तो यह न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ हो सकते हैं। वह सर्वोच्च न्यायालय के चुनिंदा न्यायाधीशों में से एक है जो अपने निर्णयों में सामग्री की तालिका जोड़ते हैं।

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अब आते हैं फैसले में शामिल 116 पन्नों के परिशिष्ट पर जिसका शीर्षक है कि क्या विवादित ढांचा हिंदुओं की आस्था, विश्वास और विश्वास के अनुसार भगवान राम का पवित्र जन्म स्थान है? इस दस्तावेज के लेखक के रूप में भी किसी का उल्लेख नहीं किया गया है। ये फैसला न्यायपालिका का है इसलिए भी हो सकता है किस जज ने क्या फैसला दिया इस में जज का नाम संभवतः इसलिए भी प्रकट न किया गया हो। अयोध्या मामला, आखिरकार, सबसे संवेदनशील मामला है जिसका सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला दिया है।