विश्व जनसंख्या दिवस: एक साल में इतने पुरुषों ने करायी नसबंदी

हेल्थ मैनेजमेंट इन्फोर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) के अनुसार प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 2018-2019 में केवल 380 पुरुषों ने ही नसबंदी करायी है। जबकि राष्ट्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4) के अनुसार यूपी में केवल दशमलव एक प्रतिशत पुरुष ही नसबंदी करवाते हैं।

मनीष श्रीवास्तव

लखनऊ: पूरे देश में बुधवार को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर यूपी के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने 11-24 जुलाई तक ‘‘जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा‘‘ मनाये जाने की घोषणा की तथा ’’परिवार नियोजन से निभाएं जिम्मेदारी, माॅ और बच्चे के स्वास्थ्य की पूरी तैयारी’ की थीम पर जनसंख्या स्थिरता के सम्बन्ध में जन जागरुकता बढ़ाने को कहा है।

लेकिन यह सरकारी कवायद केवल एक पखवाडे़ की ही है। आकंड़ों पर नजर डाले तो हकीकत इसके बिलकुल उलट है। आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश की राजधानी में ही पुरुषों ने परिवार नियोजन का पूरा जिम्मा महिलाओं पर छोड़ रखा है।

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केवल दशमलव एक प्रतिशत पुरुष ही नसबंदी करवाते हैं

हेल्थ मैनेजमेंट इन्फोर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) के अनुसार प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 2018-2019 में केवल 380 पुरुषों ने ही नसबंदी करायी है। जबकि राष्ट्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4) के अनुसार यूपी में केवल दशमलव एक प्रतिशत पुरुष ही नसबंदी करवाते हैं। एनएफएचएस-4 में प्रदेश सरकार को पुरुष नसबंदी से संबंधित भ्रांतियों को दूर करने की और जागरुकता फैलाने की सलाह भी दी गयी है।

एनएफएचएस-4 के आंकड़े बताते है कि लखनऊ जिले में 15-49 वर्ष तक की विवाहित महिलाओं में, 51.6 प्रतिशत महिलाएं परिवार नियोजन की किसी भी विधि का प्रयोग करती हैं, 39.1 फीसदी महिलाएं किसी आधुनिक विधि का प्रयोग करती हैं, महिला नसबंदी का प्रतिशत 17.3 है, 1.6 प्रतिशत महिलाएं आईयूडी या प्रसव के बाद आईयूडी (कोपर टी) व 2.8 प्रतिशत गर्भनिरोधक गोलियां व 16.9 प्रतिशत पुरुष कंडोम का प्रयोग करते हैं। पुरुष नसबंदी का प्रतिशत नगण्य है।

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महिलाएं नसबंदी का प्रतिशत 17.3 है

एनएफएचएस-4 के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 15-49 वर्ष तक की विवाहित महिलाओं में, 45.5प्रतिशत महिलाएं परिवार नियोजन की किसी भी विधि का प्रयोग करती हैं, 31.7 प्रतिशत महिलाएं किसी भी आधुनिक विधि का प्रयोग करती हैं। महिलाएं नसबंदी का प्रतिशत 17.3 है। 1.2 प्रतिशत महिलाएं आईयूडी या प्रसव के बाद आईयूडी (कोपर टी), 1.9 प्रतिशत गर्भनिरोधक गोलियां व 10.8प्रतिशत पुरुष कंडोम का प्रयोग करते हैं।

एनएफएचएस-4 के अनुसार उत्तर प्रदेश की कुल जन्म दर (एक महिला द्वारा उसके पूरे प्रजनन काल में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या) 2.7 है जबकि राष्ट्रीय स्तर पर कुल प्रजनन दर 2.2 है। जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार देश की जनसंख्या 121 करोड़ है और लगभग 20 करोड़ की आबादी के साथ उत्तर प्रदेश भारत का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है जो सम्पूर्ण जनसंख्या का 16.50 प्रतिशत है। यहां प्रतिदिन 15 हजार बच्चे जन्म लेते हैं।