कोरोना काल में 5जी की शामत !

कोरोना वायरस महामारी के बीच दूरसंचार की 5-जी टेक्नोलोजी की शामत आई हुई है। यूरोप, ब्रिटेन, अमेरिका आदि देशों में जहां 5-जी के ट्रायल चल रहे हैं वहाँ इस महामारी के लिए 5-जी को लोग दोषी तहरा रहे हैं और 5जी टावर्स आदि को जलाने की तमाम घटनाएँ हुईं हैं।

Published by suman Published: May 17, 2020 | 10:35 am

न्यूयॉर्क: कोरोना वायरस महामारी के बीच दूरसंचार की 5-जी टेक्नोलोजी की शामत आई हुई है। यूरोप, ब्रिटेन, अमेरिका आदि देशों में जहां 5-जी के ट्रायल चल रहे हैं वहाँ इस महामारी के लिए 5-जी को लोग दोषी तहरा रहे हैं और 5जी टावर्स आदि को जलाने की तमाम घटनाएँ हुईं हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया पर थ्योरी पेश की जा रहीं हैं कि 5जी रेडियेशन से लोगों की जाने जा रही हैं। लेकिन 5-जी आ चुका है और कोरोना का संकट बीतने के बाद इसका तेजी से विस्तार होने वाला है।

इंटरनेट पर कुछ ऐसी बातें प्रचारित की गईं कि चीन की हुवाई कंपनी 5-जी के टावरों से कोरोना वायरस को हाई फ्रीक्वेन्सी रेडियो तरंगों के जरिये फैला रही है। इस थ्योरी को हॉलीवुड के स्टार्स समेत कई लोगों ने आगे बढ़ाया और नतीजा आगजनी और तोडफोड के रूप में सामने आया है।

वैसे, षड्यंत्र और सेफ़्टी दोनों के ही कोई पुख्ता प्रमाण नहीं हैं। षड्यंत्र तो दूर की कौड़ी है लेकिन ये सच्चाई है कि सेल फोन रेडिएशन बहुत नुकसानदेह है। मिसाल के तौर पर 2018 में अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एनवायरनमेंटल हेल्थ सइन्सेज के तहत चल रहे नेशनल टोक्सिकोलोजी प्रोग्राम (एनटीपी)  की एक रिपोर्ट में इनसानों पर सेल फोन रेडिएशन के प्रभाव संबंधी अध्ययन की रिपोर्ट आई थी। इसमें बताया गया था कि सेल फोन, वाई-फ़ाई, सेल फोन टावर आदि से निकलने वाले रेडिएशन से कैंसर के अलावा हृदय और मस्तिष्क में क़ैसर उत्पन्न करने वाले घाव हो जाते हैं। ये अध्ययन प्रयोगशाला में चूहों पर किया गया था जिनको रोजाना 9 घंटे सेल फोन रेडिएशन के प्रति एक्सपोज़ करके रखा गया। रिसर्च में ये भी पाया गया कि चूहों के प्रोस्ट्रेट ग्रंथि में ट्यूमर, मस्तिष्क की कोशिकाओं के डीएनए में क्षति, हृदय की मांसपेशियों में बीमारी आदि भी हो जाती है। वैसे एनटीपी की रिपोर्ट कोई पहली ऐसी रिपोर्ट नहीं थी। इसके पहले तमाम अन्य रिसर्च में ऐसे ही नतीजे बताए जा चुके हैं। सभी में ईएमएफ यानी माइक्रोवेव एल्क्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड्स के गंभीर नुकसान के प्रति चेताया गया है।

यह पढ़ें…दिमाग, दिल, किडनी, त्वचा सब खराब कर रहा कोरोना

‘जी’ का सफर

13 अक्तूबर 1983 को अमेरिटेक मोबाइल कम्यूनिकेशंस ने पहली सेल फोन कॉल की थी। ये कॉल टेलीफ़ोन के आविष्कारक अलेक्जेंडर ग्राहम बेल के पोते को की गई थी। जिस सेल फोन से कॉल की गई वह डेढ़ किलो का था और सिर्फ 30 मिनट तक उसकी बैटरी चली। ये 1-जी का दौर था। सेल फोन टेक्नोलोजी को सस्ता और छोटा करने के लिए अस्सी के ही दशक में ’2-जी’ टेक्नोलोजी आई। 2000 के दशक में 3-जी और 2010 में 4 – जी का पदार्पण हुआ। अब पाँचवीं पीढ़ी यानी 5-जी की बारी आ गई है।

चौथी औद्योगिक क्रांति

5-जी को चौथी औद्योगिकक्रांति लाने वाली टेक्नोलोजी के रूप में पेश किया जा रहा है। ये आज के एलटीई और 4-जी से पाँच गुना ज्यादा तेजी से डेटा ट्रान्सफर करेगा। और वायरलेस संचार का एक नया युग आ जाएगा। इसमें ट्रांसमिशन की लेटेंसी यानि डेटा आदान-प्रदान के बीच लाग्ने वाले वाला समय बहुत ही कम हो जाएगा जिससे डाउनलोड या अपलोड एकदम रियल टाइम में हो सकेगा। यानि बटन दबाते ही काम पूरा। वॉइस हो या वीडियो कॉल, सब एकदम स्पष्ट हो जाएंगी। कुल मिला कर इंटरनेट एक्स्प्रेस वे पर आ जाएगा। 5-जी से आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस नई ऊंचाई पर चला जाएगा, बिना ड्राईवर की कारें आम बात हो जानेगी। टेलेमेडिसिन, ड्रोन डिलिवरी, रोबोटिक सर्जरी के लावा ऐसी ऐसी चीजें होने लगेंगी जिनकी कल्पना भी अभी नहीं की जा सकती।

टावर और मशीनों का जाल

टेलिकॉम इंडस्ट्री का कहना है कि 5-जी का सिस्टम जमाने के लिए 2026 तक 8 लाख सेल साइट्स लगाने होंगे। आज की तुलना में ये दोगुनी संख्या है। 5-जी सेल साइट्स के एंटीना आज के 3-जी या 4-जी जैसे नहीं बल्कि आकार में बहुत छोटे होंगे। इनको घरों, दफ्तरों, स्कूलों और पार्कों के करीब लगाना पड़ेगा। चूंकि इनका आकार छोटा होगा सो बिजली या स्ट्रीट लाइट के खंभों, सेल फोन टावर, बिल्डिंग की छतों आदि में ही इन्हें फिक्स कर दिया जाएगा। ये इतने छोटे होंगे कि आप इनको पहचान भी नहीं पाएंगे। बेंड्विड्थ कि मांग पूरी करने के लिए लाखों किलोमीटर लंबे नए फाइबर ओप्टिक केबल डालने होंगे। इन सबमें जबर्दस्त निवेश की जरूरत होगी लेकिन 2035 तक ग्लोबल इकॉनमी में 17 ट्रिलियन डालर का इजाफा भी होगा। नए हैंड सेट का उत्पादन और बिक्री होगे और अनुमान है कि 2022 तक 5 अरब नए डिवाइस आ जाएंगे।

 

यह पढ़ें…अब चीन की बारी

 

बॉक्स

–    2011 में विश्व स्वास्थ्य संगठन की ब्रांच इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने चेतावनी दी थी कि सेल फोन रेडिएशन से कैंसर होने की ‘संभावना’ हो सकती है।

–    इसके अलावा 2007 में दस देशों के 29 वैज्ञानिकों ने 1557 पन्नों वाली ‘बायो इनिशिएटिव’ रिपोर्ट दी थी जिसमें कहा गया था कि सेल फोन रेडिएशन नुकसानदेह और चिंता की बात है।

–    2019 में ‘इंटरनेशनल ईएमएफ साइंटिस्ट्स अपील’ नामक एक ग्रुप ने डब्लूएचओ और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण एजेंसी से अरजेंट अपील की थी कि सेल फोन रेडिएशन के बारे में तत्काल कदम उठाए जाएँ। इस ग्रुप में 43 देशों के वैज्ञानिक शामिल हैं। हार्वर्ड, कोलम्बिया यूनिवर्सिटी और जॉन होपकिंस जैसे टॉप संस्थानों से जुड़े वैज्ञानिक भी इसमें हैं। इस ग्रुप ने कहा था कि बच्चों और गर्भवती महिलाओं को एक्सपोजर से बचान नितांत आवश्यक है।

–    ‘इंटरनेशनल ईएमएफ साइंटिस्ट्स अपील’ ने वायरलेस कम्यूनिकेशन सिस्टम की नवीनतम टेक्नोलोजी 5-जी के बारे में खासतौर पर चिंता जाहीर की थी। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी थी कि मानव स्वस्स्थ्य पर 5-जी का क्या असर होता है इसका कोई अध्ययन नहीं किया गया है।