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वैज्ञानिकों को मिली कामयाबी, अब बोन मैरो और ब्लड कैंसर से मिलेगा छुटकारा

ब्लड कैंसर और बोनमैरो जैसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए राहत की खबर सामने आई है। अमेरिकी वैज्ञानिकों की एक टीम ने ऐसी दवाइयों की खोल कर ली है को कुछ ख़ास तरह के खून और बोन मैरो के कैंसर के उपचार में कारगर साबित हो सकती है।

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MonikaBy Monika

Published on 25 Dec 2020 3:28 PM GMT

वैज्ञानिकों को मिली कामयाबी, अब बोन मैरो और ब्लड कैंसर से मिलेगा छुटकारा
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अब बोनमैरो-ब्लड कैंसर से मिलेगा छुटकारा
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ब्लड कैंसर और बोनमैरो जैसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए राहत की खबर सामने आई है। अमेरिकी वैज्ञानिकों की एक टीम ने ऐसी दवाइयों की खोल कर ली है को कुछ ख़ास तरह के खून और बोन मैरो के कैंसर के उपचार में कारगर साबित हो सकती है। ख़ास बात ये है कि इस दवा की खोज करने वाले टीम में एक भारतीय अमेरिकी वैज्ञानिक भी शामिल है।

वैज्ञानिकों का बड़ा अध्ययन

ब्लड कैंसर डिस्कवरी के ताज़ा संस्करण में पहली बार प्रकाशित हुआ और दशक भर चला यह अनुसंधान क्लीवलैंड क्लीनिक डिपार्टमेंट ऑफ ट्रांसलेशनल हेमटोलॉजी एंड ओंकोलॉजी रिसर्च के जारोसलॉ मैकीजेवस्की और उनके सहयोगी बबल कांत झा ने किया है। वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में ‘ल्यूकेमिया’ कोशिकाओं को तरजीही तौर पर निशाना बनाने और उनका उन्मूलन करने की एक नयी औषधीय रणनीति पर काम किया गया।

श्वेत कोशिकाओं के बढ़ने से होता है ऐसा

आपको बता दें, कि ल्यूकेमिया एक रक्त कैंसर है, जो शरीर में श्वेत कोशिकाओं की संख्या बढ़ने से होता है। वहीं, माईलोइड ल्यूकेमिया ऐसा कैंसर है जो बोनमैरो की रक्त बनाने वाली कोशिकाओं में शुरू होता है। टीईटी2 जीन में पाई गई माईलोइड ल्यूकेमिया की प्रमुख वजह है , जिस पर दोनों वैज्ञानिकों ने पिछले दशक में अनुसंधान किया था।

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जांच करने के लिए महत्वपूर्ण

इसपर डॉक्टर का कहना है कि उन्होंने पाया कि टीईटीआई76 नाम का एक आर्टिफीसियल अणु घातक कैंसर कोशिकाओं को रोग के शुरूआती चरण में निशाना बनाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है। वही डॉक्टर झा का कहना है कि उन्होंने 2 एचजी (2-हाइड्रोक्सीग्लुटरेट) की प्राकृतिक जैविक क्षमताओं से सबक लिया। अणु का अध्ययन किया और एक अनूठा छोटा अणु बनाया। क्लीवलैंड का कहना है कि आगे के अध्ययन रोगियों में पाए जाने वाले छोटे अणु के कैंसर से लड़ने की क्षमताओं की जांच करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

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