कोरोना: चीन ने दुनिया को फिर दिखाए तेवर, कहा- कुछ भी हो जाए, नहीं करवाएंगे जांच

कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर अमेरिकी, ब्रिटेन, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया ने चीन पर अंतरराष्ट्रीय जांच कराने का दबाव बनाया है। इस दबाव का सामना…

नई दिल्ली: कोरोना वायरस की उत्पत्ति को लेकर अमेरिकी, ब्रिटेन, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया ने चीन पर अंतरराष्ट्रीय जांच कराने का दबाव बनाया है। इस दबाव का सामना करते हुए चीन ने बीते दिन बड़ी साफगोई से कहा कि ऐसी जांच का कोई भी कानूनी आधार नहीं है। पहले भी ऐसी महामारियों की जांच के कोई ठोस नतीजे नहीं आए हैं।

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डोनाल्ड ट्रंप ने साधा था निशाना

डोनाल्ड ट्रंप के अलावा ब्रिटेन, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधियों ने कोरोना की उत्पत्ति को लेकर चीन से ज्यादा पारदर्शिता की बात कही है। ट्रंप ने कहा है कि इसका पता लगाया जाना चाहिए कि क्या यह वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से निकला था। एक खबर के अनुसार, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा है कि देश को कोरोना संकट पर लंबे समय के लिए अभूतपूर्व प्रतिकूल परिस्थितियों और चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए।

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चीनी विदेश मंत्रालय ने करीब-करीब नकारा

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने इस जांच की बात को ज्यादा महत्व नहीं दिया। उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसा करने से कुछ मिला नहीं था। उन्होंने कहा कि वायरस की उत्पत्ति का पता लगाना विज्ञान का विषय है। इसका अध्ययन वैज्ञानिकों द्वारा किया जाना चाहिए। महामारी विज्ञान के अध्ययन और वायरोलॉजी अध्ययन एक-दूसरे को पुष्ट सबूत देंं तब ही निर्णायक उत्तर मिल सकेंगे। यह बहुत ही जटिल मुद्दा है क्योंकि ऐसे अध्ययन में काफी समय लगता है।

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बोले- यह कोई प्रतिशोध का विषय नहीं

प्रवक्ता गेंग ने आगे कहा कि मानव इतिहास में कई बीमारियों की उत्पत्ति का पता लगाने में दशकों का समय लगा। कुछ की प्रगति हुई लेकिन संतोषजनक उत्तर नहीं मिल सके। कुछ का तो अभी भी अध्ययन चल रहा है। गेंग ने कहा, ‘हमारा उद्देश्य यह पता लगाने का होना चाहिये कि यह कैसे होता है और मानव जाति को भविष्य में होने वाले नुकसान को रोकने का होना चाहिए। यह कोई प्रतिशोध या जवाबदेही के बारे में नहीं होना चाहिए। इस बारे में दुनिया में कोई मिसाल नहीं है और न ही कोई कानूनी आधार है।’

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