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चीन की नई चाल: अब बांग्लादेश पर डाले डोरे, भारत की घेरेबंदी के लिए उठाया ये कदम

लद्दाख की गलवान घाटी में भारत के साथ सीमा विवाद को लेकर उलझे चीन ने भारत के पड़ोसी देशों पर डोरे डालने की कोशिशें तेज कर दी हैं। चीन भारत के पड़ोसी देशों के जरिए भी उसकी घेराबंदी में लगा हुआ है।

Dharmendra kumar
Updated on: 20 Jun 2020 3:52 PM GMT
चीन की नई चाल: अब बांग्लादेश पर डाले डोरे, भारत की घेरेबंदी के लिए उठाया ये कदम
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नई दिल्ली: लद्दाख की गलवान घाटी में भारत के साथ सीमा विवाद को लेकर उलझे चीन ने भारत के पड़ोसी देशों पर डोरे डालने की कोशिशें तेज कर दी हैं। चीन भारत के पड़ोसी देशों के जरिए भी उसकी घेराबंदी में लगा हुआ है। पाकिस्तान और नेपाल के बाद अब चीन ने बांग्लादेश पर नजरें इनायत की हैं ताकि उसे भी मिलाकर भारत की घेरेबंदी को और मजबूत बनाया जा सके। चीन की सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए बांग्लादेश के लिए 5161 उत्पादों पर 97 फ़ीसदी तक टैरिफ खत्म करने की घोषणा की है।

शेख हसीना ने की थी चीन से ये मांग

कोरोना संक्रमण के चलते इस समय दुनिया के तमाम देश आर्थिक दिक्कतों से जूझ रहे हैं। बांग्लादेश भी इसका अपवाद नहीं है और वहां भी आर्थिक कठिनाइयां दिन-प्रतिदिन गहराती जा रही हैं। आर्थिक दिक्कतों से बाहर निकलने के लिए बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पिछले महीने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत की थी। इस बातचीत के बाद बांग्लादेश की ओर से चीन को पत्र लिखकर निर्यात किए जाने वाले उत्पादों पर टैक्स में छूट देने की मांग की गई थी।

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उत्पादों पर 97 फ़ीसदी तक टैरिफ ख़त्म

बांग्लादेश की इस मांग पर सकारात्मक कदम उठाते हुए चीन ने मत्स्य और चमड़ा समेत 5161 उत्पादों पर 97 प्रतिशत तक की टैक्स छूट देने का फैसला किया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने चीन के इस कदम की पुष्टि की है। बांग्लादेश विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ सूचना अधिकारी मोहम्मद तौहिदुल इस्लाम ने कहा कि बांग्लादेश के अनुरोध पर चीन ने यह बड़ा कदम उठाया है। चीन की इस घोषणा पर खुशी जताते हुए बांग्लादेश ने कहा कि चीन के वित्त मंत्रालय की तरफ से 16 जून को इस बाबत अधिसूचना जारी कर दी गई है।

नेपाल के साथ विवाद में भी चीन का ही हाथ

दरअसल चीन भारत के पड़ोसियों को अपने साथ मिलाकर भारत के खिलाफ मोर्चाबंदी करने की कोशिश में जुटा हुआ है। नेपाल के साथ पैदा हुए सीमा विवाद के पीछे भी चीन का ही हाथ बताया। सूत्रों का कहना है कि नेपाल की ओर से सीमा को लेकर खड़े किए गए विवाद की टाइमिंग भी तमाम सवालों को जन्म देती है। नेपाल की संसद में नक्शा संशोधन के प्रस्ताव से पहले भारत की ओर से बातचीत की पेशकश को भी नेपाल सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया और टकराव का तेवर दिखाया। भारत और नेपाल के बीच करीब 1880 किलोमीटर लंबी सीमा पर ऐसा विवाद पहले कभी नहीं हुआ था। नेपाल ने लिपुलेख, काला पानी और लिम्पियाधुरा को लेकर जो विवाद पैदा किया है, उसके पीछे चीन की शह बताई जा रही है।

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पाक को अपने पक्ष में कर चुका है ड्रैगन

नेपाल और बांग्लादेश से पहले चीन पाकिस्तान को पूरी तरह अपने पक्ष में कर चुका है। वह समय-समय पर पाकिस्तान को आर्थिक मदद देने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उसकी जोरदार पैरवी करता रहा है। चीन के साथ एलएसी पर विवाद शुरू होने के बाद पाकिस्तान भी एलओसी पर इसका फायदा उठाने की कोशिश में जुटा हुआ है। पाकिस्तान एलओसी से आतंकियों की घुसपैठ कराने की साजिश में जुटा हुआ है ताकि कश्मीर घाटी में एक बार फिर अस्थिरता का माहौल बनाया जा सके। हालांकि सेना की ओर से हाल के दिनों में कश्मीर में कई जोरदार ऑपरेशनों में कई आतंकियों को मार गिराया गया है। सेना की मुस्तैदी के चलते आतंकियों की घुसपैठ कराने के पाकिस्तान के मंसूबे पूरे नहीं हो पा रहे हैं।

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लद्दाख में दोनों देशों के बीच भारी तनाव

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच जबर्दस्त तनाव का माहौल बना हुआ है। लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय सेना के कर्नल समेत 20 सैन्य कर्मियों की शहादत के बाद भारत ने भी अपना रुख कड़ा कर लिया है। 15 जून को हुई इस झड़प में चीन के भी 43 सैन्य कर्मियों के मारे जाने की खबर है। हालांकि अभी तक चीन की ओर से मारे गए सैन्यकर्मियों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत में अभी तक विवाद समाप्त नहीं हो सका है।

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