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ये 3 बड़े देश मेहनत नहीं, चोरी से हासिल करना चाहते हैं कोरोना वैक्सीन

पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस की चपेट में है। कोरोना के रोज नये केस दुनिया भर में तेजी से सामने आ रहे हैं। इसके साथ ही मरने वालों का आंकड़ा भी तेजी के साथ बढ़ता जा रहा है।

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Updated on: 7 Sep 2020 8:30 AM GMT
ये 3 बड़े देश मेहनत नहीं, चोरी से हासिल करना चाहते हैं कोरोना वैक्सीन
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चीन के खुफिया विभाग के हैकर्स ने यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलीना और अन्य अमेरिकी संस्था से वैक्सीन रिसर्च का डेटा चुराने का प्रयास किया है।
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वाशिंगटन: पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस की चपेट में है। कोरोना के रोज नये केस दुनिया भर में तेजी से सामने आ रहे हैं। इसके साथ ही मरने वालों का आंकड़ा भी तेजी के साथ बढ़ता जा रहा है।

कोरोना पर जल्द से जल्द काबू पाने के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक शोध करने में जुटे हुए हैं। वैक्सीन परीक्षण का काम भारत से लेकर अमेरिका समेत अन्य मुल्कों में तेजी से चल रहा है। इस बीच कोरोना वैक्सीन से जुड़ी एक ऐसी खबर सामने आई है। जिसने अमेरिका की नींद उठाकर रख दी है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका की कोरोना वायरस वैक्सीन रिसर्च से जुड़ी जानकारी चुराने के लिए चीन, रूस और ईरान ने अपने खुफिया विभाग को काम पर लगा दिया है।

Corona कोरोना की जांच करते स्वास्थ्यकर्मी की फोटो(साभार-सोशल मीडिया)

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इन अमेरिकी संस्थाओं की डेटा चुराने की हुई कोशिश

चीन के खुफिया विभाग के हैकर्स ने यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलीना और अन्य अमेरिकी संस्था से वैक्सीन रिसर्च का डेटा चुराने का प्रयास किया है। जिसे अमेरिका के खुफिया विभाग ने अपनी सुझबुझ से नाकाम कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के दावे की मने तो हैकर्स यूनिवर्सिटी के सिस्टम को लगातार निशाना बना रहे हैं क्योंकि दवा कंपनियों के मुकाबले इनके डेटा सिस्टम की सुरक्षा कमजोर है।

उधर इसकी भनक लगने के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि चीन, रूस और ईरान के हैकर्स ने अमेरिका की बायोटेक कंपनियों के सिस्टम पर भी साइबर अटैक किया है।

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Arrest जेल में बंद युवक की फोटो(साभार-सोशल मीडिया)

दो जासूस पकड़े गये

अमेरिका और ब्रिटेन के अधिकारियों के मुताबिक, रूस के खुफिया विभाग S।V।R के जासूसों ने अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी और अन्य संस्थाओं से वैक्सीन रिसर्च का डेटा चुराने का प्रयास किया की, लेकिन वे अपनी कोशिशों में नाकाम रहे क्योंकि उन्हें हमारे मानिटरिंग सिस्टम ने पकड़ लिया।

उन्होंने बताया कि जिन अमेरिकी कंपनियों की डेटा चुराने की कोशिश हुई हैं उनमें गिलीड साइंसेज, नोवावैक्स, मॉडर्ना समिल्लित हैं।

लेकिन अभी तक किसी भी कंपनी या यूनिवर्सिटी ने डेटा चोरी की बात को कन्फर्म नहीं किया है, लेकिन कई हैकर्स सिस्टम में कुछ हद तक सेंध लगाने में सफल भी रहे हैं। अब तक हैकर्स की दो टीम को अधिकारियों ने रंगे हाथों धर दबोचा है।

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