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चीनी लेखिका को जान से मारने की धमकी, लॉकडाउन-कोरोना पर लिखीं पोस्ट्स

चीन के वुहान शहर की रहने वाली एक महिला फेंग फेंग ने लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया पर एक एक कर लगभग 60 पोस्ट लिख कर शेयर की। अब मिली जान से मारने की धमकी

Aradhya Tripathi
Updated on: 23 April 2020 8:21 AM GMT
चीनी लेखिका को जान से मारने की धमकी, लॉकडाउन-कोरोना पर लिखीं पोस्ट्स
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चीन का वुहान शहर पिछले 2-3 महीनों से लगातार सुर्ख़ियों में बना हुआ है। जिसकी वजह है चीन के इस वुहान शहर से शुरू हुआ दुनिया का अभी तक का सबसे खतरनाक व जानलेवा वायरस कोरोना। जो अब लगभग दुनिया के हर देश में अपने पैर पसार चुका है। अब एक बार फिर चीन का ये वुहान शहर सुर्ख़ियों में है। इस बार वजह है इस शहर में रहने वाली एक महिला। जिसने सोशल मीडिया पर कुछ 60 पोस्ट शेयर की। जिसके बाद इस महिला को जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। आइये हम आपको बताते हैं आखिर क्या है पूरा मामला।

छपने वाली थी वुहान डायरी

चीन के वुहान शहर की रहने वाली एक महिला फेंग फेंग ने लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया पर एक एक कर लगभग 60 पोस्ट लिख कर शेयर की। जिन्हें काफी पसनद किया गया। उनकी लिखी पोस्ट्स की इतनी तारीफ़ हुई और इतनी लोकप्रिय हुईं कि कुछ विदेशी भाषाओं के प्रकाशकों ने उन्हें एक किताब के रूप में छापने का निश्चय किया। लेकिन फेंग फेंग की इन पोस्ट्स से कुछ चीनी नाराज हो गए और उन्हें धमकियां मिलने लगीं। जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। यहां तक की उनका पता भी सार्वजनिक कर दिया गया।

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जिसके बाद उनकी पोस्ट्स पर किताब छापने वाले जर्मन प्रकाशक ने अपनी किताब का कवर वापस ले लिया है। बताया जा रहा है कि किताब का नाम था- 'वुहान डायरी: उस शहर की निषिद्ध डायरी, जहां से कोरोना संकट शुरू हुआ था'। चीन की प्रसिद्द लेखिका कई सालों से चीन के मामलों पर लिखती रहीं हैं। इनका असली नाम वांग फेंग है। लेकिन लेखन की दुनिया में वो फेंग फेंग नाम से मशहूर हैं। साल 2010 में लेखिका को चीन का सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कार भी मिल चुका है।

गैर सार्वजनिक बातों का किया जिक्र

ऐसे में सवाल उठता है कि फेंग फेंग आखिर क्या ऐसा अपनी पोस्ट्स में लिखती थीं जिसको लेकर उनको धमकियां मिलना शुरू हो गईं। जानकारी करने पर पता चला है कि फेंग फेंग ने कोरोना वायरस के चलते चीन में लॉकडाउन लगने के बाद 25 जनवरी से ये पोस्ट्स एक डायरी के रूप में लिखना शुरू की थी। अपनी अपनी पोस्ट में वे उन बातों को लिखती थीं जिन्हें सार्वजनिक नहीं किया जा रहा था। इस दौरान जो वो सुनती, देखती या महसूस करतीं थी वो ही लिखती थीं। साथ ही लेखिका ने पोस्ट में बौद्धिक और आम लोगों की कोरोना और लॉकडाउन पर राय भी डाली।

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फेंग फेंग ने अपनी आखिरी पोस्ट 24 मार्च को लिखी जब चीन ने लॉकडाउन खतम करने की बात कही। इस दौरान लेखिका की स्थानीय श्मशानों के बारे में लिखी गई एक पोस्ट काफी लोकप्रिय हुई थी। फेंग फेंग को उनके एक डॉक्टर मित्र ने एक तस्वीर भेजी थी जिसमें लोगों के मोबाइल फोन ऐसे ही सड़क पर पड़े थे उन्हें कोई लेने या पूछने वाला नहीं था। ये सारे फोन उन लोगों के थे जो कोरोना से मर गए थे। इस दौरान लेखिका ने वुहान के अस्पतालों और सरकारी बंदोबस्त के बारे में भी एक लिखा था। कि कैसे अस्पतालों से मरीजों को लौटाया गया या मास्क खत्म हो जाना।

शहर के बीचोबीच लगाया धमकी भरा पोस्टर

धमकियां मिलने के बाद लेखिका काफी डर गईं और उन्होंने बहुत कुछ डिलीट कर दिया। एक स्थानीय मीडिया को दिए गए इंटरव्यू में लेखिका ने कहा था कि उनका सोशल मीडिया अकाउंट Weibo अस्थायी तौर पर बंद कर दिया गया। गौर तलब है कि चीन में कम्युनिस्ट सरकार के कुछ नियमों में से एक ये भी है कि वहां फेसबुक या ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म काम नहीं करेंगे। ऐसा इस लिए ताकि सरकार लोगों के नजरिये पर पहरा रख सके और लोग अपना नजरिया सबके सामने न रख सकें। यहां तक कि लेखिका का इंटरव्यू भी Caijing से हटा दिया गया था लेकिन तब तक उसे कई दूसरे मीडिया संस्थान उठा चुके थे। Radio France Internationale में छपी एक खबर के मुताबिक लेखिका को धमकी देने वाले अनाम चीनी नागरिक ने वुहान शहर के ठीक बीचोंबीच एक पोस्टर लगवा दिया,

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जिसमें लेखिका की तस्वीर के साथ लिखा था - चीन को बदनाम करने की वजह से लेखिका को शर्म से या तो संन्यास ले लेना चाहिए या खुदकुशी कर लेनी चाहिए। और अगर ऐसा नहीं होता है तो मैं खुद ही फेंग फेंग को मार दूंगा। इसके अलावा भी कई लोग लेखिका के खिलाफ बोल रहे हैं। लोगों का कहना है कि लेखिका को इतनी शोहरत देने क परिणाम चीन को ही भुगतना पड़ गया। कुछ ने कहा कि की इन पोस्ट्स में सिर्फ चीन वुहान का काला पहलू ही दिखाया और बताया जाएगा।

जून तक आ सकती है किताब

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अंग्रेजी में लेखिका की किताब 30 जून तक आ सकती है, जिसका शीर्षक है- 'Dispatches from a quarantined city: Wuhan Diary'. वहीं जर्मन संस्करण ज्यादा विवादित है, जिसमें कवर में काला मास्क बना हुआ है और शीर्षक है Wuhan Diary: The forbidden diary from the city where the corona crisis began. जर्मन कवर पर चलते विवाद के कारण किताब के जर्मन प्रकाशक Hoffmann und Campe ने अपना कवर भी कथित तौर पर वापस ले लिया है। अब कहा जा रहा है कि वो कवर डिजाइन केवल अस्थायी तौर पर था।

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