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भारत के लिए अच्छी खबर: कोरोना वायरस से नहीं होगा ज्यादा नुकसान, शोधकर्ताओं का दावा

तेजी से बढ़ते मौतों के आंकड़ों के बीच अमेरिकी शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि जिन देशों में BCG वैक्सीन का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया है, वहां पर बाकी देशों की तुलना में मृत्युदर 6 गुनी कम है।

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ShreyaBy Shreya

Published on 8 April 2020 9:19 AM GMT

भारत के लिए अच्छी खबर: कोरोना वायरस से नहीं होगा ज्यादा नुकसान, शोधकर्ताओं का दावा
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नई दिल्ली: पूरी दुनिया इस वक्त कोरोना वायरस का प्रकोप झेल रही है। वहीं इसके रोकथाम के लिए कई अहम फैसले लिए गए हैं। साथ ही कई शोधकर्ता भी कोरोना वायरस को फैलने से रोकने लिए कई शोध कर रहे हैं। दुनियाभर में तेजी से कोरोना के चलते बढ़ते मौतों के आंकड़ों के बीच अमेरिकी शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन में दावा किया है कि जिन देशों में BCG यानि बैसेलियस कैलमैटे गुएरिन वैक्सीन का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया है, वहां पर बाकी देशों की तुलना में मृत्युदर 6 गुनी कम है।

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हेल्थ एक्सपर्ट्स की समीक्षा के बाद होगा प्रकाशित

यह अध्ययन जॉन्स हॉपकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के एक्सपर्ट्स द्वारा की गई है। आर्काइव साइट मेडरिक्सिव पर स्टडी के इन परिणामों को प्रकाशित किया गया है। जिसे हेल्थ एक्सपर्ट्स की समीक्षा के बाद मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया जाएगा।

रोग प्रतिरोधक शक्ति को विकसित करती है BCG वैक्सीन

BCG यानि बैसेलियस कैलमैटे गुएरिन वैक्सीन टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) के खिलाफ रोग प्रतिरोधक शक्ति (Immunity) को विकसित करती है। डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती ट्रायल में ये सामने आया है कि जिन लोगों को बीसीजी की वैक्सीन लगवाई गई है, उनका इम्यूनिटी सिस्टम यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता ज्यादा मजबूत होता है। अन्य लोगों की तुलना में वे खुद को संक्रमण के खिलाफ लड़ने में ज्यादा सुरक्षित रख पाते हैं।

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बतौर उदाहरण, अमेरिकी नागरिकों पर किए गए एक ट्रायल में ये बताया गया था कि बचपन में दी गई बीसीजी वैक्सीन टीबी के खिलाफ 60 सालों तक सुरक्षा प्रदान करती है।

हालांकि ये कहना मुश्किल है कि ये वैक्सीन दूसरे संक्रमणों के खिलाफ कितना सुरक्षित रख पाती है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि इस वैक्सीन से अंदरुनी इम्यूनिटी सिस्टम ज्यादा बेहतर से काम करती हो।

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भारत में हुआ है व्यापक इस्तेमाल

बता दें कि भारत और अफ्रीकी देशों में बीसीजी वैक्सीन का काफी ज्यादा इस्तेमाल हो चुका है। अगर शोधकर्ताओं की इस स्टडी के परिणामों पर वैज्ञानिक मुहर लगा देते हैं तो यह भारत के लिए काफी अच्छी खबर हो सकती है। हालांकि इस वैक्सीन से कोरोना से मृत्यु दर कम होने की बात कही गई है, लेकिन इससे COVID-19 का खतरा कम नहीं होगा।

शोधकर्ताओं ने उंम्मीद जताई है कि बीसीजी वैक्सीन से इम्यून सिस्टम मजबूत हो जाएगा और शरीर पर कोरोना वायरस के हमला बोलने से पहले ही इसकी पहचान कर इसे नष्ट कर देगा।

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