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तबाह पाकिस्तान: पेट्रोल से महंगा बिकेगा पानी, आर्थिक स्थिति बिल्कुल 'शून्य'

पाकिस्तान की ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (ओजीआरए) पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में लगभग 57 प्रतिशत की कटौती करने का प्लान बना रही है।

Vidushi Mishra
Updated on: 1 May 2020 8:57 AM GMT
तबाह पाकिस्तान: पेट्रोल से महंगा बिकेगा पानी, आर्थिक स्थिति बिल्कुल शून्य
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तबाह पाकिस्तान: पानी से भी सस्ता पेट्रोल, आर्थिक स्थिति बिल्कुल 'शून्य'
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नई दिल्ली। महामारी के दौर में पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल बहुत सस्ता होने वाला है। पाकिस्तान की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की ऑयल रेगुलेटरी बॉडी पेट्रोलियम की कीमतों में कटौती करने पर सोच-विचार कर रही है। असल में कोरोना वायरस संकट की वजह से जूझ रही पूरी दुनिया में तेल की खपत बिल्कुल न के बराबर कम हो गई है जिससे इंटरनेशनल मार्केट में तेल के दामों में भयंकर गिरावट आई है।

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इंटरनेशनल मार्केट में तेल के गिरते दाम

ऐसे में भारत में भी ये उम्मीद जताई जा रही थी कि उपभोक्ताओं को इंटरनेशनल मार्केट में तेल के गिरते दामों का मुनाफा मिलेगा। हालांकि, भारतीय कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम अभी भी पहले जैसे ही रखे हैं। भारतीय क्रूड बास्केट के दाम 20 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गए हैं लेकिन रिटेल दामों में कोई कमी नहीं आई है।

साथ ही पाकिस्तान की ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (ओजीआरए) पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में लगभग 57 प्रतिशत की कटौती करने का प्लान बना रही है।

एक अधिकारी के अनुसार, डीजल के दाम प्रति लीटर 33.94 और पेट्रोल के दाम प्रति लीटर 20.68 रुपये तक घटाए जा सकते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेशनल मुद्रा कोष से परामर्श लेने के बाद नियामक संस्था इस मामले पर फैसला करेगी। लेकिन पाकिस्तान की सरकार चाहती है कि पेट्रोल-डीजल की ओजीआरए के प्रस्ताव की आधी कटौती ही की जाए।

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राजस्व को हो रहे नुकसान की भरपाई

बीते महीने इटंरनेशनल तेल के दामों में 52 प्रतिशत की गिरावट आई थी लेकिन सरकार ने देश के दामों में सिर्फ 12-13 प्रतिशत की ही कमी की थी।

वहीं भयानक आर्थिक संकट से जूझ रही पाकिस्तान सरकार इस कदम के तहत राजस्व को हो रहे नुकसान की भरपाई करना चाह रही थी।

पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल की पाकिस्तान में सबसे ज्यादा खपत होती है और दोनों ही सरकारी राजस्व के मुख्य स्रोत हैं। हालांकि, महामारी की वजह से पेट्रोलियम की खपत में बेहद कमी आने से सरकारी राजस्व का भी काफी नुकसान हो रहा है।

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