चीन की बइमान हरकत, भारत के साथ आया फ्रांस और उसकी सेना

फ्लोरेंस के इस पत्र से एक बात साफ़ तौर पर जाहिर है कि फ़्रांस इस जंग में भारत के साथ खड़ा है। भारत को ऐसे समय में फ्रांस का साथ मिलना एक बहुत ही अच्छी खबर है।

पिछले कुछ दिनों से भारत और चीन के बीच LAC पर तनाव लगातार जारी है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच झड़प भी हो चुकी है। भारत-चीन के बीच तनाव के दौरान अब भारत को फ़्रांस का साथ मिल गया है। फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने गलवान वैली की हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों की शहादत पर भी दुख जताया है। ऐसे समय में फ्रांस का भारतीय सैनिकों की शहादत पर दुःख जताना और भारत के साथ आना भारत के लिए एक अच्छा संकेत है।

फ्रांस खड़ा है भारत के साथ

फ्रांस की रक्षा मंत्री फ्लोरेंस पार्ली ने सोमवार को भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कोएक पत्र लिखा। जिस पत्र में फ्लोरेंस ने लिखा, ” “यह सैनिकों, उनके परिवारों और राष्ट्र के खिलाफ एक कठिन आघात था। इन कठिन परिस्थितियों में, मैं फ्रांसीसी सशस्त्र बलों के साथ अपने दृढ़ और मैत्रीपूर्ण समर्थन को व्यक्त करना चाहती हूं। फ्रांस की सेना आपके साथ खड़ी है।”

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फ्लोरेंस के इस पत्र से एक बात साफ़ तौर पर जाहिर है कि फ़्रांस इस जंग में भारत के साथ खड़ा है। और भारत को ऐसे समय में फ्रांस का साथ मिलना एक बहुत ही अच्छी खबर है।पीएम मोदी की विदेश नीति अपना काम कर रही है।क्योंकि ऐसे समय में जब भारत ने चीन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है तो बाकी देशों का साथ मिलना बहुत जरूरी भी है महत्वपूर्ण भी।

फ़्रांस की रक्षा मंत्री ने जताई राजनाथ सिंह से मिलने की इक्षा

इस बात को याद करते हुए कि भारत इस क्षेत्र में फ्रांस का रणनीतिक साझेदार है। रक्षा मंत्री पार्ली ने अपने देश की गहरी एकजुटता को दोहराया। फ्रांस की मंत्री ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के निमंत्रण पर उनसे भारत में मिलने की इच्छा भी जताई। ताकि इस चर्चा और आगे बढ़ाया जा सके। जैसा कि ज्ञात है कि बीते 15 जून को गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे। वहीं, चीन के कम से कम 40 जवानों के मारे जाने की बात सामने आई थी।

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हालांकि, चीन ने इस दावे को ये कहते हुए टाल दिया कि वो फेक न्यूज होगी। कुछ भी एक साथ 59 चीनी मोबाइल ऐप्स को बैन करके भारत ने चीन के खिलाफ अपना मोर्चा खोल दिया ही। भारत के इस कदम से चीन को काफी नुकसान होने वाला है।ऐसे में ये देखना बेहद जरुरी है कि अब चीन अपना अगला कदम क्या उठाता है।