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आज भी रहस्य है ये परछाईं, 80 साल में भी नहीं उठ पाया इस राज से पर्दा

यह दुनिया अनसुलझे रहस्यों  से भरा हुआ है। इस दुनिया में कुछ ऐसी  जगहें हैं जहां लोग जाने से करताते हैं। इन रहस्यों के बारे में सदियों से पता लगाया जा रहा है लेकिन अब तक इस अनसुलझे रहस्यों को कोई नहीं..

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Updated on: 21 March 2021 9:41 AM GMT
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नई दिल्लीः यह दुनिया अनसुलझे रहस्यों से भरा हुआ है। इस दुनिया में कुछ ऐसी जगहें हैं जहां लोग जाने से करताते हैं। इन रहस्यों के बारे में सदियों से पता लगाया जा रहा है लेकिन अब तक इस अनसुलझे रहस्यों को कोई नहीं सुलझा पाया है । जी हां आज हम आप से एक ऐसे ही रहस्य के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे सुन कर आप भी हैरान रह जाएंगे

आइए जानते हैं कौन सी है जगहः

आप सभी को याद होगा साल 1945 में जब अमेरिकी सेना ने जापान के हिरोशिमा और नागाशाकी शहरों पर परमाणु बम गिराए। इस जानलेवा हमले में लाखों लोगों की जान चली गई। और तमाम लोग अपाहिज हो गए।

हिरोशिमा एक रहस्यः

आप को बता दें कि सबसे पहले अमेरिका ने हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराए। जिसके बाद से हिरोशिमा में चारों तरफ लाश ही लाश बिछ गया। आज भी लोग यहा जाने से डरते हैं क्योकि इस हमले के बाद से हिरोशिमा एक रहस्य बन कर रह गया। कहा जाता है कि आज भी इंसान जैसी दिखने वाली एक परछाई नजर आती है जो पिछले 75 साल से इसी तरह से दिखाई दे रही है। जिसे आज तक कोई ने सुलझा नहीं सका। इस रहस्यमयी परछाई को 'द हिरोशिमा स्टेप्स शैडो' या 'शैडोज ऑफ हिरोशिमा' के नाम से जाना जाता है।Hiroshima

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कब हुआ था यह हमलाः

बताते चले कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब अमेरिका ने हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया था। एक झटके में अनगिनत लोग मौत के आगोश में समा गए। कहा जाता है कि परछाई वाली ये तस्वीर भी धमाके वाली जगह से 850 फीट की दूरी पर खींची गई। जहां कोई व्यक्ति मौजूद था। यह भी कहा जाता है कि परमाणु बम की ताकत से वह व्यक्ति गायब हो गया। लेकिन उसकी परछाई को परमाणु बम भी मिटा नहीं सका। इस छाया की वास्तविकता की कभी पहचान नहीं हो पाई कि वो व्यक्ति कौन था, जो वहां पर बैठा हुआ था। यह अब तक रहस्य ही बना हुआ है।

अमेरिका के इस हमले से हिरोशिमा में इतने लोगों की गई जानः

एक अनुमान के अनुसार जब हिरोशिमा परमाणु विस्फोट हुआ तो लगभग एक लाख 40 हजार लोगों की जान गई थी। और इस विस्फोट की भयंकर ऊर्जा की गर्मी से करीब 60 हजार से 80 हजार लोग मारे गए। जबकि इस परमाणु विकिरण से संबंधी बीमारियों के चलते भी हजारों लोगों की मौत हो गई। बता दें कि इसका वजन करीब 4400 किलोग्राम था।

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लोग इस गर्मी से जलकर राख हो गएः

बताया जाता है कि इस विस्फोटक हमले से जमीनी स्तर पर लगभग 4,000 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी पैदा हुई। जिसके कारण इस गर्मी से जलकर लोग राख हो गए।

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