भारत ने खोली पाक की कलई: आतंकवाद का केंद्र मानवाधिकार पर न बोले

भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की कलई खोलते हुए उसे आतंकवाद का केंद्र बताया है। भारत ने पाकिस्तान पर बड़ा हमला करते हुए कहा

Published by Roshni Khan Published: September 16, 2020 | 10:33 am
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भारत ने खोली पाक की कलई: आतंकवाद का केंद्र मानवाधिकार पर न बोले (social media)

नई दिल्ली: भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की कलई खोलते हुए उसे आतंकवाद का केंद्र बताया है। भारत ने पाकिस्तान पर बड़ा हमला करते हुए कहा कि उसे मानवाधिकार पर व्याख्यान देने का हक नहीं है क्योंकि उसने लगातार जातीय और हिंदुओं, सिखों और ईसाइयों समेत अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

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कुत्सित इरादों को पूरा करने में जुटा है पाक

जिनेवा में मानवाधिकार परिषद के 45वें सत्र के दौरान पाकिस्तान की ओर से की गई टिप्पणी के जवाब में भारत की ओर से पाकिस्तान पर बड़ा हमला बोला गया। जवाब देने के अपने अधिकार का इस्तेमाल करते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान की कलई खोलकर रख दी।

भारत ने कहा कि पाकिस्तान झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाकर अपने कुत्सित इरादों को पूरा करने में लगा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को बदनाम करने की उसकी पुरानी आदत है।

पाक में धार्मिक अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न

भारतीय प्रतिनिधि इंद्रमणि पांडेय ने कहा कि भारत और दुनिया के अन्य देशों को पाकिस्तान जैसे देश से मानवाधिकार पर व्याख्यान सुनने की जरूरत नहीं है। पाकिस्तान ऐसा देश है जो लगातार जातीय और धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने में जुटा हुआ है।

पाकिस्तान आतंकवाद का बड़ा केंद्र बन चुका है और इस देश के प्रधानमंत्री ने जम्मू कश्मीर में लड़ाई के लिए हजारों आतंकियों को प्रशिक्षण देने की बात गर्व के साथ स्वीकार की है।

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पाक से आतंकी गतिविधियों का संचालन

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधित सूची में शामिल तमाम आतंकवादी पाकिस्तान से अपनी आतंकी गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं और पाकिस्तान सरकार की ओर से उन्हें पूरी मदद दी जा रही है। पाकिस्तान जैसे देश को मानवाधिकारों पर दुनिया के दूसरे देशों को प्रवचन नहीं देना चाहिए।

भारत ने कहा कि पाकिस्तान जम्मू कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ कराने के साथ ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पटरी से उतारने की लगातार साजिश रच रहा है। इसके बावजूद भारत की ओर से जम्मू कश्मीर में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को पुनर्जीवित किया गया है और यहां सामाजिक और आर्थिक विकास को रफ्तार दी गई है।

भारत मानवाधिकारों के प्रति प्रतिबद्ध

मानवाधिकार परिषद के 45वें सत्र के दौरान भारत के स्थायी प्रतिनिधि इंद्रमणि पांडेय ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बेचलेट के क्षेत्र के बारे में दिए गए बयान पर खेद जताया। भारत के प्रतिनिधि ने कहा कि हमारा देश मानवाधिकारों को बरकरार रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और आंतरिक मामलों में दखल नहीं दिया जाना चाहिए। मानवाधिकार के एजेंडे पर बहस निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जानी चाहिए।

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जम्मू-कश्मीर का विशेष तौर पर जिक्र

भारत की ओर से जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 का भी उल्लेख किया गया। भारत ने कहा कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को पिछले साल खत्म कर दिया गया है।

जम्मू-कश्मीर में किए गए इस बदलाव की वजह से अब इस क्षेत्र के लोग उन मूलभूत अधिकारों को हासिल करने में कामयाब हुए हैं जो भारत के अन्य हिस्सों के लोगों को हासिल है। उन्होंने कहा कि भारत ने काफी सोच समझकर यह कदम उठाया है और अब इस केंद्र शासित प्रदेश में विकास और तरक्की की रफ्तार में तेजी आई है।

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