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इस देश के निशाने पर चीन: तानी बीजिंग पर मिसाइलें, चीनी पनडुब्बियों को खदेड़ा

जापान ने चीन के खिलाफ सैन्य गतिविधियों को बढ़ा दिया है। इतना ही नहीं जापान की मिसाइलें चीन की राजधानी बीजिंग पर निशाना साध रही हैं।

Shivani Awasthi
Updated on: 22 Jun 2020 5:56 PM GMT
इस देश के निशाने पर चीन: तानी बीजिंग पर मिसाइलें, चीनी पनडुब्बियों को खदेड़ा
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नई दिल्ली: चीन कई देशों के बीच घिरता नजर आ रहा है। कोरोना मामले में अमेरिका की आलोचना और भारत संग सैनिक और सीमा तनाव के अब जापान भी चीन के खिलाफ खड़ा हो गया है। जानकारी के मुताबिक, जापान ने चीन के खिलाफ सैन्य गतिविधियों को बढ़ा दिया है। इतना ही नहीं जापान की मिसाइलें चीन की राजधानी बीजिंग पर निशाना साध रही हैं।

जापान सैन्य गतिविधियां बढ़ाई, तानी बैलिस्टिक मिसाइल

दरअसल, दूसरे विश्व युद्ध के बाद से शांत देश के तौर पर नजर आने वाला देश जापान चीन संग विवादों को लेकर एक बार फिर एक्टिव हो गया है। मिली जानकारी के मुताबिक, जापान की सेना ने चीन विरोधी गतिविधियां शुरू की है। जापान ने अपनी सीमा पर बैलिस्टिक मिसाइलो को तैनात किया है। वहीं इन मिसाइलों का निशाना चीन की ओर है। सभी मिसाइलों को सेना ने चीन की तरफ तान दिया है। वहीं कुछ मिसाइलों ने चीन की राजधानी बीजिंग को टारगेट पर लिया है।

जापानी समुद्र क्षेत्र में घुसी चीनी नेवी की पनडुब्बी खदेड़ी

इतना ही नहीं जापानी के समुद्र क्षेत्र में घुसी चीनी नेवी की पनडुब्बी को भी जापान ने दूर तक खदेड़ दिया। जापान ने 20 जून को चीन नेवी को उनके जलक्षेत्र में डिटेक्ट किया था। जानकारी होते ही हरकत में आई जापानी नौसेना ने पेट्रोलिंग एयरक्राफ्ट की मदद से चीनी पनडुब्बी को जलक्षेत्र से बाहर खदेड़ दिया।

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निर्जन द्वीपों पर चीन और जापान का दावा

बता दें कि चीन निर्जन द्वीपों पर अपना दावा करते हुए कई बार जापान से उलझ चुका है। जिन द्वीपों पर चीन अपना दावा करता है, उसे जापान अपने जलक्षेत्र का भाग मानता है। इन द्वीपों की जिम्मेदारी 1972 से जापान ने ले रखी है।

चीन भिड़ा तो जापान के साथ आएगा अमेरिका :

वहीं जापान ने अमेरिका को भरोसे में लिया है। गौरतलब है कि जापान और अमेरिका के बीच 1951 की सेन फ्रांसिस्को संधि है, जिसके तहत अमेरिका ने जापान की रक्षा की जिम्मेदारी ली हुई है। संधि के मुताबिक़, जापान पर हमला अमेरिका पर हमला माना जाएगा। ऐसे में चीन अगर जापान से भिड़ेगा तो उसे अमेरिका का भी सामना करना पड़ सकता है।

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Shivani Awasthi

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