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नेपाल हुआ चीन के खिलाफ: सियासत में दखल देना पड़ा भारी, शुरु हुआ विरोध

प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के राज में नेपाल की घरेलू सियासत में चीन का दखल इतना ज्यादा बढ़ गया है कि नेपाल के पीएम चीन के इशारे पर ही फैसले ले रहे हैं।

Shivani
Updated on: 7 July 2020 5:13 PM GMT
नेपाल हुआ चीन के खिलाफ: सियासत में दखल देना पड़ा भारी, शुरु हुआ विरोध
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काठमांडू। नेपाल की घरेलू राजनीति में चीन के बढ़ते दखल से नेपाल के लोगों में नाराजगी पैदा हो गई है। चीन के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए लोग सड़कों पर उतर आए और और गो बैक चाइना का नारा बुलंद किया। दरअसल प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के राज में नेपाल की घरेलू सियासत में चीन का दखल इतना ज्यादा बढ़ गया है कि नेपाल के पीएम चीन के इशारे पर ही फैसले ले रहे हैं। भारतीय इलाकों को नेपाल के नक्शे में शामिल करने का कदम भी चीन के इशारे पर ही उठाया गया है। ओली की कुर्सी पर आए संकट के बाद चीन और परेशान हो उठा है और किसी भी तरह ओली की कुर्सी बचाने में जुटा है। अब नेपाल में चीन के इस दखल का जबर्दस्त विरोध शुरू हो गया है।

युवाओं ने लगाए 'गो बैक चाइना' के नारे

काफी संख्या में युवाओं ने सड़कों पर उतरकर गो बैक चाइना के नारे बुलंद किए। नेपाल के मुख्य विपक्षी दल नेपाली कांग्रेस के स्टूडेंट विंग के सदस्यों ने हाथों में पोस्टर लेकर चीन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इन पोस्टरों पर गो बैक चाइना और नो इंटरफिअरेंस जैसे नारे लिखे हुए थे। नेपाली युवाओं में खास गुस्सा नेपाल में चीन की राजदूत होऊ यांगी को लेकर है। यांगी खुलकर नेपाल की सियासत में दखल दे रही हैं। पिछले हफ्ते के दौरान उन्होंने ओली के साथ ही नेपाल की राष्ट्रपति और पुष्प कमल दहल प्रचंड से मुलाकात कर नेपाल के सियासी संकट को टालने की कोशिश की है।

चीनी राजदूत का सियासत में दखल

बताया जाता है कि नेपाल की राजनीति में उनका दखल इतना ज्यादा है कि वे कहीं भी बेरोकटोक आती-जाती रही हैं। चीनी राजदूत ने हाल में नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल से भी मुलाकात की थी और देश की मौजूदा सियासत पर चर्चा की थी। हालांकि अभी तक इस बात का ब्योरा नहीं मिल सका है कि नेपाल के नेताओं के साथ चीनी राजदूत की क्या बातचीत हुई है।

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रिमोट से संचालित व्यवस्था पर सवाल

नेपाल के कई नेताओं ने देश की अंदरूनी राजनीति में चीनी राजदूत के बढ़ते दखल पर विरोध जताया है। उनका कहना है कि चीन की राजदूत नेपाल के अंदरूनी राजनीतिक मामलों में दखल दे रही हैं। नेपाल के पूर्व विदेश मंत्री और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के अध्यक्ष कमल थापा ने सवाल किया कि क्या रिमोट कंट्रोल से संचालित लोकतांत्रिक गणराज्य से नेपाल के लोग लाभान्वित होंगे?

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सरिता गिरी को मिली सच बोलने की सजा

इस बीच नेपाल के विवादित नक्शे में भारतीय इलाकों को शामिल करने का विरोध करने वाली एकमात्र सांसद सरिता गिरी को सच बोलने की सजा दी जा रही है। समाजवादी पार्टी ने सांसद सरिता गिरी को पद से हटाने की सिफारिश की है। पार्टी के टास्क फोर्स की ओर से सिफारिश की गई है कि गिरी को संसदीय सीट और पार्टी की सामान्य सदस्यता से हटा दिया जाए।

उन्हें पार्टी संसदीय दल के निर्देशों का पालन न करने का दोषी बताया गया है। सरिता गिरी ने उस संविधान संशोधन विधेयक का विरोध किया था जिसे कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधूरा सहित नक्शे में संशोधन करने के लिए लाया गया था। इस विवादित नक्शे के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाली वे अकेली सांसद थीं। उन्हें दूसरे सांसदों का समर्थन नहीं मिला और इस कारण उनकी ओर से रखा गया संशोधन प्रस्ताव भी गिर गया था।

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