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मंगल ग्रह पर पानी: नासा के वैज्ञानिकों का दावा, जीवन होने का मिला संकेत!

प्रमुख शोधकर्ता ईवा स्केलर के मुताबिक, मंगल ग्रह पर मौजूद खनिजों के क्रिस्टल स्ट्रक्चर में पानी मौजूद है। स्केलर द्वारा तैयार किए मॉडल के अनुसार 30-90 फीसदी पानी इन्हीं खनिजों की सतह के भीतर मौजूद है।

Shreya
Updated on: 18 March 2021 6:54 AM GMT
मंगल ग्रह पर पानी: नासा के वैज्ञानिकों का दावा, जीवन होने का मिला संकेत!
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नई दिल्ली: मंगल ग्रह (Mars) पर वैज्ञानिक प्राचीन जीवन मौजूद होने का सबूत ढूंढने में लगे हुए हैं। इस बीच अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने Mars पर प्राचीन पानी छिपे होने का दावा किया है। नासा के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि मंगल ग्रह की सतह के नीचे प्राचीन पानी छिपा है।

30-90 फीसदी पानी खनिजों की सतह के भीतर मौजूद

अब नासा द्वारा किए गए इस नए दावे ने उस थ्योरी को चुनौती दी है कि जिसमें कहा गया था कि मंग्रल ग्रह का सारा पानी अंतरिक्ष में उड़ गया है। साइंस जर्नल में प्रकाशित हुए कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी और नासा के जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के वैज्ञानिकों के अध्ययन में दावा किया गया है कि मंगल ग्रह पर मौजूद 30-90 फीसदी पानी ग्रह पर मौजूद खनिजों और उसकी सतह के भीतर मौजूद है।

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MARS WATER (फोटो- नासा)

इस वजह से खत्म होने लगा Mars पर पानी

वैज्ञानिकों का कहना है कि 400 करोड़ साल पहले मंगल (Mars) पर इतना पानी मौजूद था कि उससे यहां पर सौ से 1500 मीटर गहरा और यहां तक कि पूरे ग्रह पर फैला समुद्र बन सकता था। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ग्रह की चुंबकीय शक्ति खत्म होने के बाद मंगल का वातावरण खत्म होने लगा था। इसी वजह से मंगल का पानी भी खत्म हो गया और यह करोड़ों साल बाद भी सूखा है।

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खनिजों के क्रिस्टल स्ट्रक्चर में मौजूद है पानी

प्रमुख शोधकर्ता ईवा स्केलर के मुताबिक, मंगल ग्रह पर मौजूद खनिजों के क्रिस्टल स्ट्रक्चर में पानी मौजूद है। स्केलर द्वारा तैयार किए मॉडल के अनुसार 30-90 फीसदी पानी इन्हीं खनिजों की सतह के भीतर मौजूद है। कहा जा रहा है कि वैज्ञानिकों ने मंगल पर भेजे गए ऑर्बिटर और अन्य उपग्रहों से मिले आंकड़ों के अध्ययन के बाद ये दावा किया है।

ईवा स्केलर के मुताबिक, ग्रह पर कुछ पानी खत्म हो गया होगा या फिर गायब हो गया होगा, लेकिन अभी भी ज्यादातर पानी मंगल पर ही मौजूद है।

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